Cold Chain Yojana: फल, सब्जी, दूध और मछली उत्पादकों के लिए कमाई बढ़ाने का नया रास्ता

Cold Chain Yojana: A new way for fruit, vegetable, milk and fish producers to increase their income

Cold Chain Yojana

Cold Chain Yojana

Cold Chain Yojana: भारत में किसान मेहनत से उत्पादन तो करते हैं, लेकिन कई बार फसल कटाई के बाद सही भंडारण, ठंडी जगह, प्रोसेसिंग और समय पर परिवहन की सुविधा न होने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। खासकर फल, सब्जी, दूध, मछली, मांस, पोल्ट्री और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। खेत से मंडी या बाजार तक पहुंचने में देरी, गर्म मौसम, खराब पैकिंग और कोल्ड स्टोरेज की कमी किसानों की कमाई को सीधे प्रभावित करती है।

इसी समस्या को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Kisan SAMPADA Yojana के तहत Integrated Cold Chain and Value Addition Infrastructure Scheme शुरू की है, जिसे सामान्य भाषा में कोल्ड चेन योजना कहा जाता है। इस योजना का उद्देश्य खेत से उपभोक्ता तक बिना रुकावट वाली कोल्ड चेन व्यवस्था बनाना है, ताकि कृषि और संबद्ध उत्पादों की गुणवत्ता बनी रहे, बर्बादी कम हो और किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिल सकें।

Cold Chain Yojana क्या है?

कोल्ड चेन योजना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा लागू की जाने वाली एक केंद्रीय योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादों के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें कटाई के बाद उत्पाद को तुरंत छंटाई, ग्रेडिंग, प्री-कूलिंग, पैकिंग, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग और रेफ्रिजरेटेड परिवहन की सुविधा मिल सके।

सरल भाषा में कहें तो कोल्ड चेन एक ऐसी कड़ी है जो किसान के खेत को बाजार, प्रोसेसिंग यूनिट और उपभोक्ता से जोड़ती है। इसमें तापमान नियंत्रित भंडारण और परिवहन की सुविधा होती है। इससे जल्दी खराब होने वाले उत्पाद लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं।

यह योजना केवल कोल्ड स्टोरेज बनाने तक सीमित नहीं है। इसमें खेत स्तर पर प्री-कूलिंग, वजन, छंटाई, ग्रेडिंग, वैक्सिंग, पैकिंग सुविधा, मल्टी प्रोडक्ट कोल्ड स्टोरेज, मल्टी टेम्परेचर स्टोरेज, CA स्टोरेज, IQF, ब्लास्ट फ्रीजिंग, रेफर वैन और मोबाइल कूलिंग यूनिट जैसी सुविधाएं भी शामिल हो सकती हैं।

Cold Chain Yojana का मुख्य उद्देश्य

कोल्ड चेन योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना है। भारत में फल, सब्जी, डेयरी और मछली जैसे उत्पादों में कटाई के बाद खराब होने की संभावना अधिक रहती है। यदि समय पर ठंडा भंडारण और सही परिवहन सुविधा मिल जाए तो किसान अपनी उपज को जल्दबाजी में कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होंगे। इस योजना के कुछ प्रमुख उद्देश्य हैं:

किसानों के लिए यह योजना कैसे काम कर रही है?

कोल्ड चेन योजना किसानों के लिए कई तरीकों से उपयोगी साबित हो सकती है। किसान अक्सर कटाई के तुरंत बाद अपनी उपज बेच देते हैं, क्योंकि उनके पास भंडारण की सुविधा नहीं होती। इस कारण जब बाजार में अधिक आवक होती है तो कीमतें गिर जाती हैं और किसान को कम दाम मिलते हैं। कोल्ड चेन सुविधा होने पर किसान या किसान समूह अपनी उपज को कुछ समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर बाजार भाव मिलने पर बेच सकते हैं।

फल उत्पादक किसानों के लिए यह योजना खास तौर पर लाभकारी है। आम, लीची, अमरूद, अंगूर, संतरा, केला और अन्य बागवानी उत्पाद जल्दी खराब होते हैं। यदि इनके लिए प्री-कूलिंग, ग्रेडिंग और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा उपलब्ध हो तो इन्हें दूर के बाजारों तक भेजना आसान हो जाता है।

