देश के कृषि क्षेत्र में योजनाओं के प्रभाव को कागजी आंकड़ों से निकालकर किसानों की वास्तविक जिंदगी तक पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में कृषि भवन, नई दिल्ली में मंत्रालय की पहली समग्र मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि मंत्रालय के विभिन्न विभागों, प्रभागों और National Missions की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई और आने वाले महीनों के लिए स्पष्ट, समयबद्ध तथा Result-oriented दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में Digital Agriculture, दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता, प्राकृतिक खेती, Horticulture, Farmer Producer Organizations यानी FPO, फसल बीमा, Soil Health, Micro-Irrigation, Agricultural Infrastructure Fund तथा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा हुई। बैठक में यह भी तय किया गया कि मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों की अब हर महीने नियमित समीक्षा होगी तथा विभागों और योजनाओं के लिए Monthly Financial और Physical Targets निर्धारित किए जाएंगे। Pasted text
बैठक का व्यापक फोकस इस बात पर रहा कि कृषि योजनाओं का लाभ किसानों तक कितनी तेजी और पारदर्शिता से पहुंच रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल सरकारी रिपोर्ट और कागजी प्रगति पर निर्भर रहने के बजाय वरिष्ठ अधिकारी स्वयं Field Visit करें और योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का जमीनी स्तर पर मूल्यांकन करें।
10.77 करोड़ से ज्यादा किसानों की बनी Farmer ID
समीक्षा बैठक में Digital Agriculture Mission की उपलब्धियों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। देश में 14 करोड़ किसानों के Digital Integration के राष्ट्रीय लक्ष्य के मुकाबले अब तक 10.77 करोड़ से अधिक विशिष्ट Farmer IDs बनाई जा चुकी हैं।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे छोटे और सीमांत किसानों के Digital Empowerment की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। Farmer ID को कृषि योजनाओं, Subsidy, Institutional Credit, MSP Procurement, Crop Insurance और Disaster Relief जैसी सेवाओं को अधिक पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचाने वाले Digital Infrastructure के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार के अनुसार Digital Identification से योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और सेवाओं की Delivery को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। इसके साथ ही कागजी प्रक्रियाओं को कम करने और किसानों को Digital Platforms से जोड़ने की दिशा में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है। Pasted text
Digital Crop Survey में 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का सर्वे
Digital Agriculture के विस्तार के तहत चालू Kharif Season में अब तक 26.73 करोड़ से अधिक खेतों का Digital Crop Survey पूरा होने की जानकारी बैठक में दी गई। इसके माध्यम से फसलों से संबंधित जानकारी Digital Platforms, Satellite और Mobile Applications के माध्यम से जुटाई जा रही है।
वहीं National Soil Mapping Programme के तहत 8.03 million hectare क्षेत्र का Digital Mapping पूरा होने की जानकारी भी दी गई।
केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में Farmer ID Creation और Digital Crop Survey की गति धीमी है, वहां विशेष Camps आयोजित किए जाएं। इसका उद्देश्य सभी पात्र किसानों को Digital Agriculture Ecosystem से जोड़ना है।
22 अक्टूबर से शुरू होगा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’
बैठक में किसानों और कृषि भूमि से जुड़े एक बड़े अभियान की घोषणा भी की गई। केंद्रीय मंत्री के अनुसार 22 अक्टूबर 2026 से देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया जाएगा।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की घटती सेहत, पराली एवं कृषि अवशेष प्रबंधन और रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग जैसी चुनौतियों से खेतों को बचाना है। अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों और Field-level Agricultural Staff को किसानों तक पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों को Soil Testing, Organic Matter Conservation, Crop Residue Management, पराली न जलाने और Balanced Nutrient Management के बारे में Practical Information दी जाएगी।
