खेती से स्वास्थ्य तक भारत की नई क्रांति, ‘सेहत मिशन’ लॉन्च, पोषण और रोग-नियंत्रण पर होगा फोकस

India's new revolution from agriculture to health, 'Sehat Mission' launched, focus will be on nutrition and disease control

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने खेती और स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ते हुए एक नई राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में नई दिल्ली में “सेहत मिशन” लॉन्च किया गया। यह मिशन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की साझेदारी से शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य खेती, पोषण और स्वास्थ्य के बीच वैज्ञानिक संबंध स्थापित करना है।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी उपस्थित रहे। “सेहत” यानी Science Excellence for Health through Agricultural Transformation एक ऐसा राष्ट्रीय मिशन है, जो खेती को बेहतर पोषण, रोग-निवारण और किसान कल्याण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि “सेहत मिशन” भारत की स्वास्थ्य नीति में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब देश केवल बीमारी के इलाज पर नहीं, बल्कि रोगों की रोकथाम, समय पर पहचान और निरंतर स्वास्थ्य देखभाल पर जोर दे रहा है। उनके अनुसार भारत अब “रिएक्टिव” नहीं बल्कि “प्रोएक्टिव हेल्थ सिस्टम” की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

श्री नड्डा ने कहा कि लंबे समय तक कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र अलग-अलग काम करते रहे, लेकिन अब ICAR और ICMR का साथ आना विज्ञान-आधारित और व्यवहारिक समाधानों की नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि भारत आज दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है—एक ओर कुपोषण और दूसरी ओर तेजी से बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियां जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर। ऐसे में यह मिशन देश को वैज्ञानिक और सस्ते समाधान उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत को अब अपने अनुभव, अपने अनुसंधान और अपने वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर स्वदेशी समाधान विकसित करने होंगे। कम लागत वाले, उच्च गुणवत्ता वाले और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय ही देश की बड़ी आबादी के लिए सबसे उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि ICMR इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि “सेहत मिशन” केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि “होल ऑफ गवर्नमेंट” और “होल ऑफ सिस्टम्स” अप्रोच का उदाहरण है, जिसमें विज्ञान, नीति और जमीनी क्रियान्वयन को एक साथ जोड़कर काम किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल “हेल्दी इंडिया” और “स्ट्रॉन्ग इंडिया” के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाएगी।

वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने “सेहत मिशन” को भारत के लिए ऐतिहासिक और अभूतपूर्व पहल बताते हुए कहा कि यह खेती, पोषण और स्वास्थ्य को जोड़कर स्वस्थ भारत के निर्माण की मजबूत दिशा तय करेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में स्वस्थ शरीर को सबसे बड़ा सुख माना गया है और अच्छा स्वास्थ्य सही भोजन से ही संभव है।

श्री चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब देश को केवल अधिक उत्पादन की नहीं, बल्कि पोषणयुक्त और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “जो खाना है, वही उगाना है, तभी बनेगा स्वस्थ भारत।” उनके अनुसार अब समय आ गया है कि “क्या खाएं” के साथ-साथ “क्या उगाएं” पर भी राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से काम किया जाए।

उन्होंने भारतीय जीवन-दर्शन “हितभुक, मितभुक और ऋतुभुक” का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर के लिए लाभकारी, संतुलित और मौसम के अनुसार भोजन ही वास्तविक स्वास्थ्य का आधार है। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए ICAR और ICMR ने मिलकर यह मिशन शुरू किया है, जो खेत से थाली और थाली से स्वास्थ्य तक वैज्ञानिक कड़ी तैयार करेगा।

कृषि मंत्री ने बताया कि मिशन का फोकस बायो-फोर्टिफाइड फसलों, पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों, एकीकृत कृषि प्रणाली, किसानों के स्वास्थ्य-सुरक्षा उपायों और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के लिए उपयुक्त आहार विकसित करने पर रहेगा। उन्होंने जिंक, आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही कोदो, कुटकी, ज्वार, रागी और बाजरा जैसे पारंपरिक मोटे अनाजों को भविष्य के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के रूप में बताया।

श्री चौहान ने कहा कि एकीकृत खेती केवल किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार के पोषण और स्वास्थ्य को मजबूत करने का भी रास्ता है। अनाज के साथ फल, सब्जियां, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां ग्रामीण परिवारों को संतुलित भोजन उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।

उन्होंने किसानों और खेतिहर मजदूरों के स्वास्थ्य को भी मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके अनुसार कीटनाशकों और रसायनों के असंतुलित उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए वैज्ञानिक खेती पद्धतियां और जागरूकता बेहद जरूरी हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि सही भोजन और सही फसल चयन पर वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए, तो भोजन ही दवा का कार्य कर सकता है। उन्होंने मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के लिए उपयुक्त खाद्य विकल्पों के विकास और प्रसार पर बल दिया।

“सेहत मिशन” का मुख्य उद्देश्य पोषण गुणवत्ता में सुधार, छिपी भूख और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को कम करना, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, किसान स्वास्थ्य सुरक्षा और टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आने वाले वर्षों में भारत की खाद्य और स्वास्थ्य नीति को नई दिशा दे सकती है।

 

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