यूपी में फसलों को बचाने के लिए सरकार अलर्ट: नहरों और पंप कैनालों से किसानों तक पहुंचेगा पानी, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दिए सख्त निर्देश

Government alert to save crops in UP: Water will reach farmers through canals and pump canals.

किसानों तक समय पर पहुंचे पानी

किसानों तक समय पर पहुंचे पानी

उत्तर प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार और कई जिलों में सामान्य से कम वर्षा को देखते हुए राज्य सरकार ने खरीफ फसलों को सुरक्षित रखने के लिए सिंचाई व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में वर्षा की कमी है, वहां नहरों, पंप कैनालों तथा अन्य उपलब्ध सिंचाई स्रोतों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों की फसलें सूखे की स्थिति से प्रभावित न हों।

विधानसभा स्थित समिति कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री ने खरीफ फसलों की प्रगति, वर्षा की स्थिति और सिंचाई व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की मेहनत को मौसम की मार से बचाने के लिए सभी विभागों को समन्वित तरीके से काम करना होगा।

कम वर्षा वाले जिलों पर विशेष फोकस

बैठक में कृषि मंत्री ने उन जिलों की विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए, जहां अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी स्थिति में केवल बारिश पर निर्भर रहने के बजाय उपलब्ध सभी सिंचाई संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि नहरों का संचालन बिना किसी बाधा के लगातार जारी रखा जाए और जहां आवश्यक हो, वहां पंप कैनालों के माध्यम से भी खेतों तक पानी पहुंचाया जाए। इसके अलावा ट्यूबवेल, लिफ्ट सिंचाई और अन्य स्थानीय जल स्रोतों का भी समुचित उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

किसानों तक समय पर पहुंचे पानी

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि खरीफ सीजन में धान, मक्का, दलहन, तिलहन और अन्य फसलों के लिए शुरुआती चरण में पर्याप्त नमी अत्यंत आवश्यक होती है। यदि समय पर सिंचाई उपलब्ध नहीं होती, तो फसल की वृद्धि प्रभावित हो सकती है और उत्पादन में कमी आने की आशंका रहती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सिंचाई विभाग को निर्देश दिए कि नहरों में पानी की उपलब्धता बनाए रखी जाए और अंतिम छोर तक किसानों को पानी पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सिंचाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मौसम के अनुसार बनेगी कार्ययोजना

बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों ने जानकारी दी कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। हालांकि 17 से 18 जुलाई के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून के दोबारा सक्रिय होने के संकेत मिले हैं।

इस पर कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार पहले से कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सिंचाई व्यवस्था सक्रिय की जा सके। उन्होंने कहा कि मौसम की बदलती परिस्थितियों के अनुसार कृषि विभाग और सिंचाई विभाग लगातार समन्वय बनाए रखें।

किसानों तक समय पर पहुंचे मौसम की जानकारी

सूर्य प्रताप शाही ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौसम संबंधी हर महत्वपूर्ण अपडेट तत्काल जिला प्रशासन और कृषि विभाग तक पहुंचाया जाए। इसके साथ ही किसानों को भी समय-समय पर मौसम और सिंचाई संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपनी फसलों का बेहतर प्रबंधन कर सकें।

उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखना चाहिए। मोबाइल संदेश, सोशल मीडिया, किसान हेल्पलाइन और कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों तक आवश्यक जानकारी पहुंचाई जाए।

खरीफ फसलों को बचाने पर सरकार का जोर

उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, तिल और अन्य फसलों की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। इन फसलों की बुआई के बाद शुरुआती चरण में पर्याप्त वर्षा और सिंचाई अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

यदि समय पर पानी उपलब्ध नहीं होता, तो पौधों की वृद्धि प्रभावित होने के साथ-साथ उत्पादन में भी कमी आ सकती है। इसी कारण सरकार ने कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

विभागों के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश

कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग, सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जहां भी पानी की आवश्यकता हो, वहां तुरंत कार्रवाई की जाए और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न होने दी जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी नहर या पंप कैनाल में तकनीकी समस्या हो, तो उसका तत्काल समाधान किया जाए ताकि सिंचाई व्यवस्था प्रभावित न हो।

जल प्रबंधन पर भी रहेगा विशेष ध्यान

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और अनियमित वर्षा की स्थिति में जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक हो गया है। नहरों, पंप कैनालों और अन्य सिंचाई स्रोतों का प्रभावी उपयोग करके कम वर्षा की स्थिति में भी फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

कृषि विशेषज्ञ किसानों को भी सलाह दे रहे हैं कि वे खेतों में नमी संरक्षण की तकनीकों को अपनाएं, अनावश्यक सिंचाई से बचें और उपलब्ध जल का संतुलित उपयोग करें।

किसानों के लिए राहत भरा फैसला

राज्य सरकार के इस निर्णय से उन किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके क्षेत्रों में अब तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। समय पर सिंचाई उपलब्ध होने से धान, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी खरीफ फसलों को नुकसान से बचाया जा सकेगा और उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में मानसून सामान्य हो जाता है और सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावी बनी रहती है, तो राज्य में खरीफ उत्पादन पर अधिक नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

कृषि उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में खरीफ फसलों की सुरक्षा राज्य की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार द्वारा समय रहते सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और मौसम आधारित कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि विभाग, सिंचाई विभाग और मौसम विभाग के बीच बेहतर समन्वय बना रहता है तथा किसानों तक समय पर पानी और मौसम संबंधी सलाह पहुंचती है, तो कम वर्षा की स्थिति में भी फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे किसानों की लागत सुरक्षित रहेगी, उत्पादन में गिरावट कम होगी और प्रदेश के कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

 

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