डेयरी किसानों के लिए भी यह योजना उपयोगी है। दूध और दूध से बने उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए तापमान नियंत्रित व्यवस्था जरूरी होती है। गांव या क्लस्टर स्तर पर चिलिंग और कोल्ड स्टोरेज सुविधा बनने से दूध की गुणवत्ता बनी रहती है और प्रोसेसिंग यूनिट तक सप्लाई बेहतर होती है।

मछली पालन और पोल्ट्री से जुड़े किसानों को भी कोल्ड चेन से लाभ मिलता है। मछली, मांस और पोल्ट्री उत्पादों को सही तापमान पर रखना जरूरी होता है। रेफर वैन और कोल्ड स्टोरेज की सुविधा से इन उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।

FPO और किसान समूहों के लिए बड़ा अवसर

आज के समय में किसान उत्पादक संगठन यानी FPO किसानों को बाजार से जोड़ने का मजबूत माध्यम बन रहे हैं। कोल्ड चेन योजना FPO, सहकारी समितियों, SHG और किसान समूहों के लिए बड़ा अवसर दे सकती है। छोटे किसान अकेले कोल्ड स्टोरेज या प्रोसेसिंग यूनिट नहीं बना सकते, लेकिन समूह बनाकर वे इस योजना के तहत प्रोजेक्ट तैयार कर सकते हैं।

FPO अपने क्षेत्र की प्रमुख फसल के आधार पर कोल्ड चेन प्रोजेक्ट बना सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी क्षेत्र में टमाटर, आलू, प्याज, आम, दूध या मछली का उत्पादन अधिक है, तो FPO उसी के अनुसार स्टोरेज, ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन सुविधा विकसित कर सकता है। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बिक्री और भंडारण का विकल्प मिल सकता है।

FPO किसानों की उपज को इकट्ठा करके गुणवत्ता के आधार पर ग्रेडिंग कर सकता है। अच्छी ग्रेड की उपज को बड़े बाजार, रिटेल चेन, होटल, प्रोसेसिंग कंपनी या निर्यातकों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे किसानों को मंडी पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।

किन उत्पादों को फायदा मिल सकता है?

कोल्ड चेन योजना मुख्य रूप से जल्दी खराब होने वाले कृषि और संबद्ध उत्पादों के लिए उपयोगी है। इसमें बागवानी, डेयरी, मछली, मांस और पोल्ट्री जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। लाभ पाने वाले प्रमुख उत्पाद:

हालांकि किसानों को आवेदन या प्रोजेक्ट बनाते समय ताजा गाइडलाइन और पात्र उत्पादों की सूची जरूर देखनी चाहिए, क्योंकि समय-समय पर योजना के नियमों में बदलाव हो सकता है।

किन राज्यों में यह योजना चलाई जा रही है?

कोल्ड चेन योजना किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। यह केंद्र सरकार की योजना है और देशभर में लागू होती है। इसका मतलब है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों से पात्र संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं।

यह योजना मांग आधारित है। इसका अर्थ है कि राज्यवार फंड पहले से तय नहीं होता। जब मंत्रालय Expression of Interest यानी EoI जारी करता है, तब देशभर से पात्र संस्थाएं ऑनलाइन आवेदन करती हैं। इसके बाद प्रस्तावों की जांच, पात्रता मूल्यांकन और मेरिट के आधार पर मंजूरी दी जाती है।

इसलिए किसान या FPO को यह समझना चाहिए कि योजना “राज्य में चल रही है या नहीं” से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित क्षेत्र में अच्छा प्रोजेक्ट बनाकर आवेदन किया जाए। अगर किसी जिले में फल, सब्जी, दूध, मछली या अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की अच्छी उपलब्धता है, तो वहां कोल्ड चेन प्रोजेक्ट की संभावना अधिक मजबूत हो सकती है।

कौन आवेदन कर सकता है?

इस योजना में केवल व्यक्तिगत किसान ही नहीं, बल्कि किसान समूह और संस्थाएं भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। योजना के तहत पात्रता गाइडलाइन के अनुसार अलग-अलग प्रकार की संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं। संभावित पात्र संस्थाएं:

कृषि उद्यमी और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े निवेशक। छोटे किसान सीधे बड़े कोल्ड चेन प्रोजेक्ट में आवेदन करने के बजाय FPO, सहकारी समिति या किसान समूह के माध्यम से जुड़ सकते हैं। इससे उनके लिए योजना का लाभ लेना आसान हो सकता है।

योजना के तहत क्या-क्या सुविधाएं बनाई जा सकती हैं?

