तिल भारत की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है। इसका उपयोग खाद्य तेल, मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और दूसरे खाद्य पदार्थों में किया जाता है। बाजार में तिल की गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग कीमत मिलती है। ऐसे में अधिक उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता वाली किस्म किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकती है।
कृषि वैज्ञानिकों के प्रकाशित शोध में GT-7 की औसत उपज 957 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और तेल की मात्रा 49.06 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि, यह शोध परीक्षणों का परिणाम है। किसान के खेत में वास्तविक उत्पादन मिट्टी, मौसम और फसल प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
क्या है GT-7 तिल की किस्म?
GT-7 को बनास गौरव (Banas Gaurav) नाम से भी जाना जाता है। इसे गुजरात के सरदारकृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। इसका विकास RT-334 और GT-3 किस्मों के संकरण से हुआ था। शोध के दौरान इसे SKT-1501 के नाम से पहचाना गया।
इस किस्म का परीक्षण गुजरात के अलग-अलग स्थानों पर किया गया। वर्ष 2015 में प्रारंभिक परीक्षण के बाद 2016 से 2020 के दौरान इसके उत्पादन और दूसरे गुणों का मूल्यांकन किया गया।
GT-7 को 27 अगस्त 2021 को गुजरात की राज्य बीज उपसमिति ने स्वीकृति दी थी। इसके बाद 25 सितंबर 2023 को इसे भारत सरकार की अधिसूचना में शामिल किया गया। इसलिए इसे 2026 में विकसित हुई बिल्कुल नई किस्म बताना सही नहीं होगा। यह पहले से विकसित और अधिसूचित उन्नत किस्म है, जिसकी उपयोगिता पर वैज्ञानिक शोध प्रकाशित हो चुका है।
GT-7 Sesame Variety की प्रमुख विशेषताएं
| विशेषता | वैज्ञानिक शोध में दर्ज जानकारी |
|---|---|
| किस्म | Gujarat Til-7 |
| दूसरा नाम | बनास गौरव |
| फसल | तिल (Sesame) |
| औसत बीज उपज | 957 किलोग्राम/हेक्टेयर |
| प्रति एकड़ उपज का समतुल्य | लगभग 3.87 क्विंटल |
| तेल की मात्रा | 49.06% |
| 1,000 दानों का वजन | 3.48 ग्राम |
| प्रमुख अनुशंसित क्षेत्र | गुजरात |
स्रोत: Journal of Oilseeds Research, दिसंबर 2024 में प्रकाशित GT-7 संबंधी शोध। ये औसत परीक्षण परिणाम हैं, गारंटीकृत खेत उपज नहीं।
दूसरी किस्मों से कितनी अधिक पैदावार?
GT-7 को लेकर वैज्ञानिक परीक्षणों में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है। गुजरात में खरीफ मौसम के परीक्षणों के औसत के आधार पर इस किस्म ने कई प्रचलित किस्मों से बेहतर उत्पादन दिया।
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GT-2 की तुलना में लगभग 25.92% अधिक उपज।
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GT-3 की तुलना में लगभग 18.73% अधिक उपज।
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GT-4 की तुलना में लगभग 8.87% अधिक उपज।
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GT-6 की तुलना में लगभग 21.49% अधिक उपज।
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GT-10 की तुलना में लगभग 18.16% अधिक उपज।
ये अंतर वैज्ञानिक परीक्षणों के औसत हैं। हर जिले या खेत में समान बढ़ोतरी होना जरूरी नहीं है।
GT-7 तिल की खेती कैसे करें?
