गोबर की खाद और रासायनिक खाद साथ डालने के 8 फायदे, जानें सही तरीका

गोबर की खाद और रासायनिक खाद साथ इस्तेमाल करने से मिट्टी की उर्वरता, जल धारण क्षमता और फसल के पोषण पर क्या असर पड़ता है? जानें फायदे और सही तरीका।

खेत में गोबर की खाद और रासायनिक खाद का इस्तेमाल करता किसान

खेती की लागत बढ़ने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की चुनौती के बीच किसानों के लिए खाद का सही इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है। गेहूं, धान, मक्का और सब्जियों जैसी फसलों में अच्छी पैदावार लेने के लिए किसान अक्सर रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, गोबर की खाद का उपयोग भी लंबे समय से मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गोबर की खाद और रासायनिक खाद को एक साथ इस्तेमाल करने से फसल को अधिक फायदा मिल सकता है?

इसका जवाब है कि गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद और जरूरत के अनुसार रासायनिक उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल मिट्टी की सेहत सुधारने, पोषक तत्वों की उपलब्धता बनाए रखने और खेती की लागत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका लाभ मिट्टी की स्थिति, फसल, खाद की गुणवत्ता और इस्तेमाल की मात्रा पर निर्भर करता है।

  1. मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद

गोबर की खाद और रासायनिक खाद का काम अलग-अलग होता है। गोबर की खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करती है, जबकि रासायनिक उर्वरक पौधों को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं।

लगातार खेती करने से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का इस्तेमाल होता रहता है। यदि उनकी भरपाई नहीं की जाए, तो मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है। गोबर की सड़ी खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ जोड़ती है, जिससे मिट्टी की संरचना और पोषक तत्वों को संभालकर रखने की क्षमता में सुधार हो सकता है।

दूसरी ओर, रासायनिक उर्वरक फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। दोनों का संतुलित इस्तेमाल मिट्टी और फसल की आवश्यकताओं को एक साथ ध्यान में रखने का तरीका है।

  1. पौधों को पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद

फसलों की बढ़वार के लिए अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है। नाइट्रोजन पौधों की पत्तियों और तनों की वृद्धि में, फास्फोरस जड़ों के विकास में और पोटाश पौधों की विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रासायनिक उर्वरकों में पोषक तत्वों की मात्रा सामान्यतः निर्धारित होती है, इसलिए उचित मात्रा और समय पर इस्तेमाल करने से फसल की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है। गोबर की खाद में भी कई पोषक तत्व होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा पशु, चारे, खाद तैयार करने के तरीके और भंडारण के अनुसार बदल सकती है।

गोबर की खाद के साथ रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल करने पर मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और फसल की पोषण संबंधी जरूरत पूरी करने, दोनों पर ध्यान दिया जा सकता है। हालांकि, गोबर की खाद में मौजूद पोषक तत्वों को भी कुल उर्वरक जरूरत का आकलन करते समय ध्यान में रखना चाहिए।

  1. मिट्टी की जल धारण क्षमता में सुधार

गोबर की सड़ी खाद का एक प्रमुख लाभ मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाना है। जैविक पदार्थ मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे विशेषकर हल्की और रेतीली मिट्टी में पानी रोककर रखने की क्षमता में सुधार हो सकता है।

जहां मिट्टी की संरचना कमजोर होती है, वहां जैविक पदार्थ बढ़ाने से मिट्टी में हवा और पानी के आवागमन की स्थिति भी बेहतर हो सकती है। इससे जड़ों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में सहायता मिलती है।

हालांकि, इसका असर मिट्टी के प्रकार, जल निकासी और खाद की मात्रा पर निर्भर करता है। गोबर की खाद इस्तेमाल करने से सिंचाई की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं होती, लेकिन उचित मिट्टी प्रबंधन के साथ पानी का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है।

  1. मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की गतिविधि को बढ़ावा

स्वस्थ मिट्टी में कई प्रकार के लाभकारी सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं। ये जैविक पदार्थों के विघटन और पोषक तत्वों के चक्र में भूमिका निभाते हैं।

गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ उपलब्ध कराती है, जिससे सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। जैविक पदार्थों के विघटन से कुछ पोषक तत्व धीरे-धीरे उपलब्ध होते हैं।

रासायनिक उर्वरक फसल को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल मिट्टी की जरूरत के अनुसार होना चाहिए। जरूरत से ज्यादा उर्वरक डालने से बचना जरूरी है। गोबर की खाद और रासायनिक खाद का संतुलित प्रबंधन मिट्टी की जैविक गतिविधि और फसल पोषण, दोनों को ध्यान में रखने में मदद करता है।

