40 साल बाद 126 करोड़ में जलेगा भोपाल त्रिसादी का बचा जहर, खरते के निशान पर इंदौर!

֍:इंदौर से दूर इस कंपनी में जलाया जाएगा कचरा §ֆ:
बता दें कि, इस कचरे को इंदौर के पास पीथमपुर की रामकी कंपनी में जलाया जाएगा. इस काम के लिए 126 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह काम गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग की देखरेख में होगा. इस जहरीले कचरे को नष्ट करने का काम आसान नहीं है. सबसे पहले इसे भोपाल से 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर तक ले जाना होगा. यह काम बेहद सावधानी से करना होगा ताकि रास्ते में कोई हादसा न हो. फिलहाल, विभाग और रामकी कंपनी के अधिकारी इस काम को कैसे अंजाम देना है, इस पर चर्चा कर रहे हैं.

§֍:2015 से चल रही है कवायद§ֆ:
यह पहली बार नहीं है, जब इस कचरे को नष्ट करने की कोशिश की जा रही है. 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस कचरे के कुछ हिस्से को रामकी कंपनी में ही जलाकर देखा गया था. यह प्रयोग सफल रहा था और उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई थी. उसके बाद तय हुआ कि बाकी कचरे को भी यहीं नष्ट किया जाएगा, लेकिन राशि केंद्र सरकार देगी. अब केंद्र सरकार ने पैसे दे दिए हैं और जल्द ही इस काम को शुरू किया जाएगा

§֍:स्थानीय लोगों की बढ़ रही चिंता§ֆ:
वहीं, भोपाल के जहरीले कचरे को पीथमपुर में जलाने की खबर से स्थानीय लोग चिंतित हैं. उन्हें डर है कि इतनी बड़ी संख्या में जब कचरा जलाया जाएगा, हवा के जरिए प्रदूषण फैलेगा. कंपनी के खिलाफ भी पहले भी स्थानीय लोग प्रदूषण को लेकर शिकायत की है. साथ ही कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुआ है.
§40 साल बाद भी भोपाल के लोग गैस त्रासदी को नहीं भूल पाएं हैं. इस त्रासदी में करीब 5000 लोगों की जान चली गई थी. भोपाल की हवा में जहर घूलने की वजह से लोग सांस भी नहीं ले पा रहे थे. बड़े हो या बच्चे सभी इस त्रासदी का शिकार हुए. हालांकि वक्त के साथ भोपाल अपने गहरे जख्मों के साथ आगे बढ़ गया है. लेकिन एक खबर ने फिर भोपाल की उस त्रासदी के बारे में सोचने को मजबूर कर दिया है. दरअसल, अब सालों बाद भोपाल में पड़े उस जहर को जलाने की तैयारी की जा रही है. यह जहरीला अवशेष उसी हादसे का है, जो भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री में है. भोपाल में हुई त्रासदी के बाद इस फैक्ट्री में करीब 337 टन जहरीला कचरा है. जिसे अब 40 सालों के इंतजार के बाद जलाने की प्लानिंग की जा रही है. इसके लिए 126 करोड़ रुपए की राशि टेंडर लेने वाली कंपनी को दे दी गई है. हालांकि यह काम कब से शुरू होगा, इसकी तारीख तय नहीं हुई है. अब डर है कि जब इस जहर को नष्ट किया जाएगा, तब क्या इंदौर भी इसकी जद में आएगा.

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