गर्मी के मौसम में दुधारू पशुओं का प्रबंधन और देखभाल

Published on: May 16, 2020 (14:45 IST) , by: शशि कुमार

दूध को एक पौष्टिक भोजन माना जाता है। यह कैल्शियम में समृद्धता के लिए जाना जाता है, और इस प्रकार हड्डियों और दांतों के लिए महत्वपूर्ण है। दूध और दूध के उत्पाद में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिनअमीनो एसिड, लाभकारी एंजाइम और फैटी एसिड खनिज और वसा सहित 9 से अधिक अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं। हर दिन दूध पीने से लाल रक्त कोशिका की संख्या बढ़ती है, शरीर की मरम्मत और विकास के लिए प्रोटीन की आपूर्ति होती है, मांसपेशियों के लिए मैग्नीशियम, ऊर्जा के लिए फास्फोरस, जीवन शक्ति के लिए कार्बोहाइड्रेट और तंत्रिका कार्य के लिए पोटेशियम प्रदान करता है। ये सभी पोषक तत्व शरीर को अच्छी तरह से काम करने में मदद करते हैं और दिन भर तरोताजा रखते हैं। नए शोध बताते हैं कि प्रतिदिन मानकीकृत दूधजो आवश्यक खनिजों और पेप्टाइड्स में उच्च होता है, मध्यम आयु वर्ग और वयस्कों में चयापचय सिंड्रोम के विकास के जोखिम को कम करता है। प्रतिदिन दूध का सेवन करने से त्वचा दमकती हैयह रात की अच्छी नींद लेने में भी सहायक होती है - हमारे तनावपूर्ण जीवन में एक गंभीर आवश्यकता। दूध का नियमित सेवन तनाव को कम करता हैआंखों की रोशनी बढ़ाता है और यहां तक कि उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के विकास के जोखिम को कम करता है। कुल मिलाकरएक गिलास दूध हर रोज स्वास्थ्य के लिए एक वरदान है।

     हमारा देश भारत विश्व का 22 प्रतिशत दुग्ध उत्पादन के साथ प्रथम स्थान पर है । देश में दूध का उत्पादन  2017-18 में 176.3 मिलियन टन था जो कि 2018-19 में 6.5 फीसदी बढ़कर 187.7 मिलियन टन हुआ। 2019 की राष्ट्रीय पशुधन जनगणना के अनुसार, मवेशियों की आबादी 300 मिलियन से अधिक आंकी गई है। हालांकि, हमारे देश के मवेशियों में औसत दुग्ध उत्पादन क्षमता की कमी है जो किसानों के आत्मनिर्भरता में कहीं न कहीं रुकावट पैदा करती है। हमारे देश में दुधारू पशुओं की काम उत्पादन क्षमता के पीछे बहुत कारण हैं जैसे - हमारे देश के विविध मौसम तथा पशुओं पर उनके प्रभाव, खाने में पौष्टिक तत्व की कमी, पशुओं में स्वास्थ्य की देख-भाल आदि शामिल हैं । इन सभी कारको में से पशुओं पर मौसम का प्रभाव महत्त्वपूर्ण है खास कर गर्मियों में पशुओं पर ताप-तनाव का प्रभाव। गर्मी के मौसम में ज्यादातर दूधारू पशु ताप-तनाव से ग्रसित होते हैं, जो उन पशुओं में ताप- विनियामक परिवर्तन को प्रेरित करता है। इस मौसम में आस पास के वातावरण का गर्म होना पशुधन प्रजातियों के उत्पादन और प्रजनन दर पर विशेष प्रभाव डालता है। दुधारू पशुओं में गर्मी के कारण तनाव उत्पन्न होने के कई कारण  है जिनमें प्रमुख हैं - उच्च तापमान और उच्च आर्द्रता। दुधारू पशुओं की उत्पादकता गर्मियों के दौरान बहुत कम हो जाती हैं। इस मौसम में पशुओं के भोजन और उनके स्वास्थ्य की विशेष देखभाल दो प्रमुख कारक हैं, जिन्हें उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रबंधित करने की आवश्यकता होती है।

