फर्टिगेशन क्या है और इससे उर्वरक की कितनी बचत होती है?

फर्टिगेशन (Fertigation) ऐसी ही एक आधुनिक कृषि तकनीक है, जिसमें सिंचाई के पानी के साथ घुलनशील उर्वरकों को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

भारत में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। उर्वरकों के दाम, सिंचाई पर होने वाला खर्च और श्रम की बढ़ती लागत किसानों की आय को प्रभावित कर रही है। ऐसे में ऐसी तकनीकों की आवश्यकता है जो कम लागत में अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ पानी और उर्वरकों का भी कुशल उपयोग सुनिश्चित करें। फर्टिगेशन (Fertigation) ऐसी ही एक आधुनिक कृषि तकनीक है, जिसमें सिंचाई के पानी के साथ घुलनशील उर्वरकों को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है, पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होता है और फसल की वृद्धि भी अधिक संतुलित होती है।

आज ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई के बढ़ते उपयोग के साथ फर्टिगेशन भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विशेष रूप से फल, सब्जियां, गन्ना, कपास, मिर्च, टमाटर, अंगूर, केला और बागवानी फसलों में इसका व्यापक उपयोग किया जा रहा है।

फर्टिगेशन क्या है?

फर्टिगेशन दो शब्दों Fertilizer (उर्वरक) और Irrigation (सिंचाई) से मिलकर बना है। इसका अर्थ है सिंचाई के पानी के साथ घुलनशील उर्वरकों को नियंत्रित मात्रा में पौधों तक पहुंचाना।

इस प्रणाली में उर्वरकों को पानी में पूरी तरह घोलकर ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम के माध्यम से खेत में भेजा जाता है। पानी और पोषक तत्व एक साथ पौधों की जड़ों तक पहुंचते हैं, जिससे पौधे उन्हें अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित कर लेते हैं।

फर्टिगेशन कैसे काम करता है?

फर्टिगेशन प्रणाली में मुख्य रूप से निम्नलिखित उपकरण शामिल होते हैं—

सबसे पहले घुलनशील उर्वरक को टैंक में पानी के साथ मिलाया जाता है। इसके बाद इंजेक्टर की सहायता से यह घोल सिंचाई पाइपों में पहुंचता है और ड्रिप एमिटर के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंच जाता है।

फर्टिगेशन के लिए कौन-से उर्वरक उपयुक्त हैं?

फर्टिगेशन में केवल ऐसे उर्वरकों का उपयोग किया जाता है जो पानी में पूरी तरह घुल जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं—

डीएपी जैसे सभी पारंपरिक उर्वरक फर्टिगेशन के लिए उपयुक्त नहीं होते, क्योंकि वे पूरी तरह पानी में नहीं घुलते।

फर्टिगेशन से उर्वरक की कितनी बचत होती है?

फर्टिगेशन का सबसे बड़ा लाभ उर्वरकों की बचत है। विभिन्न कृषि अनुसंधानों और कृषि विश्वविद्यालयों के अनुसार, पारंपरिक विधि की तुलना में 20 से 40 प्रतिशत तक उर्वरक की बचत संभव है। कुछ फसलों और अच्छी तरह प्रबंधित ड्रिप प्रणालियों में यह बचत 50 प्रतिशत तक भी देखी गई है।

इस बचत के प्रमुख कारण हैं—

इस प्रकार किसान कम उर्वरक उपयोग करके भी बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

पानी की भी होती है बचत

फर्टिगेशन आमतौर पर ड्रिप सिंचाई के साथ अपनाया जाता है, जिससे 30 से 60 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव होती है। कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई होने से जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी खेती आसान बनती है।

उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

फर्टिगेशन से पौधों को समय पर और संतुलित मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं। इससे—

किन फसलों में सबसे अधिक लाभ?

फर्टिगेशन का उपयोग लगभग सभी उच्च मूल्य वाली फसलों में किया जा सकता है, जैसे—

बागवानी और सब्जी उत्पादन में इसका लाभ विशेष रूप से अधिक देखा गया है।

फर्टिगेशन के प्रमुख फायदे

  1. उर्वरक की बचत

कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलने से उर्वरकों की लागत घटती है।

  1. श्रम लागत कम

बार-बार खेत में उर्वरक डालने की आवश्यकता नहीं रहती।

  1. पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग

उर्वरक सीधे जड़ों तक पहुंचने से उनकी उपयोग दक्षता बढ़ जाती है।

  1. खरपतवार कम

जहां पानी और उर्वरक पहुंचते हैं, वहीं पौधों की वृद्धि होती है। पूरे खेत में नमी न होने से खरपतवार अपेक्षाकृत कम उगते हैं।

  1. पर्यावरण संरक्षण

नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्वों का भूजल में रिसाव कम होता है, जिससे प्रदूषण घटता है।

  1. बेहतर गुणवत्ता

फल और सब्जियों का आकार, रंग और गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।

फर्टिगेशन अपनाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

क्या हैं इसकी चुनौतियां?

फर्टिगेशन के कई लाभ हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं—

हालांकि सरकार की विभिन्न सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) योजनाओं के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर सब्सिडी उपलब्ध होने से किसानों के लिए इस तकनीक को अपनाना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

निष्कर्ष

फर्टिगेशन आधुनिक कृषि की ऐसी तकनीक है, जो पानी और उर्वरक दोनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है। सिंचाई के साथ उर्वरक देने की इस प्रणाली से न केवल 20–40 प्रतिशत तक उर्वरक की बचत और 30–60 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। बढ़ती उत्पादन लागत, सीमित जल संसाधनों और टिकाऊ खेती की आवश्यकता को देखते हुए फर्टिगेशन भविष्य की कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रहा है। यदि किसान इसे वैज्ञानिक सलाह और उचित प्रबंधन के साथ अपनाते हैं, तो वे कम लागत में अधिक लाभ और बेहतर उत्पादकता हासिल कर सकते हैं।

 

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