उर्वरक गुणवत्ता परीक्षण में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार की सख्त व्यवस्था, तीन-स्तरीय जांच से तय होगी अंतिम रिपोर्ट

Government tightens regulations to enhance transparency in fertilizer quality testing

'वन नेशन, वन फर्टिलाइज़र'

किसानों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण उर्वरक

किसानों तक गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों (Fertilizers) की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार में नकली या घटिया उर्वरकों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order – FCO), 1985 के तहत गुणवत्ता परीक्षण (Fertilizer Quality Testing) की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं वैज्ञानिक बनाया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब उर्वरकों के नमूनों का Three-Tier Testing System लागू किया गया है, जिससे परीक्षण रिपोर्टों में किसी प्रकार की विसंगति होने पर निष्पक्ष और अंतिम निर्णय सुनिश्चित किया जा सके।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रथम और द्वितीय परीक्षण की रिपोर्ट में अंतर पाया जाता है, तो तीसरे स्तर का विश्लेषण कराया जाएगा और उसकी रिपोर्ट को अंतिम माना जाएगा। यह व्यवस्था किसानों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ उर्वरक निर्माताओं, विक्रेताओं और विपणन एजेंसियों के लिए भी पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करती है।

तीन नमूनों के आधार पर होगी गुणवत्ता जांच

13 दिसंबर 2024 से संशोधित FCO, 1985 के तहत उर्वरक निरीक्षक (Fertilizer Inspector) किसी भी उर्वरक का नमूना लेते समय तीन अलग-अलग नमूने एकत्र करते हैं।

इनमें से—

सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया गुणवत्ता परीक्षण को अधिक विश्वसनीय और विवाद रहित बनाने के उद्देश्य से अपनाई गई है।

अमानक रिपोर्ट आने पर मिलेगा दोबारा परीक्षण का अवसर

यदि किसी उर्वरक का पहला परीक्षण उसे Non-Standard Fertilizer घोषित करता है, तो संबंधित निर्माता, विक्रेता, आयातक या विपणन एजेंसी को रिपोर्ट मिलने के 15 दिनों के भीतर निर्धारित शुल्क के साथ पुनः परीक्षण (Re-Analysis) के लिए आवेदन करना होगा।

आवेदन के बाद राज्य सरकार का नामित प्राधिकारी दो नमूनों—एक संबंधित पक्ष द्वारा प्रस्तुत नमूना और दूसरा अपने पास सुरक्षित नमूना—को National Testing House (NTH) के कोडिंग सेंटर, गाजियाबाद भेजेगा।

इसके बाद इन नमूनों का परीक्षण NTH की कोलकाता, मुंबई, चेन्नई, जयपुर या गाजियाबाद स्थित किसी भी प्रयोगशाला में किया जाएगा।

कब होगा तीसरा परीक्षण?

सरकार ने बताया कि यदि प्रथम और द्वितीय परीक्षण रिपोर्ट में अलग-अलग गुणवत्ता संबंधी मापदंडों पर विसंगति पाई जाती है, तो राज्य सरकार का नामित प्राधिकारी अपने पास सुरक्षित तीसरे नमूने को स्वतः Central Fertilizer Quality Control and Training Institute (CFQCTI), फरीदाबाद भेजेगा।

इस स्थिति में CFQCTI द्वारा जारी रिपोर्ट को अंतिम और मान्य माना जाएगा।

हालांकि यदि प्रथम और द्वितीय परीक्षण दोनों में किसी समान गुणवत्ता मापदंड पर उर्वरक अमानक पाया जाता है, तो तीसरे परीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी और दूसरी रिपोर्ट ही अंतिम मानी जाएगी।

इसी प्रकार यदि संबंधित पक्ष निर्धारित 15 दिनों के भीतर पुनः परीक्षण के लिए आवेदन नहीं करता, तो प्रथम परीक्षण की रिपोर्ट स्वतः अंतिम मानी जाएगी।

समयबद्ध प्रक्रिया होगी अनिवार्य

सरकार ने उर्वरक गुणवत्ता परीक्षण को समयबद्ध बनाने के लिए स्पष्ट समय-सीमा भी निर्धारित की है।

संशोधित प्रावधानों के अनुसार—

सरकार का कहना है कि तय समय सीमा से परीक्षण प्रक्रिया में अनावश्यक देरी समाप्त होगी और विवादों का शीघ्र निपटारा संभव होगा।

NTH में हजारों नमूनों की हुई जांच

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में National Testing House (NTH) को कुल 3,906 नमूने प्राप्त हुए।

इनमें

वहीं 2026-27 (जून 2026 तक) NTH को 578 नमूने प्राप्त हुए, जिनमें—

घोषित किए गए।

CFQCTI में भी हुई अंतिम जांच

जहां प्रथम और द्वितीय परीक्षण रिपोर्टों में अलग-अलग मापदंडों पर अंतर पाया गया, वहां नमूनों को Central Fertilizer Quality Control and Training Institute (CFQCTI), फरीदाबाद भेजा गया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार—

2025-26 में

जबकि 2026-27 (जून 2026 तक)

पाए गए।

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से उर्वरकों की प्रभावी निगरानी की जा रही है।

किसानों को मिलेगा गुणवत्तापूर्ण उर्वरक

सरकार का मानना है कि संशोधित Fertilizer Quality Testing System किसानों तक केवल मानक गुणवत्ता वाले उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। साथ ही यह व्यवस्था ईमानदार निर्माताओं और विक्रेताओं को भी निष्पक्ष अवसर प्रदान करेगी।

तीन-स्तरीय परीक्षण, निर्धारित समय-सीमा, वैज्ञानिक विश्लेषण और राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं की भागीदारी से उर्वरक गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनेगी। इससे नकली और घटिया उर्वरकों पर प्रभावी नियंत्रण होगा तथा किसानों का विश्वास भी मजबूत होगा, जो देश में टिकाऊ और उत्पादक कृषि व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

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