भूमि शासन और वाटरशेड प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम, भूमि संसाधन विभाग और एडीबी के बीच हुई अहम बैठक

A major step towards strengthening land governance and watershed management, a key meeting was held between the Department of Land Resources and the ADB.

ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के बीच भूमि शासन सुधार, डिजिटल भूमि प्रबंधन और जलसंभर (वाटरशेड) विकास को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। नई दिल्ली में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने एडीबी की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

बैठक के दौरान भारत सरकार के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप भूमि प्रशासन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और जलवायु-अनुकूल जलसंभर विकास को मजबूत करने की दिशा में चल रही पहलों पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने भविष्य में तकनीकी सहयोग, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण को लेकर भी सकारात्मक सहमति जताई।

भूमि प्रशासन में तकनीक की बढ़ती भूमिका

बैठक में भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने कहा कि देश में प्रभावी भूमि प्रशासन आर्थिक विकास, ग्रामीण समृद्धि और सामाजिक न्याय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि भूमि संसाधनों का बेहतर उपयोग और पारदर्शी भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं पैदा करती है।

उन्होंने कहा कि भारत में भूमि प्रशासन प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए सरकार लगातार डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर रही है। इसी दिशा में डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत बड़े पैमाने पर काम किया गया है।

भूमि अभिलेखों का तेजी से डिजिटलीकरण

सचिव ने जानकारी दी कि देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रिकॉर्ड्स ऑफ राइट्स (RoR) का डिजिटलीकरण लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही भूमि अभिलेखों को जमाबंदी नक्शों से जोड़ने की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से भूमि विवादों में कमी आएगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों तथा आम नागरिकों को सेवाएं आसानी से उपलब्ध होंगी।

श्री भूषण ने बताया कि विभाग अब DILRMP 3.0 लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस नए चरण में तकनीकी उपायों, भूमि रिकॉर्ड के गतिशील अद्यतन और विभिन्न भूमि संबंधी डेटाबेस के बेहतर एकीकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा।

“भू-आधार” यानी ULPIN योजना पर जोर

बैठक में विशिष्ट भूमि पार्सल पहचान संख्या (ULPIN) योजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इसे “भू-आधार” के नाम से भी जाना जाता है।

सचिव ने बताया कि देश की लगभग 66 प्रतिशत कृषि भूमि पार्सलों को यूएलपीआईएन जारी किया जा चुका है। यह प्रणाली प्रत्येक भूमि खंड को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान करती है, जिससे भूमि रिकॉर्ड अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भू-आधार प्रणाली भविष्य में भूमि खरीद-बिक्री, पंजीकरण, ऋण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक आसान और पारदर्शी बनाएगी।

“लैंड स्टैक” विकसित करने की योजना

बैठक के दौरान भूमि संसाधन विभाग ने “लैंड स्टैक” विकसित करने के विजन को भी साझा किया। यह एक व्यापक डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) प्रणाली होगी, जिसमें भूमि अभिलेख, पंजीकरण, म्यूटेशन, भूमि उपयोग और अन्य संबंधित सेवाओं को एकीकृत किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों को आपस में जोड़कर बेहतर सेवा वितरण और सुशासन सुनिश्चित करना है। इससे नागरिकों को कई सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेंगी।

इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी आधुनिक भूमि शासन प्रणाली लागू करने पर जोर दिया गया। इसमें आधुनिक मैपिंग तकनीकों और टेक्नोलॉजी आधारित समाधानों का उपयोग शामिल है।

वाटरशेड विकास और जलवायु-अनुकूल खेती पर चर्चा

बैठक में जलसंभर (वाटरशेड) विकास को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। सचिव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए टिकाऊ भूमि और जल प्रबंधन प्रणाली अपनाना बेहद जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि जलसंभर विकास कार्यक्रम न केवल कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद करते हैं, बल्कि ग्रामीण आजीविका को भी मजबूत बनाते हैं। इसके लिए नवीन वित्तपोषण मॉडल, तकनीकी उपाय और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर जल प्रबंधन और भूमि संरक्षण तकनीकें भविष्य में जल संकट और मिट्टी क्षरण जैसी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

आधुनिक तकनीकों पर विशेष फोकस

बैठक में भू-स्थानिक प्रणाली (Geospatial Systems), डिजिटल प्लेटफॉर्म, रिमोट सेंसिंग और डेटा आधारित योजना जैसी उभरती तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा हुई।

दोनों पक्षों ने माना कि आधुनिक तकनीकें भूमि प्रशासन और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बना सकती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए योजना निर्माण, निगरानी और सेवा वितरण को तेजी से बेहतर बनाया जा सकता है।

एडीबी ने जताई सहयोग की इच्छा

एशियाई विकास बैंक की कंट्री डायरेक्टर सुश्री मियो ओका ने बैठक में भारत में एडीबी द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं और पहलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एडीबी डिजिटल कृषि, जलवायु परिवर्तन अनुकूलन, जलसंभर प्रबंधन और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

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