1240 पशुओं की हुई निशुल्क स्वास्थ्य देखभाल, ग्रामीणों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया

भाकृअनुप – राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा जनजातीय उप योजना (TSP) के अंतर्गत राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के दो ग्रामीण क्षेत्रों ग्राम सोबनिया (तहसील पीपलखूंट) एवं ग्राम मोटा मायंगा (तहसील सुहागपुरा) में कृषक-वैज्ञानिक संवाद और पशु स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने बताया कि केंद्र जनजातीय क्षेत्रों में वैज्ञानिक पशुपालन सेवाएं और तकनीकी जानकारी लगातार पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि उष्ट्र पालन सहित अन्य पशुधन आधारित गतिविधियाँ ग्रामीण आजीविका को मजबूती प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने पशुपालकों से वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की अपील की और एनआरसीसी की भविष्य में निरंतर सहभागिता का भरोसा भी दिलाया।

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन चौधरी ने प्रतिभागियों को ऊंट पालन की वैज्ञानिक विधियों, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तथा समन्वित कृषि मॉडल की उपयोगिता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय संसाधनों का उचित प्रबंधन कर पशुपालन को लाभकारी बनाया जा सकता है।

ग्राम सोबनिया की सरपंच श्रीमती दलु और मोटा मायंगा के सरपंच श्री शांतिलाल ने एनआरसीसी की इस पहल की सराहना की और कहा कि यह शिविर जनजातीय पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर ऐसी गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

शिविर के दौरान कुल 1240 पशुओं (जिसमें ऊँट, गाय, बैल, भैंस, बकरी, भेड़ एवं मुर्गियां शामिल थीं) का निशुल्क रोग परीक्षण, दवा वितरण एवं किट का वितरण किया गया। साथ ही पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, रोगों की पहचान एवं रोकथाम, तथा पोषण संबंधित वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की गई।

इस कार्यक्रम ने न केवल पशुधन स्वास्थ्य सुधार की दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया, बल्कि जनजातीय क्षेत्रों के पशुपालकों को वैज्ञानिक सोच एवं आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित भी किया। एनआरसीसी की यह पहल निश्चित ही स्थानीय पशुपालकों की आर्थिक स्थिरता और स्वस्थ पशुधन विकास के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।

 

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