कोल्ड चेन योजना में केवल एक भवन या स्टोरेज बनाने की बात नहीं होती। इसमें पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। योजना के तहत प्रोजेक्ट की जरूरत के अनुसार कई सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। मुख्य सुविधाएं:

इन सुविधाओं की मदद से किसान की उपज को खेत से लेकर बाजार तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

किसानों की आय बढ़ाने में योजना की भूमिका

कोल्ड चेन योजना किसानों की आय बढ़ाने में अप्रत्यक्ष लेकिन मजबूत भूमिका निभा सकती है। जब किसान की उपज खराब नहीं होती, तो उसका नुकसान कम होता है। जब उपज की गुणवत्ता बनी रहती है, तो बाजार में उसका भाव बेहतर मिल सकता है। जब उपज को दूर के बाजारों तक भेजना संभव होता है, तो किसान स्थानीय मंडी के सीमित भाव पर निर्भर नहीं रहता।

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी क्षेत्र में आम या लीची का उत्पादन अधिक है और वहां कोल्ड स्टोरेज व रेफर वैन की सुविधा उपलब्ध है, तो उत्पाद को बड़े शहरों तक भेजा जा सकता है। इससे किसानों को बेहतर खरीदार मिल सकते हैं। इसी तरह दूध उत्पादक क्षेत्रों में चिलिंग और कोल्ड चेन सुविधा से डेयरी प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिलता है।

इस योजना से वैल्यू एडिशन को भी बढ़ावा मिलता है। किसान या FPO केवल कच्चा माल बेचने के बजाय ग्रेडेड, पैक्ड या प्रोसेस्ड उत्पाद बेच सकते हैं। इससे उनकी कमाई बढ़ने की संभावना रहती है।

आवेदन कैसे करें?

कोल्ड चेन योजना में आवेदन आमतौर पर मंत्रालय द्वारा जारी Expression of Interest यानी EoI के माध्यम से होता है। जब सरकार आवेदन आमंत्रित करती है, तब पात्र संस्थाएं SAMPADA Portal पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। आवेदन की तारीख, गाइडलाइन, जरूरी दस्तावेज और प्रोजेक्ट से जुड़ी शर्तें MoFPI की वेबसाइट पर जारी की जाती हैं। आवेदन प्रक्रिया इस प्रकार हो सकती है:

ध्यान देने वाली बात यह है कि आवेदन हर समय खुले नहीं रहते। जब EoI जारी होता है, तभी आवेदन की विंडो खुलती है। इसलिए किसानों, FPO और उद्यमियों को MoFPI की वेबसाइट और SAMPADA Portal पर नियमित नजर रखनी चाहिए।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

प्रोजेक्ट के प्रकार और संस्था के अनुसार दस्तावेज अलग-अलग हो सकते हैं। फिर भी सामान्य तौर पर कुछ दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं। संभावित दस्तावेज:

किसानों या FPO को आवेदन से पहले किसी विशेषज्ञ या सरकारी हेल्पडेस्क से सलाह लेकर सही DPR तैयार करनी चाहिए।

योजना से किसानों को मिलने वाले प्रमुख लाभ

कोल्ड चेन योजना किसानों और कृषि उद्यमियों के लिए कई स्तरों पर लाभकारी है।

छोटे किसानों के लिए क्या रास्ता है?

छोटे किसान अक्सर सोचते हैं कि कोल्ड चेन योजना केवल बड़ी कंपनियों के लिए है, लेकिन ऐसा नहीं है। छोटे किसान इस योजना का लाभ सीधे बड़े प्रोजेक्ट के रूप में भले न ले पाएं, लेकिन FPO, सहकारी समिति या किसान समूह के माध्यम से जुड़ सकते हैं।

अगर किसी गांव या क्षेत्र में एक ही फसल का उत्पादन अधिक है, तो किसान मिलकर FPO बना सकते हैं। इसके बाद FPO कोल्ड स्टोरेज, पैकिंग सेंटर या रेफर वैन जैसे प्रोजेक्ट के लिए आवेदन कर सकता है। इससे छोटे किसानों की उपज को भी आधुनिक सप्लाई चेन का लाभ मिल सकता है।

