अरुणाचल प्रदेश में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को किया जागरूक, प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य पर दिया जोर

Farmers in Arunachal Pradesh were made aware under the 'Save the Farm Campaign.......

Farmers in Arunachal Pradesh were made aware under the 'Save the Farm Campaign', emphasizing natural farming and soil health.

Farmers in Arunachal Pradesh were made aware under the 'Save the Farm Campaign', emphasizing natural farming and soil health.

किसानों को टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करने और मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र (ICAR–National Research Centre on Mithun), मेडजिफेमा ने अरुणाचल प्रदेश के लोअर दिबांग वैली जिले के कोरोनू गांव में ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया।

इस पहल का उद्देश्य किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है, जिनसे खेती की उत्पादकता बनाए रखने के साथ मिट्टी, पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी किया जा सके। बदलते मौसम और जलवायु संबंधी चुनौतियों के बीच कृषि को अधिक टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल बनाना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

प्राकृतिक खेती और मिट्टी की सेहत पर विशेष ध्यान

कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती के तरीकों और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने की आवश्यकता को प्रमुखता दी गई। खेती में मिट्टी की गुणवत्ता का सीधा संबंध फसल की वृद्धि, पोषक तत्वों की उपलब्धता और दीर्घकालीन उत्पादन क्षमता से होता है। इसलिए किसानों के लिए मिट्टी की स्थिति को समझना और फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करना जरूरी है।

संतुलित उर्वरक उपयोग भी अभियान का एक प्रमुख विषय रहा। उर्वरकों का इस्तेमाल फसल की आवश्यकता और मिट्टी की स्थिति के अनुरूप करने से पोषक तत्वों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है। इसके लिए मिट्टी की जांच, उचित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को महत्व देना आवश्यक है।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से टिकाऊ होगी खेती

कार्यक्रम में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया गया। कृषि उत्पादन को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए मिट्टी और पानी जैसे संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। किसानों को ऐसी पद्धतियों के बारे में जागरूक करना, जो संसाधनों पर अनावश्यक दबाव कम करने में मदद करें, टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

वहीं, Climate-Resilient Agriculture यानी जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना भी इस तरह की पहलों का अहम उद्देश्य है। मौसम में बदलाव, वर्षा की अनिश्चितता और तापमान में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियों में किसानों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार उपयुक्त कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए जागरूक करना जरूरी है।

किसानों तक वैज्ञानिक कृषि जानकारी पहुंचाने की पहल

‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ के तहत आयोजित यह कार्यक्रम किसानों तक टिकाऊ कृषि से जुड़ी जानकारी पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग और संसाधन संरक्षण जैसे विषयों पर जागरूकता बढ़ने से किसानों को खेती से जुड़े निर्णय अधिक वैज्ञानिक तरीके से लेने में मदद मिल सकती है।

कृषि की दीर्घकालीन उत्पादकता केवल वर्तमान फसल के उत्पादन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और प्राकृतिक संसाधनों के उचित प्रबंधन पर भी आधारित होती है। ऐसे में किसानों को वैज्ञानिक जानकारी से जोड़ने वाले जागरूकता कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।

कुल मिलाकर, अरुणाचल प्रदेश के कोरोनू गांव में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम खेती को अधिक टिकाऊ, संसाधन-कुशल और जलवायु-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भविष्य में कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

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