कृषि मंत्रालय का जोर इस बात पर है कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल Awareness Programme बनकर न रह जाए, बल्कि किसानों को ऐसी Practical Techniques की जानकारी मिले जिन्हें वे अपने खेतों में लागू कर सकें।
दलहन उत्पादन ने राष्ट्रीय लक्ष्य को पीछे छोड़ा
भारत को Pulses में आत्मनिर्भर बनाने के लिए चल रहे प्रयासों की भी समीक्षा की गई। National Pulses Self-Reliance Mission के तहत वर्ष 2025-26 में दलहन का क्षेत्र, उत्पादन और उत्पादकता राष्ट्रीय लक्ष्य से आगे रहने की जानकारी बैठक में दी गई।
देश में 266 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 274.09 लाख टन दलहन उत्पादन दर्ज किया गया। वहीं बुवाई का लक्ष्य 283 लाख हेक्टेयर था, जबकि वास्तविक क्षेत्र 286.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां दलहन उत्पादन को बढ़ाने के लिए अनुकूल हैं और इस अवसर को देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि में बदला जाना चाहिए। Pasted text
भारत में दालों की मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन बढ़ाना महत्वपूर्ण है। ऐसे में क्षेत्र विस्तार, बेहतर Seed Technology, Productivity Improvement और किसानों को उपयुक्त कृषि तकनीक उपलब्ध कराने पर लगातार ध्यान देना आवश्यक है।
तिलहन उत्पादन भी लक्ष्य से आगे
खाद्य तेलों में Import Dependence कम करने के उद्देश्य से चल रहे National Mission on Edible Oils-Oilseeds के तहत भी सकारात्मक आंकड़े सामने आए हैं।
वर्ष 2025-26 में 427 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 430.59 लाख टन तिलहन उत्पादन हुआ। तिलहन की बुवाई का क्षेत्र भी निर्धारित लक्ष्य से अधिक 308.86 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा।
घरेलू खाद्य तेल उत्पादन वर्ष 2023-24 के 121.75 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 129.96 लाख टन तक पहुंच गया। वहीं Oil Palm Mission के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 1.19 लाख हेक्टेयर नए क्षेत्र के लक्ष्य के मुकाबले शुरुआती महीनों में लगभग 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र कवर किया जा चुका है। Pasted text
यह प्रगति भारत की Edible Oil Security के लिए महत्वपूर्ण मानी जा सकती है, क्योंकि घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
प्राकृतिक खेती से जुड़े 27.32 लाख किसान
बैठक में Natural Farming के विस्तार को भी प्रमुख उपलब्धि के रूप में सामने रखा गया। National Mission on Natural Farming के तहत वर्ष 2025-26 में 18.75 लाख किसानों के लक्ष्य के मुकाबले 20.93 लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई।
इसी अवधि में 7.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 10.32 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के दायरे में आया।
अब तक देशभर में कुल 27.32 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं और कुल 12.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र इसके अंतर्गत कवर किया जा चुका है। ग्रामीण स्तर पर इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए 33,257 से अधिक कृषि सखियों और Community Resource Persons को तैनात किए जाने की जानकारी दी गई। Pasted text
प्राकृतिक खेती के विस्तार के साथ सरकार का जोर Farmers Training और Local-level Handholding पर भी है, ताकि किसान केवल नामांकन तक सीमित न रहें बल्कि उत्पादन प्रक्रिया में आवश्यक तकनीकों को सही तरीके से अपना सकें।
Horticulture Production 370.84 Million Ton तक पहुंचा
भारत के Horticulture Sector में भी उत्पादन बढ़ने की जानकारी समीक्षा बैठक में दी गई। Mission for Integrated Development of Horticulture के तहत 360 Million Ton के लक्ष्य के मुकाबले देश में 370.84 Million Ton Horticulture Production दर्ज किया गया।
नई Nurseries और नए Orchards के विकास में भी लक्ष्य से अधिक प्रगति बताई गई। 50 नई Nurseries के लक्ष्य के मुकाबले 187 नई Nurseries स्थापित की गईं, जबकि एक लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 1.90 लाख हेक्टेयर नए बाग विकसित किए गए।
