₹10,000 करोड़ का SME Growth Fund: छोटे और मध्यम उद्यमों को मिलेगी ग्रोथ इक्विटी, ग्लोबल चैंपियन बनाने पर सरकार का फोकस

₹10,000 crore SME Growth Fund: Small and medium enterprises will get growth equity, government's focus on creating global champions

₹10,000 crore SME Growth Fund: Small and medium enterprises will get growth equity, government's focus on creating global champions

₹10,000 crore SME Growth Fund: Small and medium enterprises will get growth equity, government's focus on creating global champions

भारत सरकार ने छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) के विस्तार, तकनीकी उन्नयन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 6 अक्टूबर 2026 को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund (SGF) की स्थापना के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को मंजूरी दी गई। इस फंड का उद्देश्य ऐसे उच्च क्षमता वाले छोटे और मध्यम उद्यमों को दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराना है, जिनमें कारोबार को बड़े स्तर तक ले जाने और अपने क्षेत्र में अग्रणी कंपनी बनने की क्षमता है।

सरकार के अनुसार, यह फंड केवल शुरुआती स्तर के कारोबारों को पूंजी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन SMEs पर ध्यान देगा जो अपने कारोबार के विस्तार के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुके हैं और जिन्हें आगे बढ़ने के लिए लंबी अवधि की जोखिम पूंजी (Risk Capital) की आवश्यकता है। इसके माध्यम से कंपनियां उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ने और रणनीतिक निवेश करने में सक्षम हो सकेंगी।

क्या है SME Growth Fund?

SME Growth Fund को छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए एक विशेष ग्रोथ इक्विटी फंड के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार इसके तहत कुल ₹10,000 करोड़ की प्रतिबद्धता Alternative Investment Fund (AIF) में करेगी। AIF एक ऐसा निजी रूप से संचालित निवेश फंड होता है, जो निवेशकों से पूंजी जुटाकर निर्धारित निवेश नीति के अनुसार कंपनियों में निवेश करता है।

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सामान्य बैंक ऋण या पारंपरिक कार्यशील पूंजी सुविधा से अलग है। बैंक ऋण में कंपनियों को ब्याज और मूलधन चुकाना होता है, जबकि इक्विटी निवेश कंपनी में पूंजी भागीदारी के रूप में आता है। ऐसे में विकास के महत्वपूर्ण चरण पर पहुंच चुकी कंपनियों को अपेक्षाकृत लंबी अवधि के लिए पूंजी उपलब्ध हो सकती है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि SME Growth Fund का उद्देश्य ऐसे उद्यमों को सहयोग देना है जिनके कारोबार की व्यवहार्यता साबित हो चुकी है और जिनमें आगे विस्तार करने की क्षमता है। इसे भारत में भविष्य के ‘चैंपियन‘ उद्यम तैयार करने की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

SME क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

भारत की अर्थव्यवस्था में MSME क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। PIB की 6 अक्टूबर 2026 की तथ्य सामग्री के अनुसार, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आधार पर MSMEs भारत के GDP में 31.1 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत और निर्यात में 48.58 प्रतिशत योगदान करते हैं।

6 अक्टूबर 2026 तक उद्यम पंजीकरण और Udyam Assist Platform को मिलाकर करीब 9.78 करोड़ MSME पंजीकरण दर्ज किए गए हैं। इन पंजीकृत MSMEs द्वारा लगभग 43.28 करोड़ रोजगार अवसर रिपोर्ट किए गए हैं। PIB के अनुसार, कुल पंजीकरण में महिला स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी 37.6 प्रतिशत है।

यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में छोटे और मध्यम उद्यम केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार देने वाले कारोबार नहीं हैं, बल्कि वे विनिर्माण, व्यापार, सेवाओं, निर्यात और नवाचार की पूरी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके बावजूद छोटे और मध्यम उद्यमों के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है—व्यवसाय को एक स्तर से दूसरे स्तर तक ले जाने के लिए पर्याप्त दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी का अभाव।

सरकार का मानना है कि मौजूदा कई इक्विटी फंड मुख्य रूप से शुरुआती चरण के उद्यमों पर केंद्रित हैं और उनमें माइक्रो उद्यमों की हिस्सेदारी अधिक है। ऐसे में उन SMEs के लिए पूंजी की कमी दिखाई देती है जो शुरुआती दौर से आगे निकल चुके हैं और अब बड़े पैमाने पर विस्तार करना चाहते हैं।