गर्मी के मौसम में पशुओं के प्रबंधन का आर्थिक महत्व:

  • गर्मी के तनाव से जुड़े सभी परिवर्तन उत्पादकता में कमी, प्रजनन क्षमता में कमी और यहां तक की अधिकतर मामलों में जीवन के नुकसान की ओर ले जाते हैं।
  • भारत में हर साल गर्मी में ग्रसित होने के कारण दूध के उत्पादकता में भारी नुकसान होता है, जिससे भारी वित्तीय नुकसान होता है।
  • दूध की संरचना जैसे दूध में वसा और एस.एन.एफ. (ठोस वसा नहीं) का प्रतिशत भी प्रभावित होता है, जिससे दूध केमूल्य पर प्रभाव पड़ता है।
  • इस मौसम में ताप-तनाव के कारण ऑइस्ट्रस साइकिल, गर्भाधान दर में कमी और सेवा की अवधि और शुष्क अवधि में वृद्धि से प्रजनन पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

गर्मी से तनावग्रस्त मवेशियों के सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं :

  • मवेशी छाया में रहना पसंदकरते हैं।
  • मवेशियों में पानी का सेवन बढ़ जाना तथा चारा कम खाना।
  • दुधारूमवेशी सोने से ज्यादा खड़े रहना पसंद करते हैं।
  • मवेशियों के साँस दर में वृद्धि के साथ हल्का हल्का साँस लेना।
  • मवेशियों के शरीर के तापमान में वृद्धि। इस तनाव में शरीर का तापमान बहुत अधिक हो जाता है, कभी-कभी 106 - 108 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है।
  • दुधारू पशुओं के हृदय गति में वृद्धि।
  • पशुओं के मुंह में लार का उत्पादन बढ़ जाना।
  • मवेशियों का खुले मुंह से साँस लेना।
  • दुधारू पशुओं की त्वचा सुस्त और ठंडी भी हो जाती है।

गर्मी के कारण पशुओं पर नकारात्मक प्रभावों को कम करने की विशेष रणनीतियां:

  1. दुधारू पशुओं के प्रजाति का चुनाव:
  • हालांकि दुधारू गायों की देशी नस्लें गर्मी के प्रति कम संवेदनशील होती हैं, जबकि क्रॉसब्रीड और विदेशी नस्लें गर्मी के तनाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
  • भैंस को काली त्वचा के कारण इस बीमारी का अधिक खतरा होता है, जो अधिक धूप विकिरण और कम पसीने वाली ग्रंथियों (मवेशी में केवल⅙) को अवशोषित करती है।
  1. दुधारू पशुओं में प्रजनन प्रबंधन:
  • गर्मियों में ताप-तनाव के कारण दुधारू पशुओं में ताप के लक्षण कम दिखाई देते हैं, इसलिए मामूली ताप के लक्षणों वाले पशुओं के लिए बेहतर विशेषज्ञ की सहायता लें।
  • बैल का प्रयोग करने के बजाय कृत्रिम गर्भाधान प्रजनन जारी रखने के लिए हमेशा सलाह दी जाती है क्योंकि प्राकृतिक प्रजनन में बैल और गाय दोनों गर्मी से तनाव के कारण बांझपन का शिकार होते हैं।
  1. दुधारू पशुओं में ताप-तनाव के प्रबंधन:

ताप-तनाव के प्रबंधन में निम्नलखित कारक महत्त्वपूर्ण है:

  • सुनिश्चित करें कि पशुओं को छाया के नीचे रखा जाए। छाया का सबसे प्रभावी स्त्रोत पेड़ है। यदि छायादार पेड़ उपलब्ध नहीं है,तो न्यूनतम9 फीट की ऊंचाई वाली छत प्रदान की जानी चाहिए। 20-25 % छिद्र के साथ एग्री- नेट भी उपयोगी होता है।
  • धन के पुआल इत्यादि जैसी सामग्री के साथ छत को सफेद करना,छत को सफेद रंग से पेंट करना या नकली छत का इंसुलेशन प्रदान करना शीतल वातावरण प्रदान करने में मदद करता है।
  • ढकी हुई शेड में प्रति गाय3 x 1 का एक वेंटिलेटर सुनिश्चित करें। इन शेडों में वेंटीलेशन की सुविधा के लिए हेवी ड्यूटी फैन सबसे अच्छा विकल्प होता है।
  • गौशालाओंमें पंखे के प्रावधान के साथ साथ 1 घंटे में कम से कम तीन बार पशु के शेड में फॉगिंग करना उपयोगी है। इसके लिए ऑटो मिस्टर / फागर बेहतर है।
  • पशुओं की त्वचा से वाष्पीकरण को प्रेरित करने के लिए पंखे/ ब्लोअर का उपयोग किया जाना चाहिए।
  • गर्मी से तनाव के दौरान पशुओं के लिए पर्याप्त ठंडे पानी के सेवन का प्रबंध करें।
  • पशुओं के लिए चौबीस घंटे पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें, जिसे छाया में प्रदान करें।
  • गर्मी से बचने के लिए सुबह और देर शाम के समय चराई को प्राथमिकता दें।
  • दुधारू पशुओं को कोशिश करें की सुबह, शाम और देररात के समय खाना दें।

 

  • दूध देने के कम से कम दो घंटे पहले ठन्डे पानी से दुधारू पशुओं की धुलाई कर देनी चाहिए जिससे तनाव कम होती है।
  • गर्मियों के दौरान ठंडे पानी से मवेशी और विशेष रूप से भैंस को धोना उचित होता है।
  • भैंस के लिए गर्मी से तनाव का मुकाबला करने का सबसे प्रभावी तरीका है तालाब बनाना।

 

  1. दुधारू पशुओं के लिए चारा प्रबंधन:
  • गर्मियों के दौरान हरा चारा और खली की उपलब्धता सीमित होती है जबकि कुछ क्षेत्रों में सूखा चारा प्रचुर मात्रा में हो सकता है लेकिन गुणवत्ता (पोषण मूल्य) और पाचन शक्ति में खराब हो सकता है। गुणवत्ता वाले चारा और संतुलित राशन खिलाने से गर्मी से तनाव के कुछ प्रभावों में कमी आएगी ।
  • पशुओं के खाने में चारा और कन्सन्ट्रेट की मात्रा कुल फीड के 70:30 के अनुपात में होना चाहिए। अनाज और खली के रूप में अतिरिक्त भोजन खिलाने की सलाह दी जाती है।
  • गर्मियों में अतिरिक्त 35प्रतिशतप्रोटीन से भरपूर मिश्रण को एक दिन में 5-6 बार पिलाया जाना चाहिए। दिन के किसी भी ठंडे समय के दौरान गेहूं के भूसे को प्राथमिकता दें।
  • खनिजों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए गर्म मौसम के दौरान बढ़ी हुई खनिज पूरक सुनिश्चित करें। पोटैशियम समृद्ध खनिज मिश्रण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • मौसमी चारा मौसमी तनाव और खराब मौसम में भी दुधारू पशु की प्रजनन और उत्पादक स्थिति को बढ़ाने में मदद करेगा।
  • दुधारू पशुओं के भोजन पानी और प्रबंधन योजना को अचानक ना बदलें।
  • जितना संभव हो दुधारू पशुओं को ताजा चारा ही खिलाएं।
  • दुधारू पशुओं के चारे में पर्याप्तफाइबर सुनिश्चित करें।

दुधारू पशुओं का हमारे देश के किसानों के प्रगति में अत्यधिक योगदान है। इन पशुओं के देख-भाल में किसानों को विशेष ध्यान रखने की जरुरत है। खास कर गर्मी के मौसम में इन पशुओं की विशेष  देख - भाल से दुग्ध उत्पादन तथा प्रजनन दर में वृद्धि कर सकते हैं। इस मौसम में दुधारू पशुओं के स्वास्थ्य पर ज्यादा प्रतिकूल प्रभाव पड़ने पर पशु विशेषज्ञ से संपर्क करें।

 

शशि कुमार,
पशुपालन और डेयरी विभाग,
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, वाराणसी – 221005

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