अमेठी के इफको केंद्र पर खाद वितरण में खामियां, 4 अधिकारियों को नोटिस

अमेठी के गौरीगंज इफको केंद्र पर खाद वितरण में खामियां मिलने के बाद चार अधिकारियों को नोटिस देने के निर्देश दिए गए। जानें डीएपी वितरण और प्रशासन की कार्रवाई।

अमेठी के इफको केंद्र पर खाद वितरण व्यवस्था की जांच करते अधिकारी

अमेठी के गौरीगंज स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर खाद वितरण की व्यवस्था में कमियां मिलने के बाद जिलाधिकारी शशांक चौधरी ने चार जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। 9 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र पर डीएपी लेने के लिए किसानों की लंबी कतार लगी थी और खाद वितरण के लिए केवल एक पीओएस मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे वितरण की रफ्तार धीमी हो रही थी।

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान यूरिया और डीएपी के स्टॉक का रजिस्टर से मिलान किया, किसानों से उनकी समस्याएं जानीं और वितरण व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए। प्रशासन ने अगले दो दिनों में मांग के अनुसार पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने और तीन पीओएस मशीनों से वितरण सुनिश्चित करने को कहा।

डीएपी के लिए किसानों की लंबी कतार के बाद हुआ निरीक्षण

रबी सीजन की तैयारियों के बीच किसानों को डीएपी खाद की जरूरत होती है। इसी दौरान गौरीगंज स्थित इफको किसान सेवा केंद्र पर खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतार लगने की खबर सामने आई थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने केंद्र का औचक निरीक्षण किया, ताकि खाद वितरण की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके।

निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में किसान खाद लेने के इंतजार में खड़े मिले। केंद्र पर केवल एक पीओएस मशीन से वितरण किए जाने के कारण प्रक्रिया धीमी चल रही थी। किसानों की संख्या अधिक होने पर एक मशीन से सभी को समय पर खाद उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा था।

जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई और तत्काल तीन पीओएस मशीनों के माध्यम से वितरण कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही केंद्र पर अतिरिक्त कर्मचारियों और आवश्यक तकनीकी संसाधनों की व्यवस्था करने को कहा गया।

चार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस देने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों के बाद जिलाधिकारी ने चार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, इनमें उप कृषि निदेशक सत्येंद्र कुमार, जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र सिंह निरंजन, इफको किसान सेवा केंद्र के प्रभारी विनय कुमार श्रीवास्तव और इफको के क्षेत्र प्रबंधक अरविंद सिंह शामिल हैं।

इन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। नोटिस के जरिए संबंधित अधिकारियों से वितरण व्यवस्था में मिली कमियों के संबंध में जवाब मांगा जाना है।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश अपने आप में किसी अधिकारी को दोषी ठहराने के समान नहीं है। इसका उद्देश्य संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेना और यह पता करना है कि खाद वितरण की व्यवस्था में कमियां क्यों सामने आईं।

उपलब्ध समाचार रिपोर्ट में इन अधिकारियों के जवाब या उनके खिलाफ किसी अंतिम दंडात्मक कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल कार्रवाई को नोटिस जारी करने के निर्देश तक ही सीमित बताना उचित है।

यूरिया और डीएपी के स्टॉक का किया गया मिलान

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान केंद्र पर उपलब्ध यूरिया और डीएपी के स्टॉक का संबंधित पंजिका से मिलान किया। स्टॉक रजिस्टर का सत्यापन खाद वितरण की निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे यह जांचने में मदद मिलती है कि रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा और केंद्र पर उपलब्ध खाद का हिसाब मेल खाता है या नहीं।

निरीक्षण के दौरान सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की गई। जिलाधिकारी ने किसानों से सीधे बातचीत करके खाद प्राप्त करने में आ रही समस्याओं की जानकारी ली।

इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य केंद्र की वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाना और किसानों को खाद के लिए लंबे समय तक इंतजार करने से राहत दिलाना था। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में यूरिया और डीएपी के स्टॉक में किसी निश्चित मात्रा की कमी या स्टॉक रजिस्टर में गड़बड़ी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसलिए इस मामले को खाद की जमाखोरी या कालाबाजारी का प्रमाणित मामला बताना सही नहीं होगा।

दो दिन में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने के निर्देश

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को अगले दो दिनों में किसानों की मांग के अनुसार पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कृषि विभाग को जिले के अन्य उर्वरक वितरण केंद्रों की नियमित निगरानी करने और किसी केंद्र पर स्टॉक खत्म होने से पहले नई आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया।

यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खाद की मांग बढ़ने पर केवल उपलब्ध स्टॉक पर्याप्त होना ही जरूरी नहीं है, बल्कि किसानों तक उसका समय पर पहुंचना भी आवश्यक है। यदि किसी केंद्र पर खाद उपलब्ध होने के बावजूद वितरण धीमा रहता है, तो किसानों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ सकता है।

तीन पीओएस मशीनों से वितरण कराने और अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था करने का उद्देश्य इसी समस्या को कम करना था। हालांकि, प्रशासन के निर्देशों के बाद केंद्र पर व्यवस्था में कितना सुधार हुआ और किसानों को कितनी राहत मिली, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।

किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना क्यों जरूरी?

रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना और दूसरी फसलों की खेती के लिए किसान अलग-अलग उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं। फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद की उपलब्धता जरूरी होती है। बुवाई के समय खाद प्राप्त करने में देरी होने पर किसानों की खेती से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

ऐसे में उर्वरक केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक, सुचारु वितरण, सही रिकॉर्ड और जरूरत के अनुसार कर्मचारियों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। पीओएस मशीनों की पर्याप्त संख्या भी वितरण प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती है।

प्रशासन की जिम्मेदारी केवल खाद के स्टॉक की जांच करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि किसानों को निर्धारित कीमत पर खाद मिले और वितरण में अनावश्यक देरी न हो। शिकायतों पर समय से कार्रवाई करना और सभी केंद्रों की नियमित निगरानी करना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब व्यवस्था में सुधार पर नजर

अमेठी के गौरीगंज स्थित इफको किसान सेवा केंद्र के निरीक्षण में मुख्य समस्या खाद वितरण की धीमी रफ्तार और संसाधनों की कमी के रूप में सामने आई। इसके बाद जिलाधिकारी ने तीन पीओएस मशीनों से वितरण, अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था और दो दिनों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

चार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश देकर प्रशासन ने मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी शुरू की। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि संबंधित केंद्र पर निर्देशों का पालन किस तरह होता है और किसानों को खाद लेने में कितनी सुविधा मिलती है।

तथ्य-जांच का निष्कर्ष: अमर उजाला की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट और अन्य प्रकाशित खबरों में निरीक्षण, एक पीओएस मशीन से धीमे वितरण, चार अधिकारियों को नोटिस देने के निर्देश तथा दो दिनों में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की बात की पुष्टि होती है।

हालांकि, नोटिस के अंतिम परिणाम, केंद्र का आधिकारिक पक्ष और निर्देशों के अनुपालन की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए खबर में इन बातों को अंतिम रूप से तय तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

स्रोत

 

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