भारत में हर सीजन लाखों टन DAP कहां से आता है?

देश में कई उर्वरक कंपनियां DAP का उत्पादन करती हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन कुल मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि देशों में से एक है और यहां DAP (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की मांग हर साल करोड़ों किसानों की जरूरतों से तय होती है। खरीफ और रबी सीजन में DAP की मांग अचानक बहुत बढ़ जाती है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि भारत अपनी कुल जरूरत का केवल एक हिस्सा ही घरेलू स्तर पर तैयार कर पाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब देश में DAP का उत्पादन सीमित है, तो हर सीजन लाखों टन DAP आखिर आता कहां से है?

इस सवाल का जवाब भारत की आयात (Import) रणनीति, कच्चे माल की उपलब्धता और वैश्विक उर्वरक बाजार से जुड़ा हुआ है।

भारत में DAP की मांग कितनी है?

भारत में हर वर्ष DAP की खपत लगभग 10 से 12 मिलियन टन के बीच रहती है। खरीफ सीजन में धान, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए इसकी मांग सबसे अधिक होती है, जबकि रबी में गेहूं, सरसों और चने की बुवाई के दौरान भी DAP का व्यापक उपयोग किया जाता है।

हालांकि देश में कई उर्वरक कंपनियां DAP का उत्पादन करती हैं, लेकिन घरेलू उत्पादन कुल मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

घरेलू उत्पादन क्यों कम है?

DAP बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन चीजों की जरूरत होती है—

भारत में इन तीनों कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। विशेष रूप से उच्च गुणवत्ता वाले फॉस्फेट रॉक के सीमित भंडार होने के कारण कंपनियों को बड़ी मात्रा में कच्चा माल विदेशों से मंगाना पड़ता है।

इसके अलावा प्राकृतिक गैस की लागत, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव और उत्पादन लागत भी घरेलू निर्माण को प्रभावित करती है।

फिर DAP कहां से आता है?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात (Import) के जरिए पूरा करता है। हर साल लाखों टन तैयार DAP सीधे विदेशों से खरीदा जाता है।

भारत जिन प्रमुख देशों से DAP आयात करता है, उनमें शामिल हैं—

इन देशों में फॉस्फेट रॉक के बड़े भंडार हैं या वे कम लागत पर DAP का उत्पादन करते हैं। इसलिए भारत के लिए कई बार तैयार DAP आयात करना आर्थिक रूप से अधिक व्यावहारिक होता है।

केवल तैयार DAP ही नहीं, कच्चा माल भी आता है

भारत केवल तैयार DAP ही आयात नहीं करता बल्कि बड़ी मात्रा में—

भी विदेशों से मंगाता है। इसके बाद भारतीय उर्वरक कंपनियां इन्हें अपने संयंत्रों में प्रोसेस करके DAP तैयार करती हैं।

यानी बाजार में मिलने वाला DAP या तो पूरी तरह आयातित होता है या आयातित कच्चे माल से भारत में निर्मित होता है।

सरकार कैसे सुनिश्चित करती है उपलब्धता?

DAP किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण उर्वरकों में से एक है। इसलिए केंद्र सरकार समय-समय पर सार्वजनिक और निजी कंपनियों के साथ मिलकर आयात की योजना बनाती है।

सरकार—

इसी वजह से अधिकांश सीजन में किसानों को DAP उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है, हालांकि कभी-कभी वैश्विक संकट के कारण अस्थायी कमी देखने को मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का सीधा असर

भारत की आयात पर निर्भरता के कारण वैश्विक घटनाओं का असर सीधे DAP की उपलब्धता और लागत पर पड़ता है।

उदाहरण के लिए—

इन सभी कारणों से DAP की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ सकती हैं और भारत को अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है।

भविष्य की रणनीति

भारत धीरे-धीरे आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठा रहा है।

इनमें शामिल हैं—

निष्कर्ष

भारत में DAP का घरेलू उत्पादन देश की कुल मांग से काफी कम है। यही कारण है कि हर सीजन किसानों तक लाखों टन DAP पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर तैयार DAP, फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया और रॉक फॉस्फेट का आयात किया जाता है। सरकार, उर्वरक कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति समझौते मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि बुवाई के समय किसानों को DAP की उपलब्धता बनी रहे। हालांकि भविष्य में घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

 

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