रबी सीजन से पहले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की देशभर की कृषि स्थिति की समीक्षा, किसानों को समय पर राहत और संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश

Ahead of the Rabi season, Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan reviewed the agricultural situation across the country

Ahead of the Rabi season, Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan reviewed the agricultural situation across the country and directed to provide timely relief and resources to farmers.

Ahead of the Rabi season, Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan reviewed the agricultural situation across the country and directed to provide timely relief and resources to farmers.

देश में खरीफ फसलों की कटाई और आगामी रबी सीजन की तैयारियों के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। 2 नवंबर को कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई इस बैठक में अनियमित बारिश, सूखे, चक्रवाती प्रभाव, फसल कटाई, खाद-उर्वरक की उपलब्धता और रबी फसलों की बुआई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचाने में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और संकट के समय केंद्र सरकार किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझते हुए समय पर सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

खरीफ कटाई के बाद रबी बुआई में तेजी लाने की तैयारी

समीक्षा बैठक में बताया गया कि देश के विभिन्न राज्यों में खरीफ फसलों की कटाई का कार्य जारी है। मूंग और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की कटाई अंतिम चरण में पहुंच रही है। ऐसे में कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि खरीफ फसल की कटाई के तुरंत बाद खेतों में उपलब्ध मिट्टी की नमी (Soil Moisture) का अधिकतम उपयोग करते हुए रबी फसलों की बुआई को गति दी जाए।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सीमित है, वहां किसानों को ऐसी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिनमें कम पानी और अपेक्षाकृत कम लागत की आवश्यकता होती है। इसके तहत चना, सरसों, मसूर और मोटे अनाज (Millets) जैसी फसलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

यह रणनीति उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है जहां किसान पूरी तरह वर्षा आधारित खेती (Rainfed Agriculture) पर निर्भर हैं या जहां भूजल और सिंचाई संसाधनों की उपलब्धता सीमित है। कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों का चयन किसानों की उत्पादन लागत और मौसम संबंधी जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

जलवायु अनुकूल और गर्मी सहने वाली किस्मों को बढ़ावा

बदलते मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव को देखते हुए कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित जलवायु अनुकूल बीजों को किसानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी उन्नत किस्मों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जो अधिक तापमान और पानी की कमी जैसी परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम हों।

Climate-Resilient Varieties यानी जलवायु सहनशील किस्में किसानों को मौसम की अनिश्चितताओं के बीच फसल उत्पादन बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। विशेष रूप से रबी सीजन में तापमान का समय से पहले बढ़ना गेहूं, चना, सरसों और अन्य फसलों के विकास तथा उपज को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त किस्मों का चयन महत्वपूर्ण हो जाता है।

किसानों को केवल उन्नत बीज उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बुआई का सही समय, बीज दर, फसल अवधि और स्थानीय मौसम के अनुसार बेहतर किस्मों के चयन की जानकारी भी दी जानी चाहिए। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), कृषि विश्वविद्यालयों और राज्य कृषि विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

रबी सीजन के लिए खाद और उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक

कृषि मंत्री ने देश में खाद एवं उर्वरकों की उपलब्धता की भी समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि रबी सीजन के लिए यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके सहित आवश्यक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके साथ ही प्रमाणित बीजों की उपलब्धता की स्थिति का भी जायजा लिया गया।

कृषि मंत्रालय के अनुसार, किसानों को बुआई के समय किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर जिला स्तर तक उर्वरकों और बीजों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

रबी सीजन में समय पर खाद और बीज उपलब्ध होना खेती की उत्पादन प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है। यदि बुआई के समय आवश्यक कृषि इनपुट (Agricultural Inputs) उपलब्ध नहीं होते, तो किसानों को देरी से बुआई करनी पड़ सकती है। इससे फसल की वृद्धि, उत्पादन और बाजार में उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

इसलिए जिला स्तर पर मांग और आपूर्ति की नियमित निगरानी, वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और किसानों तक समय पर जानकारी पहुंचाना जरूरी है।

MSP से ऊपर मिल रहे हैं कई फसलों के दाम

बैठक में मंडियों में प्रमुख कृषि जिंसों की कीमतों का भी विश्लेषण किया गया। समीक्षा के दौरान बताया गया कि धान, गेहूं, मक्का, चना, मसूर, अरहर, सोयाबीन और सरसों जैसी प्रमुख फसलों के बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर बने हुए हैं।