किसान अपने जिले के कृषि विभाग, उद्यान विभाग, जिला उद्योग केंद्र, नाबार्ड कार्यालय, FPO प्रमोटिंग एजेंसी या खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

योजना की चुनौतियां

कोल्ड चेन योजना उपयोगी है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए कुछ चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है। कोल्ड चेन प्रोजेक्ट में निवेश अधिक होता है। इसके लिए जमीन, बिजली, तकनीकी ज्ञान, प्रशिक्षित कर्मचारी और मजबूत बाजार लिंक की जरूरत होती है।

कई बार किसान समूहों के पास अच्छी DPR तैयार करने की क्षमता नहीं होती। बैंक फाइनेंस प्राप्त करना भी चुनौती बन सकता है। कोल्ड स्टोरेज चलाने में बिजली खर्च और रखरखाव लागत भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए प्रोजेक्ट बनाने से पहले स्थानीय उत्पादन, बाजार मांग और संचालन लागत का सही आकलन जरूरी है।

किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

किसान या FPO को योजना में आवेदन करने से पहले कुछ बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले यह देखें कि क्षेत्र में कौन-सी फसल या उत्पाद अधिक मात्रा में उपलब्ध है।

प्रोजेक्ट केवल सब्सिडी के आधार पर न बनाएं, बल्कि बाजार की मांग भी समझें। DPR मजबूत और व्यावहारिक होनी चाहिए। खरीदार, प्रोसेसर या रिटेल कंपनियों से पहले से संपर्क बनाएं।

बिजली, सड़क, पानी और परिवहन सुविधा की उपलब्धता जांचें। प्रोजेक्ट संचालन के लिए प्रशिक्षित टीम तैयार करें। सरकारी गाइडलाइन को ध्यान से पढ़ें। आवेदन की अंतिम तारीख का ध्यान रखें।

निष्कर्ष

कोल्ड चेन योजना किसानों की उपज को खेत से बाजार तक सुरक्षित पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल है। भारत जैसे देश में जहां फल, सब्जी, दूध, मछली और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों का बड़ा उत्पादन होता है, वहां कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

यह योजना केवल कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना नहीं है, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को आधुनिक बनाने का प्रयास है। इससे किसानों को बेहतर बाजार, बेहतर दाम और कम नुकसान का लाभ मिल सकता है। खासकर FPO, सहकारी समितियों और कृषि उद्यमियों के लिए यह योजना बड़ा अवसर साबित हो सकती है।

किसानों को चाहिए कि वे अपने क्षेत्र की फसल, बाजार मांग और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर योजना की जानकारी लें और FPO या किसान समूह के माध्यम से इस अवसर का लाभ उठाएं।

FAQs

Q1. कोल्ड चेन योजना क्या है?
कोल्ड चेन योजना केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत कृषि और संबद्ध उत्पादों के लिए ठंडा भंडारण, प्रोसेसिंग और तापमान नियंत्रित परिवहन सुविधा विकसित की जाती है।

Q2. यह योजना किस मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है?
यह योजना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा Pradhan Mantri Kisan SAMPADA Yojana के तहत लागू की जाती है।

Q3. क्या छोटे किसान आवेदन कर सकते हैं?
छोटे किसान सीधे बड़े प्रोजेक्ट में आवेदन करने के बजाय FPO, सहकारी समिति या किसान समूह के माध्यम से योजना का लाभ ले सकते हैं।

Q4. किन उत्पादों को योजना से लाभ मिलता है?
फल, सब्जी, दूध, डेयरी उत्पाद, मछली, मांस, पोल्ट्री और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को कोल्ड चेन से लाभ मिल सकता है।

Q5. आवेदन कहां करना होता है?
जब EoI जारी होता है, तब आवेदन SAMPADA Portal पर ऑनलाइन किया जाता है।

Q6. क्या यह योजना सभी राज्यों में लागू है?
हां, यह केंद्र सरकार की मांग आधारित योजना है और देशभर से पात्र संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं।

Q7. क्या राज्यवार फंड तय होता है?
नहीं, योजना मांग आधारित है। प्रस्तावों की मंजूरी पात्रता, मेरिट और उपलब्ध फंड के आधार पर दी जाती है।

Q8. किसानों को सबसे बड़ा फायदा क्या है?
किसानों की उपज खराब होने से बचती है, गुणवत्ता बनी रहती है और बेहतर बाजार मिलने की संभावना बढ़ती है।

Exit mobile version