केवल ऋण नहीं, अब ग्रोथ इक्विटी पर जोर

SMEs के लिए अब तक सरकार और वित्तीय संस्थानों की ओर से क्रेडिट, गारंटी और ऋण आधारित सहायता पर काफी जोर रहा है। लेकिन कारोबार के विस्तार के साथ कंपनियों की पूंजी जरूरत भी बदलती है।

किसी कंपनी को यदि नई उत्पादन इकाई स्थापित करनी है, आधुनिक मशीनरी लगानी है, नई तकनीक अपनानी है, किसी दूसरी कंपनी का अधिग्रहण करना है या विदेशों में कारोबार शुरू करना है, तो केवल अल्पकालिक ऋण हमेशा पर्याप्त नहीं होता।

यहीं पर SME Growth Fund की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

सरकार के अनुसार, यह फंड ‘patient growth equity capital’ उपलब्ध कराने के लिए बनाया जा रहा है। यानी ऐसे उद्यमों को दीर्घकालिक पूंजी देने का प्रयास होगा जिन्हें अपने निवेश का परिणाम हासिल करने में समय लग सकता है।

इसका सीधा लाभ यह हो सकता है कि कंपनियां तत्काल ऋण चुकाने के दबाव के बजाय अपनी उत्पादन क्षमता, बाजार और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे सकें।

विनिर्माण क्षेत्र को मिलेगा विशेष फोकस

SME Growth Fund में विनिर्माण क्षेत्र को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। PIB के अनुसार, फंड के आवंटन का बड़ा हिस्सा छोटे और मध्यम विनिर्माण-केंद्रित उद्यमों की ओर जाने की उम्मीद है।

भारत सरकार लंबे समय से देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और निर्यात को मजबूत करने की दिशा में नीतियां लागू कर रही है। ऐसे में छोटे और मध्यम विनिर्माण उद्यमों को पूंजी उपलब्ध कराने से इस रणनीति को अतिरिक्त गति मिल सकती है।

नई मशीनरी, स्वचालन, डिजिटल उत्पादन प्रणाली, गुणवत्ता सुधार, अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन क्षमता विस्तार जैसे क्षेत्रों में निवेश करने वाली कंपनियों को इससे फायदा हो सकता है।

इसके अलावा, बड़े उद्यमों की सप्लाई चेन में काम करने वाले SMEs के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि छोटे उद्यम अपनी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाते हैं तो वे घरेलू कंपनियों के साथ-साथ वैश्विक कंपनियों के आपूर्तिकर्ता भी बन सकते हैं।

Tier-II और Tier-III शहरों पर भी नजर

SME Growth Fund की एक खास बात यह है कि इसमें Tier-II और Tier-III शहरों के औद्योगिक क्लस्टरों में काम करने वाले SMEs को भी ध्यान में रखा गया है।

भारत में बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्योग महानगरों के बाहर स्थित हैं। कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि आधारित उद्योग, ऑटो कंपोनेंट, इंजीनियरिंग, फर्नीचर, हस्तशिल्प, फार्मा, रसायन और अन्य क्षेत्रों में क्षेत्रीय औद्योगिक क्लस्टर स्थानीय अर्थव्यवस्था का आधार हैं।

यदि ऐसे उद्यमों को पर्याप्त इक्विटी पूंजी मिलती है, तो इसका असर केवल संबंधित कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो सकती है, सहायक कारोबारों को अवसर मिल सकते हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

सरकार के अनुसार, Tier-II और Tier-III शहरों के औद्योगिक क्लस्टरों में निवेश से संतुलित क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कंपनियों को किन कामों के लिए मिल सकती है पूंजी?

SME Growth Fund का उद्देश्य केवल किसी कंपनी को आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उसे अगले विकास चरण तक पहुंचने में सक्षम बनाना है।

सरकार की तथ्य सामग्री के अनुसार, दीर्घकालिक ग्रोथ कैपिटल का इस्तेमाल कई प्रकार की गतिविधियों में किया जा सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

इस तरह देखा जाए तो फंड का उद्देश्य केवल ‘पैसा देना‘ नहीं बल्कि SMEs को एक छोटे कारोबार से प्रतिस्पर्धी और बड़े उद्यम में बदलने के लिए पूंजी उपलब्ध कराना है।

भारत के ‘भविष्य के चैंपियन‘ तैयार करने की रणनीति

सरकार ने SME Growth Fund को ‘future champions’ तैयार करने की रणनीति से जोड़ा है। इसका मतलब ऐसे भारतीय उद्यमों को तैयार करना है जो अपने क्षेत्र में बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें और भविष्य में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत स्थिति बना सकें।