इस स्थिति को किसानों के लिए बेहतर बाजार मूल्य मिलने के संकेत के रूप में देखा गया। हालांकि, अलग-अलग मंडियों में फसल की गुणवत्ता, आवक, स्थानीय मांग, परिवहन लागत और बाजार परिस्थितियों के कारण कीमतों में अंतर हो सकता है। इसलिए किसानों के लिए स्थानीय मंडी भाव की जानकारी और बाजार के रुझान को समझना भी महत्वपूर्ण है।

कृषि उत्पादों का लाभकारी मूल्य किसानों की आय और खेती में दोबारा निवेश करने की क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे में बाजार मूल्य की नियमित निगरानी और किसानों को सही Market Information उपलब्ध कराना कृषि व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

सूखा, बाढ़ और चक्रवाती प्रभाव से प्रभावित किसानों को मिलेगी सहायता

प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों की स्थिति पर चर्चा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अत्यधिक बारिश और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे सूखे की परिस्थितियों का सामना कर रहे राज्यों के किसानों को भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति का आकलन तेजी से किया जाए और प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

कृषि मंत्री ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत फसल क्षति के आकलन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के दावों के निपटान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे अगली फसल की तैयारी और कृषि संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

फसल नुकसान के बाद समय पर सहायता मिलना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसान न केवल अपनी तैयार फसल खो सकते हैं, बल्कि अगली बुआई के लिए बीज, खाद, सिंचाई और अन्य संसाधनों की व्यवस्था करने में भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं।

ऐसे में Crop Loss Assessment, Insurance Claim Settlement और राहत वितरण की प्रक्रिया को सरल तथा समयबद्ध बनाना आवश्यक है।

चक्रवाती बारिश से मिलने वाली नमी का रबी बुआई में उपयोग

बैठक में आगामी चक्रवाती बारिश से बनने वाली मिट्टी की नमी का लाभ रबी फसलों की बुआई में उठाने के लिए भी आकस्मिक कार्ययोजना (Contingency Plan) तैयार करने पर जोर दिया गया।

कृषि मंत्री ने निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध हो, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रबी फसलों की बुआई की योजना बनाई जाए। हालांकि, अत्यधिक बारिश या खेतों में जलभराव की स्थिति में बुआई से पहले जल निकासी और मिट्टी की स्थिति का आकलन करना जरूरी होगा।

इस तरह की योजना वर्षा आधारित क्षेत्रों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद कर सकती है। इसके लिए किसानों को मौसम पूर्वानुमान, मिट्टी की नमी और फसल की उपयुक्तता के आधार पर निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

हर सप्ताह होगी कृषि स्थिति की समीक्षा

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को बताया कि वे स्वयं देश में कृषि क्षेत्र की स्थिति की हर सप्ताह समीक्षा करेंगे। इसका उद्देश्य खरीफ कटाई, रबी बुआई, उर्वरक आपूर्ति, मौसम की स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को मिलने वाली सहायता की नियमित निगरानी करना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा, ताकि किसानों की समस्याओं का समय पर समाधान हो सके।

नियमित समीक्षा व्यवस्था से राज्यों में कृषि संबंधी चुनौतियों की पहचान करने और उनके समाधान के लिए समय रहते कदम उठाने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से मौसम की अनिश्चितता के दौर में कृषि विभागों, मौसम एजेंसियों, वैज्ञानिक संस्थानों और राज्य सरकारों के बीच बेहतर Coordination महत्वपूर्ण है।

कम लागत और मौसम के अनुकूल खेती पर बढ़ता जोर

इस समीक्षा बैठक में सामने आए निर्देशों से स्पष्ट है कि आगामी रबी सीजन में फसल चयन, बीजों की उपलब्धता, पानी का बेहतर उपयोग और किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराना प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

बदलते जलवायु परिदृश्य में छोटे और सीमांत किसानों के लिए ऐसी खेती को बढ़ावा देना जरूरी है जो कम संसाधनों में भी स्थिर उत्पादन दे सके। इसके लिए Climate-Smart Agriculture, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण (Crop Diversification), सूखा सहनशील किस्मों और मौसम आधारित कृषि सलाह को बढ़ावा देना उपयोगी हो सकता है।

किसानों के लिए यह भी जरूरी है कि वे बुआई से पहले अपने क्षेत्र की मौसम संबंधी सलाह, मिट्टी की नमी, सिंचाई की उपलब्धता और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसल का चयन करें। कृषि विज्ञान केंद्रों और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर निर्णय लेने से उत्पादन संबंधी जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की इस समीक्षा बैठक में रबी सीजन की तैयारियों के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत देने, कृषि संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने और मौसम के अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि किसानों को संकट के समय सहायता पहुंचाने और बुआई के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी नहीं होनी चाहिए।

 

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