साइलेंट वैली से समुद्र तट तक स्वच्छता का संदेश, ICAR-CMFRI ने लोगों को किया जागरूक

From Silent Valley to the beach, the message of cleanliness

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स्वच्छ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए केवल सरकारी संस्थानों की पहल पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के तहत आईसीएआर-केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CMFRI) ने केरल से लेकर तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों तक विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया।

अभियान के दौरान वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों, शोधार्थियों, स्थानीय समुदायों और विद्यार्थियों को स्वच्छता तथा पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ा गया। गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को साफ-सफाई के साथ-साथ कचरा प्रबंधन, कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करना रहा।

ICAR की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, साइलेंट वैली नेशनल पार्क, केरल में वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और शोधार्थियों ने पार्क में आने वाले लोगों के साथ संवाद कर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। वहीं थूथुकुडी, तमिलनाडु में तटीय सफाई अभियान आयोजित किया गया, जिसमें ICAR-CMFRI के साथ स्थानीय समुदायों और नगर निगम की भागीदारी रही।

साइलेंट वैली में पर्यटकों को किया जागरूक

केरल स्थित साइलेंट वैली नेशनल पार्क देश के महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में साफ-सफाई और जिम्मेदार पर्यटन की विशेष भूमिका होती है। स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत यहां लोगों को प्राकृतिक क्षेत्रों में कचरा नहीं फैलाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक किया गया।

ICAR-CMFRI से जुड़े वैज्ञानिकों और अन्य प्रतिभागियों ने पार्क में आने वाले पर्यटकों से संवाद किया। उन्हें बताया गया कि प्राकृतिक क्षेत्रों में फेंका गया प्लास्टिक, खाद्य पैकेजिंग और अन्य कचरा वन्यजीवों तथा पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

जागरूकता गतिविधियों के दौरान कचरा न फैलाने, कचरे को अलग-अलग रखने, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने और प्राकृतिक क्षेत्रों में जिम्मेदार व्यवहार अपनाने पर जोर दिया गया।

इस पहल का उद्देश्य केवल एक दिन की सफाई तक सीमित न रहकर लोगों के व्यवहार में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देना रहा।

तटीय क्षेत्रों में स्वच्छता पर जोर

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का महत्व समुद्री एवं तटीय क्षेत्रों में और भी बढ़ जाता है। समुद्र में पहुंचने वाला प्लास्टिक और अन्य ठोस कचरा समुद्री जीवों, तटीय जैव विविधता और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चुनौती बन सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु के थूथुकुडी (Thoothukkudi) में तटीय सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान में ICAR-CMFRI, स्थानीय समुदायों और नगर निगम की भागीदारी रही।

सफाई अभियान के माध्यम से लोगों को साफ और स्वस्थ तटीय क्षेत्रों के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही यह संदेश दिया गया कि समुद्र और समुद्र तटों की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्थानीय नागरिकों, मछुआरा समुदायों, पर्यटकों और अन्य हितधारकों की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

कचरा पृथक्करण और पुनर्चक्रण का संदेश

अभियान के दौरान केवल कचरा उठाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि Waste Segregation और Recycling जैसे विषयों पर भी लोगों को जागरूक किया गया।

कचरे को उसके प्रकार के अनुसार अलग-अलग करना प्रभावी कचरा प्रबंधन की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इससे पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को अलग करने और उसके उचित निपटान में सहायता मिल सकती है।

विशेष रूप से प्लास्टिक कचरे को खुले स्थानों, नदियों, नालों और समुद्र तटों पर जाने से रोकना पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। लोगों को दैनिक जीवन में जिम्मेदार कचरा प्रबंधन अपनाने का संदेश दिया गया।

स्कूली बच्चों को भी अभियान से जोड़ा

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश बच्चों तक पहुंचाने के लिए स्कूली विद्यार्थियों के लिए जागरूकता ड्राइंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया।

चित्रकला जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार जैसे विषयों से जोड़ने का प्रयास किया गया। बच्चों के माध्यम से पर्यावरणीय संदेश परिवारों और समुदायों तक भी पहुंच सकता है।

ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों में प्रकृति और सार्वजनिक स्थानों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सहायक हो सकती हैं।

स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण पर फोकस

स्वच्छता को अक्सर केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन पर्यावरणीय दृष्टि से इसका दायरा काफी व्यापक है। प्राकृतिक क्षेत्रों में कचरा कम करना, प्लास्टिक के उपयोग और निपटान को लेकर जिम्मेदार व्यवहार अपनाना, कचरे को अलग करना और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना भी स्वच्छता का हिस्सा है।