किसी SME के लिए विकास का एक महत्वपूर्ण चरण वह होता है जब उसका मौजूदा कारोबार सफल हो चुका होता है, लेकिन आगे विस्तार के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत पड़ती है। यही वह स्थिति है जहां पूंजी की कमी कई कंपनियों के विस्तार को सीमित कर सकती है।

SME Growth Fund इस अंतर को कम करने की कोशिश करेगा। सरकार का अनुमान है कि इससे ऐसी कंपनियों की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार हो सकती है जिनमें बड़े पैमाने पर उत्पादन, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की क्षमता हो।

रोजगार सृजन पर भी पड़ेगा असर

SME क्षेत्र का रोजगार से सीधा संबंध है। किसी कंपनी के विस्तार का अर्थ आम तौर पर नई उत्पादन क्षमता, नई मशीनरी, अधिक बिक्री, नए बाजार और अधिक मानव संसाधन की आवश्यकता होता है।

यदि SME Growth Fund के जरिए अधिक कंपनियां अपने कारोबार का विस्तार करती हैं, तो इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार अवसर बढ़ सकते हैं।

उदाहरण के लिए, एक विनिर्माण इकाई के विस्तार से केवल उस कंपनी में ही नई नौकरियां नहीं बनतीं, बल्कि कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, पैकेजिंग, रखरखाव, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक सेवाओं में भी मांग बढ़ सकती है।

Tier-II और Tier-III शहरों में इस तरह का विस्तार स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार ने भी फंड के संभावित प्रभाव में quality employment generation और स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करने को प्रमुखता दी है।

निर्यात और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में बढ़ सकती है भागीदारी

भारत के SMEs के सामने एक बड़ा अवसर वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भागीदारी बढ़ाने का है। लेकिन इसके लिए कंपनियों को उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता, तकनीक, प्रमाणन और समय पर आपूर्ति जैसी आवश्यकताओं को पूरा करना पड़ता है।

SME Growth Fund से मिलने वाली दीर्घकालिक पूंजी कंपनियों को इन क्षेत्रों में निवेश करने में मदद कर सकती है।

यदि कोई भारतीय SME आधुनिक तकनीक अपनाकर उत्पादन लागत और गुणवत्ता को प्रतिस्पर्धी बनाता है, तो उसके लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ काम करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

सरकार का लक्ष्य भी ऐसे उद्यमों को तैयार करना है जो वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें और Global Value Chains का हिस्सा बनें।

MSME क्षेत्र के लिए पहले से चल रही योजनाओं के साथ जुड़ाव

SME Growth Fund को अकेली योजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह MSME क्षेत्र के लिए पहले से चल रहे विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के व्यापक ढांचे का हिस्सा है।

PIB के अनुसार, MSMEs के लिए क्रेडिट और वित्तीय सहायता, रोजगार, कौशल, तकनीक, उद्यमिता और सार्वजनिक खरीद से जुड़ी कई पहलें पहले से लागू हैं।

इनमें Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises (CGTMSE), Prime Minister’s Employment Generation Programme (PMEGP), PM Vishwakarma, MSME Skilling और Entrepreneurship Development Programme (ESDP), ASPIRE, RAMP, Zero Defect Zero Effect (ZED), Tool Rooms and Technology Centres, MSME SAMBANDH और SC/ST Hub जैसी पहलें शामिल हैं।

SME Growth Fund इन प्रयासों में एक अलग आवश्यकता—ग्रोथ स्टेज इक्विटी पूंजी—को संबोधित करता है।

SME की नई परिभाषा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण

PIB की तथ्य सामग्री के अनुसार, अप्रैल 2025 से प्रभावी नवीनतम वर्गीकरण के तहत Small Enterprise वह है जिसमें प्लांट एवं मशीनरी या उपकरण में निवेश ₹25 करोड़ तक और वार्षिक कारोबार ₹100 करोड़ तक है।

वहीं Medium Enterprise के लिए निवेश की सीमा ₹125 करोड़ तक और वार्षिक कारोबार की सीमा ₹500 करोड़ तक है।

इस वर्गीकरण के दायरे में आने वाले उद्यमों के लिए विकास पूंजी की उपलब्धता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई कंपनियां कारोबार के विस्तार के दौरान ऐसी स्थिति में पहुंच जाती हैं जहां उन्हें सामान्य छोटे कारोबार की तुलना में काफी अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है।

विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से जुड़ा कदम

केंद्र सरकार ने SME Growth Fund को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य से भी जोड़ा है। सरकार के अनुसार, भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए केवल बड़े कॉरपोरेट समूहों का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए बड़ी संख्या में प्रतिस्पर्धी, तकनीक-सक्षम और रोजगार पैदा करने वाले उद्यमों का विकास आवश्यक है।

