‘विकसित ग्राम–विकसित भारत’ का साझा रोडमैप तैयार, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में केंद्र और राज्यों ने तय की नई विकास रणनीति

A common roadmap for 'Developed Village - Developed India' is ready.

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विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में ग्रामीण भारत की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की प्रगति का रास्ता उसके गांवों से होकर गुजरता है। यदि गांव समृद्ध, आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनेंगे, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। इसी सोच के साथ नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन “ग्रामोदय से राष्ट्रोदय” के दूसरे दिन केंद्र और राज्यों ने मिलकर “विकसित ग्राम–विकसित भारत” का साझा रोडमैप तैयार किया।

सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पहली बार देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और नीति-निर्माता एक मंच पर एकत्र हुए। इस ऐतिहासिक बैठक में ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक मंथन किया गया।

गांव ही विकसित भारत की मजबूत नींव

सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गांव केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, शक्ति और सांस्कृतिक चेतना के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाए बिना विकसित राष्ट्र की कल्पना अधूरी है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गांवों को केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें विकास की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार और वाहक बनाया जाना चाहिए। ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर ही देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, रोजगार और सामाजिक विकास को नई गति दी जा सकती है।

सहकारी संघवाद का मजबूत उदाहरण

सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और कमलेश पासवान के अलावा उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा विभिन्न राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह सम्मेलन सहकारी संघवाद का जीवंत उदाहरण है, जहां राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर केवल विकास को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने सभी राज्यों से आग्रह किया कि ग्रामीण विकास को राजनीति से ऊपर रखते हुए मिलकर कार्य किया जाए।

विकसित भारत–जी राम जी योजना पर विशेष जोर

सम्मेलन में ग्रामीण रोजगार के क्षेत्र में लागू की गई नई योजना “विकसित भारत–जी राम जी” पर विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2026 से यह योजना पूरे देश में लागू हो चुकी है और इसके लिए ₹95,682 करोड़ की अंतरिम स्वीकृति प्रदान की गई है।

उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे अपनी सभी प्रशासनिक और वित्तीय औपचारिकताएं समय पर पूरी करें ताकि योजना का प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उनका कहना था कि यह योजना ग्रामीण रोजगार के साथ-साथ टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण और गांवों के समग्र विकास को गति देगी।

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण को मिली नई दिशा

सम्मेलन के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए दो महत्वपूर्ण डिजिटल पहलें शुरू कीं। उन्होंने “लखपति दीदी डैशबोर्ड” और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए “SHE LEAPS” डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगले पांच वर्षों में ₹10 लाख करोड़ के बैंक लिंकेज का व्यापक रोडमैप तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं और महिलाओं की आय बढ़ाने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर जोर

सम्मेलन में ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करना अधिक आवश्यक है।

उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि—

उनका मानना था कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी।

हर पात्र परिवार को मिलेगा आवास

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति आवास योजना से वंचित नहीं रहेगा। जिन लाभार्थियों के पास भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें राज्य सरकारें भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय प्रयास करें ताकि सभी जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल सके।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

राज्यों के सफल मॉडलों से मिलेगी नई सीख

सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाई गई सफल विकास पहलों को भी साझा किया गया।

झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के मल्टी-चैनल मार्केटिंग, सामुदायिक उद्यम, आजीविका आधारित ऋण मॉडल और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों की सराहना करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन सफल मॉडलों को देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा।

उन्होंने स्वीकार किया कि कई योजनाओं और प्रक्रियाओं में अभी सुधार की आवश्यकता है। यदि राज्यों को किसी नियम या प्रक्रिया में व्यावहारिक कठिनाई आती है तो केंद्र सरकार आवश्यक संशोधन करने के लिए वित्त मंत्रालय और केंद्रीय मंत्रिमंडल के साथ मिलकर समाधान खोजेगी।

जल संरक्षण और मानसून की चुनौती पर विशेष चर्चा

सम्मेलन में संभावित कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए जल संरक्षण पर भी विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि लगभग 14 राज्यों में कम बारिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करने की आवश्यकता है।

उन्होंने निर्देश दिए कि जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त ग्रामीण रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी भी रखी जाए ताकि सूखे जैसी परिस्थितियों का प्रभाव कम किया जा सके।

युवाओं और नवाचार को मिला सम्मान

ग्रामीण विकास में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से सम्मेलन के दौरान VB-G RAM G से संबंधित लोगो डिजाइन, क्विज़ और डिजिटल कंटेंट प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही ग्रामीण विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, जिनमें नवाचार, तकनीकी समाधान और सफल ग्रामीण विकास मॉडलों को प्रस्तुत किया गया है।

सहभागिता से ही बनेगा विकसित भारत

सम्मेलन के समापन पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब समय प्रतिस्पर्धा का नहीं बल्कि सहभागिता का है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार नीति बनाए, राज्य सरकारें उसे प्रभावी ढंग से लागू करें, पंचायतें नेतृत्व करें और आम नागरिक सक्रिय भागीदारी निभाएं, तभी ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकसित भारत का सपना केवल शहरों के विकास से पूरा नहीं होगा। जब गांव आत्मनिर्भर, आधुनिक, रोजगारयुक्त और समृद्ध बनेंगे, तभी भारत वास्तव में विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। केंद्र और राज्यों द्वारा तैयार किया गया यह साझा रोडमैप आने वाले वर्षों में ग्रामीण विकास को नई गति देने और “विकसित ग्राम–विकसित भारत” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

 

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