ICAR-CMFRI की गतिविधियों में इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया। साइलेंट वैली जैसे संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्र से लेकर समुद्र तट तक अभियान के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं।

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा जरूरी

भारत की लंबी समुद्री तटरेखा देश के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समुद्र और तटीय क्षेत्र मछली पालन, पर्यटन, परिवहन और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़े हुए हैं।

समुद्री प्रदूषण और तटीय कचरा इन संसाधनों के लिए चुनौती बन सकता है। प्लास्टिक और अन्य कचरे के समुद्र में पहुंचने से समुद्री जीवों और उनके आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

ऐसे में तटीय सफाई अभियानों के साथ-साथ लोगों में दीर्घकालिक जागरूकता पैदा करना महत्वपूर्ण है। थूथुकुडी में आयोजित अभियान इसी सामुदायिक भागीदारी की दिशा में एक पहल रहा।

वैज्ञानिक संस्थान की सामाजिक भूमिका

ICAR के अनुसंधान संस्थान मुख्य रूप से कृषि, मत्स्य और संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं तकनीकी विकास के लिए काम करते हैं। इसके साथ ही वैज्ञानिक संस्थानों की सामाजिक और जन-जागरूकता गतिविधियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ICAR-CMFRI द्वारा स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत आयोजित गतिविधियों में वैज्ञानिकों और संस्थान से जुड़े अन्य लोगों ने सीधे समुदायों के साथ संवाद किया। इससे वैज्ञानिक संस्थान और समाज के बीच संपर्क मजबूत करने का अवसर भी मिला।

पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर वैज्ञानिक जानकारी को स्थानीय समुदायों तक सरल तरीके से पहुंचाना जागरूकता बढ़ाने में उपयोगी हो सकता है।

‘स्वच्छता में सहभाग’ का संदेश

अभियान का केंद्रीय संदेश था कि स्वच्छता एक साझा जिम्मेदारी है। “Swachhta Mein Sahbhag, Swachh Bharat, Viksit Bharat” के संदेश के साथ लोगों को स्वच्छता गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।

इस संदेश के तहत व्यक्तिगत स्वच्छता से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्थानों, प्राकृतिक क्षेत्रों, समुद्र तटों और पारिस्थितिकी तंत्र की स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखने पर जोर दिया गया।

साइलेंट वैली में पर्यटकों के साथ संवाद, थूथुकुडी में तटीय सफाई और स्कूली बच्चों के लिए ड्राइंग प्रतियोगिता जैसी गतिविधियों ने अभियान को अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाने का काम किया।

समुदाय की भागीदारी से ही स्थायी बदलाव

स्वच्छता अभियान का प्रभाव तब अधिक स्थायी हो सकता है जब स्थानीय लोग स्वयं उसमें भागीदार बनें। केवल सफाई अभियान चलाने से कचरे की समस्या स्थायी रूप से खत्म नहीं होती। इसके लिए लोगों के व्यवहार में बदलाव और कचरे के उचित प्रबंधन की व्यवस्था दोनों जरूरी हैं।

तटीय क्षेत्रों में स्थानीय समुदाय, मछुआरे, नगर निकाय, पर्यटक, विद्यार्थी और संस्थान मिलकर काम करें तो समुद्र तटों को साफ रखने के प्रयास अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

इसी तरह प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों द्वारा जिम्मेदार व्यवहार अपनाना संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र

ICAR-CMFRI की स्वच्छता ही सेवा 2026 के तहत आयोजित गतिविधियों ने स्वच्छता को पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ने का संदेश दिया। केरल के साइलेंट वैली नेशनल पार्क में पर्यटकों को जागरूक करने से लेकर तमिलनाडु के थूथुकुडी में तटीय सफाई अभियान और स्कूली बच्चों को जागरूकता गतिविधियों से जोड़ने तक, अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों में सामुदायिक भागीदारी पर जोर रहा।

स्वच्छ प्राकृतिक क्षेत्र केवल देखने में बेहतर नहीं होते, बल्कि वे जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए भी आवश्यक हैं। इसी तरह स्वच्छ समुद्र तट समुद्री पर्यावरण और उससे जुड़े समुदायों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इस अभियान का मूल संदेश यही रहा कि स्वच्छता केवल सफाई करने का कार्य नहीं, बल्कि प्रकृति, सार्वजनिक स्थानों और आने वाली पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी है।

 

 

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