बागवानी में कीटनाशकों का सुरक्षित प्रयोग एवं सावधानियां

Published on: January 21, 2021 (23:36 IST) , by: मांगे राम सुथार

एक तरफ तो हम लोग बागवानी की फसलों में कीटों से होने वाली हानि से बचाने के लिए कीटनाशकों को काम मे लिए बिना नही रह सकते। वही दूसरी तरफ इनके उपयोग से सावधानी रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कीटनाशकों को अधिक मात्रा में प्रयोग करना या फिर गलत तरीके से इस्तेमाल करना बहुत हानिकारक हो सकता है।

कीटनाशकों का सुरक्षित प्रयोग अन्य फसलों की अपेक्षा बागवानी फसलों मे ज्यादा महत्वपूर्ण है। ज्यादातर किसान भाई सब्जी की फसलों मे कीटनाशकों का अन्धाधुन्ध प्रयोग करके अपनी आर्थिक हानि के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता तथा पर्यावरण को भी हानि पहुंचाते हैं और सब्जियों तथा फलों मे कीटनाशकों के अवषेश सुरक्षित स्तर से कई गुणा अधिक पाए जाते है जोकि मानव स्वास्थ्य, पशुओं तथा अन्य जीव-जन्तुओं के लिए बहुत हानिकारक है तथा इसके कारण मनुष्यों मे कैंसर जैसी जानलेवा बिमारियों का खतरा दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। प्रस्तुत लेख में बागवानी में कीटनाशकों का सुरक्षित प्रयोग एवं सावधानी के बारे में जानकारी दी जा रही है।

मित्र व शत्रु कीट की पहचान करें-

सबसे पहले कीट विषेशज्ञ से कीट की पहचान करवा ले कि वह मित्र कीट है या शत्रु कीट। इसके बाद पता लगाएं कि वास्तव मे फसल को कितना नुकसान हो गया है।

विभिन्न फसलों में विभिन्न शत्रु कीटों की कगार सीमा तक पहुंचने पर ही सिफारिश की गई कीटनाशकों का छिडकाव या भुरकाव करें।

किसी विशेष कीट के नियत्रंण के लिए केवल अनुमोदित कीटनाशकों का ज्ञान होना चाहिए या फिर विषेशज्ञ की राय लेना बहुत जरूरी है।

कीटनाशक की सही मात्रा, छिडकाव की सही अवस्था, सही समय तथा छिडंकाव यत्रं का पूरा ज्ञान होना चाहिए।

बागों व सब्जियों में कीटनाशक छिडंकने से पहले सभी तैयार फलों व सब्जियों को तोड़ लेना चाहिए तथा लम्बी अवधि वाली कीटनाशकों का कम से कम प्रयोग करे।

सिफारिश की गई कीटनाशकों ही काम में लें। कीटनाशकों के डिब्बों पर तिकोने आकार में हरा,नीला या पीला या लाल रगं का निशान होता है। कीटनाशक खरीदते समय लाल निशान वाली कीटनाशकों ना ले क्योंकि वे स्तनधारियों को सबसे ज्यादा नुकसान करती है। लाल रंग वालो से कम नुकसान पीले रंग वाली व उससे भी कम नुकसान नीले रंग के तिकोने निशान वाली कीटनाषी करती हैं। सबसे कम नुकसान उन कीटनाशकों से होता है जिनके डिब्बों पर हरे रंग का तिकोना निशान होता है।

कीटनाशक खरीदतें समय उनके बनने व काम लेने की अतिंम तारिख जरूर पढें ताकि पुरानी कीटनाशक से बचा जा सकें।

दवा के डिब्बों के ऊपर लेबल व साथ में प्रयोग विधि पत्रक आता है उसे भी जरूर पढ लें तथा उस पर दी गई हिदायतों का पालन करें।

एक ही कीटनाशक का बार-बार प्रयोग ना करें।

सब्जियों की फसलों में ट्रेप फसल अवश्य लगायें। बेल वाली सब्जियों मे मक्का तथा टमाटर में गैंदा की कुछ लाइन जरुर लगायें।

खराब फलों को इक्ट्ठा करके भेड-बकरियों, पशुओं को खिलाएं तथा जमीन के अन्दर गहरा दबाएं।

दो या दो से अधिक कीटनाशकों का एक साथ छिड़काव करते समय उनके परस्पर सबंधों का ज्ञान होना चाहिए।

जैविक कीटनाशकों (स्पाईनोसेड 45 एस0सी0बी0टी पाऊडर नीमयुक्त कीटनाशकों आदि) का अधिक से अधिक प्रयोग करें।

कीटनाशकों के साथ चिपचिपे पदार्थ जैसे सैलवेट, ट्रीटान, टीपोल आदि का जरुर उपयोग करें।

पर्यावरण अनुकूल कीट नियन्त्रण उपायों (लाईट ट्रेप, फेरोमेन ट्रेप, चिपचिपे ट्रेप आदि) का भी प्रयोग करना ना भूलें।

अच्छी गुणवता वाली नोजल का प्रयोग करें। खरपतवार नियन्त्रण हेतू फ्लेट फैन, कीड़ो के नियन्त्रण हेतू फ्लड़ जैट व कट नोजल तथा रोगों के नियन्त्रण हेतु होलो नोजल का प्रयोग करना उचित पाया गया है।

कीटनाशक छिड़काव करते समय एप्रैन, चश्मा तथा दस्तानों का प्रयोग करें।

कीटनाशक छिड़काव करते समय धुम्रपान न करें तथा हवा की दिशा का ध्यान रखें। जिस दिशा में हवा जा रही हो उसी दिशा में छिड़काव शुरु करें।

कीटनाशक के खाली ड़िब्बों को दूसरे काम मे ना लें। उसे इक्ट्ठा करें और तोड़ कर करीब 2 फीट गहरा मिट्टी में दबा दें। कागज व प्लास्टिक के डिब्बो को जलाएं तो धुएं के पास खड़े ना हो।

कीटनाशकों के छिड़कने के बाद कम से कम 6 घंटे तक बरसात ना हो तो ठीक है वरना दुबारा से दवा छिड़कनी पड़ेगी।

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