कुरीतियों का भारतीय किसानों के जीवन पर प्रभाव

Published on: April 14, 2021 (04:38 IST)

जैसा कि ज्ञात है कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां पचास प्रतिशत से अधिक की जनसंख्या गांवों में निवास करती है जो कि परोक्ष या अपरोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। गांव में कुछ पुराने रीति रिवाज ऐसे हैं जो ग्रामाण लोगों के जीवन पर कुप्रभाव डालते हैं। मजे की बात यह है कि ग्रामीण लोग इन कुरीतियों को पीढ़ी दर पीढ़ी भी निभाते जाते हैं। यदि ऐसा कहा जाय कि ये कुरीतियां इन्हें विरासत में मिली हैं तो कुछ गलत न होगा।

देश को स्वतंत्र हुए 73 साल हो गए हैं लेकिन ग्रामीणों में व्याप्त कुरीतियां आज भी चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि इस दौरान कृषि के क्षेत्र में अनेकों सुधार हुए हैं लेकिन फिर भी इस क्षेत्र में और काम करने की आवश्यकता है। कुछ ऐसी कुरीतियां है जो किसानों के जीवन को प्रभावित करती है जो कि निम्नलिखित हैं।

मानसून पर निर्भरता- हमारा देश विकास के पथ पर काफी आगे निकल चुका है लेकिन ज्यादातर किसान अभी भी पुराने रीति रिवाजों के कारण फसलों के लिए मानसून पर निर्भर रहते हैं। इसके कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

सिंचाई सुविधाएं- भारत में कृषि यंत्रीकरण में काफी सुधार हुए हैं लेकिन अभी भी कई स्थानों पर हमारे किसान भाई पुराने संसाधनों को अपनाएं हुए हैं। जैसे कि वे कुओं, तालाबों, नहरों आदि से सिंचाई करते हैं। जिससे की सही समय पर सिंचाई नहीं हो पाती है और वे पिछड़ जाते हैं। जिससे उनका लाभ भी प्रभावित होता है। 

प्राकृतिक संसाधनों का सही प्रयोग नहीं- प्रकृति ने हमें काफी संसाधन ऐसे दिए हैं जिनका कृषि पर उचित प्रयोग करके हम अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। जैसा कि वर्षा के पानी को इकट्ठा करना और सही समय पर सिंचाई के लिए प्रयोग करना, अत्यधिक उपजाऊ भूमि पर अलग-अलग तरीके से खेती करना और मौसम के हिसाब से सही फसलों का चुनाव करना इत्यादि।

किसानों के उत्पाद की कीमतों पर अत्यधिक हस्तक्षेप- पुराने रीति रिवाजों के हिसाब से आज भी किसानों को अपनी उपज या उत्पाद का सही मूल्य निर्धारण करने का अधिकार नहीं है।  जबकि ऐसा अन्य व्यवसाओं में नहीं है। किसानों के पास जब तक अपनी उपज के मूल्य निर्धारण का अधिकार नहीं होगा तब तक उन्हें सही कीमत नहीं मिल पाएगा।

प्रभावी नीतियों का अभाव- जैसा कि पहले बताया गया है कि भारतीय कृषि में अभी भी अत्यधिक काम करने की आवश्यकता है जो कि किसानों के हित में हो उनकों कार्य करने के लिए प्रेरित करें।  उनके मनोबल को बढ़ाए जिससे किसान सबल हो और किसान आगे बढञकर सबल हो।

कृषि में निवेश का अभाव- शुरू से ही हमारे देश में कृषि के विकास में निवेश का काफी अभाव रहा है जो कि कष्टप्रद है। अभी भी हम काफी पिछड़े हुए हैं। भविष्य में सरकार से उम्मीद होनी चाहिए कि वो कुछ नई-नई नीतियां बनाएं जिससे कृषि में अधिक निवेश हो जिससे खाद्यान्न बढ़े, खाद्यान्न की उच्च किस्म बढ़े तथा किसानों को शुद्ध लाभ मिले। ज्यादा से ज्यादा किसान प्रेरित होकर खेती में मन लगाकर काम करें।

कुरीरियों का किसान के सामान्य जीवन पर काफी कुप्रभाव है। इससे निजात पाने के लिए उपरोक्त बिन्दुओं पर ध्यान देना होगा और इस कुप्रथा को रोकना होगा। जिससे किसान प्रेरित होकर आगे बढ़े और नई-नई तकनीकों का ज्ञान अर्जित करके सबल भारतीय किसान बनें।

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