SMEs को बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन से जोड़ना, उन्हें निर्यात योग्य बनाना और तकनीकी रूप से मजबूत करना भारत की औद्योगिक क्षमता को व्यापक आधार दे सकता है।

सरकार का कहना है कि SME Growth Fund उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, घरेलू पूंजी बाजार को गहरा करने और ऐसे भारतीय उद्यम तैयार करने में मदद करेगा जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी संभावित महत्व

SME Growth Fund का सीधा फोकस व्यापक SME क्षेत्र पर है, लेकिन इसका प्रभाव कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक भी पहुंच सकता है। देश के कई छोटे और मध्यम उद्यम कृषि आधारित उद्योगों, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि मशीनरी, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, एग्रीटेक और ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़े हैं।

यदि इन क्षेत्रों के पात्र SMEs को विस्तार के लिए इक्विटी पूंजी उपलब्ध होती है, तो कृषि उत्पादों के value addition, processing और market linkage को मजबूती मिल सकती है।

उदाहरण के तौर पर, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां आधुनिक मशीनरी में निवेश कर सकती हैं, कृषि मशीनरी से जुड़े उद्यम नई तकनीक विकसित कर सकते हैं और लॉजिस्टिक्स कंपनियां भंडारण एवं परिवहन क्षमता बढ़ा सकती हैं।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि SME Growth Fund का घोषित प्राथमिक फोकस विशेष रूप से छोटे और मध्यम विनिर्माण-केंद्रित उद्यमों पर है और पात्रता व निवेश की अंतिम प्रक्रिया फंड के परिचालन ढांचे के अनुसार तय होगी।

सरकार के फैसले से क्या बदलेगा?

इस फैसले का सबसे बड़ा महत्व यह है कि सरकार ने SMEs की समस्या को केवल क्रेडिट की कमी के रूप में नहीं देखा है। कारोबार के एक निश्चित चरण के बाद कंपनियों को ऐसे पूंजी स्रोत की आवश्यकता होती है जो लंबे समय तक उपलब्ध रहे और विस्तार के जोखिम को साझा कर सके।

₹10,000 करोड़ की सरकारी प्रतिबद्धता इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

इससे एक तरफ कंपनियों को विस्तार के लिए पूंजी मिल सकती है, वहीं दूसरी तरफ भारत के घरेलू निवेश और पूंजी बाजार में भी विकास-उन्मुख उद्यमों के लिए अधिक अवसर बन सकते हैं।

हालांकि, फंड की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और कुशल रहती है, किन कंपनियों का चयन किया जाता है, पूंजी कितनी तेजी से वास्तविक उद्यमों तक पहुंचती है और निवेश से कंपनियों की उत्पादकता, रोजगार तथा निर्यात में कितना वास्तविक सुधार होता है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund की स्थापना के लिए प्रतिबद्धता को मंजूरी भारत के छोटे और मध्यम उद्यम क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण नीति कदम है। यह पहल उन SMEs को विकास पूंजी उपलब्ध कराने पर केंद्रित है जो कारोबार की शुरुआती अवस्था से आगे बढ़ चुके हैं और अब बड़े पैमाने पर विस्तार, तकनीकी उन्नयन तथा वैश्विक बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं।

फंड में विनिर्माण क्षेत्र को प्राथमिकता, Tier-II और Tier-III शहरों के औद्योगिक क्लस्टरों पर ध्यान, तकनीकी उन्नयन, उत्पादन क्षमता विस्तार और वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़ने की संभावनाएं इसे व्यापक औद्योगिक विकास की रणनीति से जोड़ती हैं।

भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि देश में करोड़ों MSMEs रोजगार, उत्पादन, निर्यात और नवाचार में योगदान दे रहे हैं। ऐसे में यदि उच्च क्षमता वाले छोटे और मध्यम उद्यमों को सही समय पर पर्याप्त दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी मिलती है, तो उनमें से कई अपने क्षेत्र के बड़े राष्ट्रीय और वैश्विक खिलाड़ी बन सकते हैं।

सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—ऐसे SMEs तैयार करना जो केवल छोटे व्यवसाय न रहें, बल्कि भारत के भविष्य के औद्योगिक और आर्थिक चैंपियन बनें। SME Growth Fund इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण वित्तीय आधार तैयार करने की कोशिश है और इसे विकसित भारत @2047 की व्यापक आर्थिक रणनीति के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

 

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