फल, सब्जी और अन्य बागवानी फसलों का महत्व किसानों की Income Diversification में बढ़ता जा रहा है। इसलिए नई पौध सामग्री, Nursery Infrastructure, Post-Harvest Management और Market Linkage को मजबूत करना इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
FPO से जुड़े 30.11 लाख किसान
किसानों की सामूहिक Market Access और Bargaining Power बढ़ाने के लिए चल रही 10,000 FPO Scheme की भी समीक्षा की गई।
इस योजना में 2.40 लाख अतिरिक्त किसानों को जोड़ने के लक्ष्य के मुकाबले 30.11 लाख किसान FPO से जुड़े हैं। समीक्षा के दौरान बताया गया कि FPO का औसत Annual Turnover भी ₹38 लाख से बढ़कर ₹141.76 लाख तक पहुंचा है।
FPO के माध्यम से छोटे और सीमांत किसान सामूहिक रूप से Input Procurement, Aggregation, Processing, Branding और Marketing जैसी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। इससे कृषि उत्पादों की Market Linkage को मजबूत करने की संभावना बढ़ती है।
PM-RKVY के तहत 664 नई परियोजनाओं को मंजूरी
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना यानी PM-RKVY के तहत वर्ष 2026-27 में Project Approval Committee द्वारा अब तक 664 नई परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने की जानकारी दी गई।
इनमें 314 Laboratories, Warehouses और Custom Hiring Centres से संबंधित परियोजनाएं तथा 303 Seed Production और Area Expansion Projects शामिल हैं।
कुल ₹8,550 करोड़ के Allocation में से ₹3,151.80 करोड़ की प्रगति दर्ज होने की जानकारी बैठक में दी गई। केंद्रीय मंत्री ने राज्यों को आश्वस्त किया कि कृषि विकास से संबंधित जरूरी परियोजनाओं के लिए केंद्र की ओर से धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। Pasted text
AIF से गांवों में बन रहा आधुनिक कृषि Infrastructure
Agriculture Infrastructure Fund (AIF) के तहत अब तक 2.25 लाख से अधिक Projects के लिए ₹1,01,502 करोड़ से ज्यादा के Loans स्वीकृत किए जा चुके हैं।
इन परियोजनाओं के माध्यम से गांवों में Warehouses, Cold Storages, Primary Processing Centres और Custom Hiring Centres जैसे आधुनिक कृषि Infrastructure विकसित किए जा रहे हैं। इन Projects की कुल लागत ₹1.73 लाख करोड़ से अधिक बताई गई है।
इसके अलावा Rural Innovation और Agri Startups को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए AgriSURE Fund के तहत ₹245 करोड़ की Financial Commitment जारी किए जाने की जानकारी भी बैठक में दी गई। Pasted text
PMFBY में किसानों का नामांकन 23% बढ़ा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों की भागीदारी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले Kharif Season में 2.30 करोड़ किसानों के नामांकन की तुलना में चालू खरीफ में यह संख्या 23 प्रतिशत बढ़कर 2.83 करोड़ हो गई है।
बीमित क्षेत्र बढ़कर 2.97 करोड़ हेक्टेयर और बीमित राशि ₹1.45 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1.86 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गई है।
समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि Crop Insurance Claims का Settlement Transparent होना चाहिए। किसानों के दावे अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रहने चाहिए और Complaints का निर्धारित समयसीमा में समाधान किया जाना चाहिए। Pasted text
Soil Health और Micro-Irrigation पर भी फोकस
Soil Health की समीक्षा में बताया गया कि अब तक 16 लाख से अधिक Soil Health Cards Generate किए जा चुके हैं। वहीं PM-SHRI Schools में 1,140 Mini Testing Labs स्थापित हो चुकी हैं।
केंद्रीय मंत्री ने Soil Testing और Balanced Fertilizer Use को लेकर किसानों में बढ़ती जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया। ‘खेत बचाओ अभियान’ को भी Soil Health के मुद्दे से जोड़ने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा Per Drop More Crop Micro-Irrigation Scheme के तहत ₹1,504.63 करोड़ के उपयोग से 4.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को Micro-Irrigation से जोड़े जाने की जानकारी दी गई। Pasted text
KVK, ATMA और कृषि विश्वविद्यालय अब ‘एक टीम’ के रूप में करेंगे काम
