कीटनाशक नहीं, ये हैं भारतीय कृषि निर्यात रिजेक्शन की सबसे बड़ी वजहें

CCFI द्वारा UNIDO के 14 वर्षों के डेटा विश्लेषण में खुलासा हुआ कि भारत के कृषि निर्यात में 81% रिजेक्शन गैर-कीटनाशक कारणों और केवल 19% मामलों में कीटनाशक अवशेषों से जुड़े हैं।

कृषि निर्यात रिजेक्शन

भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। चावल, मसाले, चाय, कॉफी, फल, सब्जियां, समुद्री उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड जैसी अनेक कृषि वस्तुएं दुनिया के 150 से अधिक देशों में निर्यात की जाती हैं। इसके बावजूद समय-समय पर भारत कृषि निर्यात रिजेक्शन (Agri Export Rejection) के मामले सामने आते रहते हैं, जब विभिन्न देशों द्वारा भारतीय कृषि उत्पादों की खेप को खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता, दस्तावेजी कमियों या अन्य नियामकीय कारणों से अस्वीकार कर दिया जाता है। यही वजह है कि भारत कृषि निर्यात रिजेक्शन आज सरकार, निर्यातकों और कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में कई निर्यात प्रोत्साहन संस्थाएं (Export Promotion Bodies) होने के बावजूद कृषि निर्यात रिजेक्शन से संबंधित कोई व्यापक और आधिकारिक सार्वजनिक डेटाबेस उपलब्ध नहीं है। परिणामस्वरूप प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया में सीमित या अधूरी जानकारी के आधार पर यह धारणा बन जाती है कि अधिकांश निर्यात केवल कीटनाशक अवशेष (Pesticide Residues) के कारण ही अस्वीकार किए जाते हैं।

हालांकि, यूनाइटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (UNIDO) के हार्मोनाइज्ड सिस्टम (HS Code) आधारित डेटा का विश्लेषण एक अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है। क्रॉप केयर फेडरेशन ऑफ इंडिया (CCFI) द्वारा पिछले 14 वर्षों के UNIDO डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि भारतीय कृषि निर्यात में होने वाले 81 प्रतिशत रिजेक्शन गैर-कीटनाशक (Non-Pesticide) कारणों से जुड़े हैं, जबकि सिर्फ 19 प्रतिशत मामलों में संभावित कारण कीटनाशक अवशेष हैं।

केवल कीटनाशक नहीं, कई अन्य कारण भी जिम्मेदार

विश्लेषण बताता है कि निर्यात रिजेक्शन के पीछे कई तकनीकी, जैविक, गुणवत्ता और दस्तावेजी कारण जिम्मेदार होते हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं—

  1. कीटनाशक एवं रासायनिक अवशेष

हालांकि इनकी हिस्सेदारी केवल 19 प्रतिशत है, लेकिन यह सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला कारण है।

इसके अंतर्गत शामिल हैं—

ध्यान देने योग्य बात यह है कि कई बार भारतीय मानकों के अनुसार उत्पाद सुरक्षित होता है, लेकिन आयातक देश के MRL मानक अधिक सख्त होने के कारण शिपमेंट रिजेक्ट हो जाता है।

माइक्रोबियल एवं जैविक संदूषण सबसे बड़ी चुनौती

विश्लेषण के अनुसार निर्यात रिजेक्शन का सबसे बड़ा कारण जैविक (Biological) एवं माइक्रोबियल कंटैमिनेशन है।

इनमें प्रमुख समस्याएं हैं—

जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की उपस्थिति।

इसके अलावा—

भी निर्यात अस्वीकृति के प्रमुख कारण हैं।

लेबलिंग और पैकेजिंग की छोटी गलतियां भी पड़ती हैं भारी

कई बार उत्पाद की गुणवत्ता अच्छी होने के बावजूद केवल पैकेजिंग या लेबलिंग की त्रुटियों के कारण पूरी खेप वापस लौटा दी जाती है।

इनमें शामिल हैं—

दस्तावेजी कमियां भी बनती हैं रिजेक्शन की वजह

वैश्विक बाजार में केवल अच्छी गुणवत्ता का उत्पाद पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका पूरा दस्तावेजी रिकॉर्ड भी आवश्यक होता है।

मुख्य समस्याएं हैं—

उत्पाद की गुणवत्ता और प्रस्तुति भी महत्वपूर्ण

कई बार निर्यात केवल इसलिए अस्वीकार हो जाता है क्योंकि उत्पाद देखने में एक समान नहीं होता।

मुख्य कारण—

विभिन्न कृषि उत्पादों में अलग-अलग चुनौतियां

मसाले

भारतीय मसालों के निर्यात में सबसे अधिक समस्याएं—

से जुड़ी पाई गई हैं।

चावल

चावल की खेपें निम्न कारणों से प्रभावित होती हैं—

आम

जापान एवं अमेरिका जैसे देशों में आम की खेपों को कई बार—

के कारण नष्ट तक करना पड़ा है।

समुद्री उत्पाद

श्रिम्प और मछली के निर्यात में सबसे बड़ी समस्याएं हैं—

फल, सब्जियां एवं नट्स

अंगूर, मूंगफली, भिंडी तथा अन्य बागवानी उत्पादों में—

के कारण निर्यात प्रभावित होता है।

किन बाजारों में सबसे अधिक चुनौतियां?

भारतीय कृषि उत्पादों को सबसे अधिक सख्त मानकों का सामना निम्न प्रमुख बाजारों में करना पड़ता है—

इन देशों में खाद्य सुरक्षा, फाइटोसैनिटरी नियम, ट्रेसेबिलिटी, लेबलिंग तथा गुणवत्ता संबंधी नियम अत्यंत कठोर हैं। इनका पालन न करने पर पूरी खेप वापस भेजी जा सकती है या नष्ट भी की जा सकती है।

कुछ मामलों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिस्पर्धा और बाजार हितों के कारण भी निर्यात प्रभावित होने की आशंका विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त की जाती है, हालांकि अधिकांश मामलों में आधिकारिक कारण गुणवत्ता एवं नियामकीय अनुपालन से जुड़े होते हैं।

समाधान क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को केवल कीटनाशकों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय संपूर्ण सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा।

इसके लिए आवश्यक है—

निष्कर्ष

CCFI द्वारा UNIDO के 14 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण यह स्पष्ट करता है कि भारतीय कृषि निर्यात के रिजेक्शन को केवल कीटनाशक अवशेषों तक सीमित करके देखना सही नहीं है। वास्तव में 81 प्रतिशत मामलों में जैविक संदूषण, दस्तावेजी कमियां, पैकेजिंग त्रुटियां, गुणवत्ता संबंधी समस्याएं और ट्रेसेबिलिटी की कमजोरियां प्रमुख कारण हैं, जबकि केवल 19 प्रतिशत मामलों में संभावित कारण कीटनाशक अवशेष हैं।

 

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