  1. खेती की लागत कम करने में मिल सकती है मदद

किसानों के लिए खाद पर होने वाला खर्च खेती की कुल लागत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि खेत में पर्याप्त मात्रा में अच्छी गुणवत्ता वाली गोबर की खाद उपलब्ध है, तो उसका उचित इस्तेमाल पोषक तत्वों के प्रबंधन में मदद कर सकता है।

गोबर की खाद से मिलने वाले पोषक तत्वों को ध्यान में रखकर रासायनिक उर्वरकों की जरूरत का आकलन किया जा सकता है। इससे अनावश्यक मात्रा में रासायनिक खाद खरीदने और डालने से बचने की संभावना रहती है।

लेकिन यह समझना जरूरी है कि गोबर की खाद हर स्थिति में रासायनिक उर्वरकों का पूरा विकल्प नहीं बन सकती। इसमें पोषक तत्वों की मात्रा अपेक्षाकृत कम और परिवर्तनशील होती है। इसलिए केवल गोबर की खाद के आधार पर फसल की सभी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी होने की गारंटी नहीं है।

किसानों को मिट्टी की जांच, उपलब्ध गोबर की खाद की गुणवत्ता और फसल की जरूरत के आधार पर उर्वरक प्रबंधन करना चाहिए।

  1. फसल की बढ़वार और उत्पादन में मदद

फसल की अच्छी बढ़वार के लिए मिट्टी में पोषक तत्वों की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है। यदि पौधों को उनकी जरूरत के अनुसार पोषण मिलता है, तो जड़ों, पत्तियों और तनों के विकास में मदद मिल सकती है।

गोबर की खाद मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में योगदान देती है, जबकि रासायनिक उर्वरक जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध करा सकते हैं। दोनों को सही मात्रा और समय पर इस्तेमाल करने से फसल की बढ़वार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में सहायता मिल सकती है।

हालांकि, उत्पादन में बढ़ोतरी निश्चित नहीं होती। इसका असर बीज की किस्म, मौसम, सिंचाई, कीट-रोग नियंत्रण, मिट्टी की स्थिति और खाद के प्रबंधन जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है।

  1. गोबर की खाद का इस्तेमाल करते समय रखें सावधानी

गोबर की खाद के फायदे लेने के लिए उसका अच्छी तरह सड़ा हुआ होना जरूरी है। ताजा गोबर सीधे खेत में डालने से कुछ परिस्थितियों में पोषक तत्वों की उपलब्धता और फसल प्रबंधन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

खाद तैयार करते समय उचित सड़ाव और भंडारण पर ध्यान दें। इससे जैविक पदार्थों के विघटन में मदद मिलती है। खाद को खुले में लंबे समय तक रखने या बारिश के पानी में बहने देने से पोषक तत्वों का नुकसान हो सकता है।

रासायनिक उर्वरकों की मात्रा भी कृषि विभाग की अनुशंसा और मिट्टी की जांच के आधार पर तय करें। गोबर की खाद के साथ डीएपी, यूरिया या अन्य उर्वरकों की मनमानी मात्रा इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

  1. गेहूं और धान जैसी फसलों में कैसे करें इस्तेमाल?

गेहूं की बुवाई से पहले खेत की तैयारी के दौरान अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद मिट्टी में मिलाई जा सकती है। इसके बाद मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

धान की खेती में भी खेत की तैयारी के समय गोबर की खाद का उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत फसल की अवस्था, मिट्टी और खेती की पद्धति के अनुसार तय करनी चाहिए।

सब्जियों और दूसरी फसलों में भी जैविक खाद तथा रासायनिक उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है। लेकिन सभी फसलों के लिए खाद की एक जैसी मात्रा निर्धारित नहीं की जा सकती। किसानों को स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग की सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

गोबर की खाद और रासायनिक खाद को साथ इस्तेमाल करने का उद्देश्य केवल पैदावार बढ़ाना नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत और फसल के पोषण के बीच संतुलन बनाना भी है। गोबर की सड़ी खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने, उसकी संरचना सुधारने और सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है। वहीं, रासायनिक उर्वरक फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं।

किसानों को गोबर की खाद को रासायनिक उर्वरकों का पूर्ण विकल्प मानने के बजाय दोनों के उचित प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। मिट्टी की जांच, खाद की गुणवत्ता और फसल की जरूरत के आधार पर इस्तेमाल करने से अनावश्यक खर्च कम करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

बेहतर खेती का तरीका यही है कि मिट्टी को जैविक पदार्थ भी मिले और फसल को जरूरत के अनुसार संतुलित पोषण भी।

 

Exit mobile version