GT-7 Sesame Cultivation में किसानों को सबसे पहले अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और बुवाई के समय पर ध्यान देना चाहिए। वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर फसल की उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
1. खेत और मिट्टी का चुनाव
तिल की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली हल्की से मध्यम बनावट की मिट्टी उपयुक्त रहती है। खेत में लंबे समय तक पानी भरना फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
बुवाई से पहले खेत को भुरभुरा और समतल बनाना चाहिए। किसान मिट्टी की जांच कराकर पोषक तत्वों की कमी पहचान सकते हैं।
2. बुवाई का सही समय
गुजरात में खरीफ तिल की बुवाई सामान्यतः मानसून आने के बाद जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक की जाती है।
हालांकि, GT-7 की खेती से पहले स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से इसकी क्षेत्रीय उपयुक्तता की पुष्टि जरूरी है। नवंबर में बुवाई की योजना बनाने वाले किसान खरीफ की सिफारिश को सीधे लागू न करें।
3. बीज की मात्रा और दूरी
तिल के बीज छोटे होते हैं। सामान्य खरीफ तिल उत्पादन के लिए ICAR की सलाह में लगभग 3 से 4 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर तथा 30 से 45 सेंटीमीटर कतार दूरी का उल्लेख है। स्थानीय परिस्थितियों में बीज दर अलग हो सकती है।
GT-7 के लिए किसानों को प्रमाणित बीज के पैकेट और संबंधित विश्वविद्यालय की अनुशंसा को प्राथमिकता देनी चाहिए। बुवाई के बाद जरूरत के अनुसार पौधों की छंटाई करें, जिससे पौधों को पर्याप्त जगह मिले।
4. खाद और पोषक तत्वों का प्रबंधन
अच्छी पैदावार के लिए केवल उन्नत बीज लगाना पर्याप्त नहीं है। खेत में संतुलित पोषण भी जरूरी है।ICAR की सामान्य खरीफ तिल सलाह में मिट्टी जांच के आधार पर खाद देने पर जोर दिया गया है। किसान गोबर की अच्छी सड़ी खाद का उपयोग कर सकते हैं और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा सल्फर की जरूरत मिट्टी जांच के अनुसार पूरी कर सकते हैं।
अधिक खाद डालने से जरूरी नहीं कि उत्पादन भी बढ़े। इसलिए GT-7 Sesame Farming में किसानों को अपने जिले की कृषि विभाग की सिफारिश का पालन करना चाहिए।
5. सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
तिल को खेत में पानी का जमाव पसंद नहीं है। बारिश के मौसम में जल निकासी की व्यवस्था जरूरी है। नमी की कमी होने पर फूल और फलियां बनने की अवस्था में सिंचाई विशेष रूप से उपयोगी रहती है। बुवाई के लगभग 15 से 20 दिन बाद पहली निराई और 30 से 35 दिन के आसपास दूसरी निराई करने से खरपतवारों की प्रतिस्पर्धा कम होती है।
कितने दिनों में तैयार होती है GT-7 तिल की फसल?
GT-7 एक अपेक्षाकृत कम अवधि वाली तिल किस्म है। ICAR की प्रकाशित जानकारी के अनुसार यह सामान्यतः 88 से 94 दिनों में परिपक्व हो जाती है।
इस किस्म में अधिक शाखाएं निकलने और बड़े सफेद दाने बनने जैसे गुण पाए गए हैं। वैज्ञानिक विवरण के अनुसार यह पाउडरी मिल्ड्यू और सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोध तथा कुछ प्रमुख कीटों के प्रति प्रतिरोध प्रदर्शित करती है। इसके बावजूद नियमित फसल निरीक्षण जरूरी है।
कटाई के समय जब पत्तियां पीली पड़ने लगें और फलियां पकने लगें, तब फसल की निगरानी बढ़ा दें। ज्यादा देर से कटाई करने पर फलियां फटने और दाने झड़ने का खतरा रहता है।
GT-7 Sesame Farming से प्रति एकड़ कितना मुनाफा हो सकता है?
किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इस किस्म की खेती करने से कितनी कमाई होगी।केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए तिल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (Sesamum MSP) ₹10,346 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। पिछले सीजन के मुकाबले इसमें ₹500 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। अगर किसान को औसतन 3.87 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलता है, तो MSP के बराबर बिक्री मूल्य मिलने पर संभावित सकल आय लगभग ₹40,000 हो सकती है। अपने खेत की संभावित उपज, बिक्री भाव और लागत बदलकर कमाई का अनुमान देखें।
क्या GT-7 किसानों के लिए फायदे का सौदा है?
GT-7 Sesame Variety विशेष रूप से उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है जो गुजरात के उपयुक्त खरीफ क्षेत्रों में तिल की खेती करते हैं और बेहतर उत्पादन क्षमता वाली किस्म तलाश रहे हैं।
इस किस्म का लगभग 49 प्रतिशत तेल प्रतिशत और बड़े सफेद दाने इसकी प्रमुख खूबियां हैं। हालांकि, अच्छी गुणवत्ता होने से हर बाजार में अतिरिक्त कीमत मिलना तय नहीं है।
किसानों को बुवाई से पहले स्थानीय मंडी का भाव, बीज की उपलब्धता, सिंचाई की सुविधा और उत्पादन लागत की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
निष्कर्ष: GT-7 यानी बनास गौरव तिल की एक वैज्ञानिक रूप से परीक्षण की गई उन्नत किस्म है। कम अवधि, अच्छी उत्पादन क्षमता और अधिक तेल प्रतिशत इसे आकर्षक बनाते हैं। लेकिन अधिक मुनाफे के लिए सही बीज, उचित खेती प्रबंधन और लाभकारी बिक्री मूल्य तीनों जरूरी हैं।