कृषि वैज्ञानिकों की Research को किसानों तक तेजी से पहुंचाने के लिए केंद्रीय मंत्री ने Extension System में बेहतर Coordination के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि Agricultural Technology Management Agency (ATMA), Krishi Vigyan Kendra (KVK) और State Agricultural Universities अलग-अलग काम करने के बजाय ‘एक टीम’ के रूप में काम करें।
इसका उद्देश्य Lab to Land की दूरी को कम करना और Scientists की Technical Advice को सीधे किसानों के खेत तक पहुंचाना है।
किसान मेलों को भी पारंपरिक प्रारूप से निकालकर अधिक Practical, Modern और Participatory बनाने पर जोर दिया गया, ताकि किसानों की वास्तविक भागीदारी बढ़े। Pasted text
मखाना से लेकर मधुमक्खी पालन तक Special Crops पर जोर
बैठक में Specific Crops और Specialized Missions की भी समीक्षा की गई। Makhana Development Mission के तहत किसानों को उपज का तीन गुना तक अधिक मूल्य मिलने की जानकारी दी गई। केंद्रीय मंत्री ने Training का विस्तार करने और उसकी गुणवत्ता को Field Level पर Cross-check करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही National Bamboo Mission, National Beekeeping and Honey Mission, Cotton Productivity Mission ‘कपास क्रांति’ तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में Organic Value Chain Development (MOVCDNER) की प्रगति में तेजी लाने पर भी जोर दिया गया। Pasted text
कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों पर होगी सीधी निगरानी
बैठक में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत 74 Output Indicators पर आधारित District Ranking की भी समीक्षा की गई।
देश का Overall Average Score अप्रैल के 18.85 से बढ़कर अगस्त में 46.89 पहुंचने की जानकारी दी गई। हालांकि लगातार निचले स्तर पर रहने वाले जिलों के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को विशेष निगरानी के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जिन जिलों में योजनाओं के Implementation में ढिलाई है, वहां स्थिति स्वीकार्य नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों के साथ सीधे संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान किया जाएगा। Pasted text
अब कागजी रिपोर्ट नहीं, Field Verification पर जोर
मासिक समीक्षा बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि योजनाओं की सफलता का आकलन केवल Reports और आंकड़ों के आधार पर नहीं किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं Field Visits करने और योजनाओं के Ground Impact की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
मखाना Training, Natural Farming Models, Soil Health Cards और Farmer Melas के वास्तविक प्रभाव का Cross-Check करने पर जोर दिया गया। साथ ही लगातार कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों के जिला प्रशासन और State Agriculture Departments के साथ नियमित Follow-up करने के निर्देश दिए गए हैं। Pasted text
कृषि योजनाओं की हर महीने होगी समीक्षा
कृषि मंत्रालय की इस पहली समग्र Monthly Review Meeting से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कृषि योजनाओं की Monitoring को अधिक नियमित और Result-oriented बनाया जाएगा।
Farmer ID, Digital Crop Survey, Natural Farming, Pulses and Oilseeds, FPO, Crop Insurance, Soil Health, Irrigation, Infrastructure और Agricultural Research जैसे क्षेत्रों में उपलब्धियों के साथ-साथ उन क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां राज्यों या जिलों की Performance अपेक्षाकृत धीमी है।
कुल मिलाकर, बैठक में कृषि क्षेत्र के लिए Digital Transformation, Farmer-Centric Delivery, Sustainable Agriculture, Crop Diversification, Infrastructure Development और Technology Transfer को प्रमुख आधार के रूप में सामने रखा गया। ‘खेत बचाओ अभियान’ से लेकर 10.77 करोड़ Farmer IDs और 27.32 लाख Natural Farming Farmers तक के आंकड़े कृषि क्षेत्र में चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों के विस्तार को दर्शाते हैं।
अब सरकार का अगला फोकस इन उपलब्धियों को Ground-Level Impact में बदलने पर है, ताकि योजनाओं का लाभ केवल सरकारी दस्तावेजों में दर्ज न रहे, बल्कि किसानों की आय, उत्पादन, संसाधन प्रबंधन और कृषि से जुड़े अवसरों में वास्तविक बदलाव के रूप में दिखाई दे।
