इस आयोजन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब चर्चा केवल तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं है। कंपनियां ऐसे नेटवर्क तैयार करने पर काम कर रही हैं, जो ट्रैफिक की स्थिति समझ सकें, मशीनों के बीच बेहतर तालमेल बना सकें और जरूरत के अनुसार अपनी क्षमता बदल सकें।इस बार कुछ ऐसे नए अपडेट भी सामने आए हैं, जिनका असर आने वाले वर्षों में भारतीय कारोबार, खेती, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन और आम मोबाइल यूजर्स पर देखने को मिल सकता है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, इस आयोजन में 100 से ज्यादा देशों से भागीदारी और 1.5 लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद है। इसके अलावा 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स तथा 500 से अधिक कंपनियों और साझेदारों की भागीदारी का अनुमान है।
IMC 2026 क्या है और इस बार इतना खास क्यों है?
इंडिया मोबाइल कांग्रेस भारत के दूरसंचार और डिजिटल टेक्नोलॉजी क्षेत्र का प्रमुख आयोजन है। इसकी शुरुआत 2017 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में मोबाइल नेटवर्क, टेलीकॉम उपकरण और इंटरनेट सेवाओं पर ज्यादा बातचीत होती थी, लेकिन अब इसका दायरा काफी बढ़ चुका है।
इस बार कार्यक्रम का विषय Scale Without Boundaries रखा गया है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि तकनीकी सुविधाओं और नए आविष्कारों का लाभ सीमित जगहों या चुनिंदा लोगों तक नहीं रहना चाहिए। उनका विस्तार बड़े स्तर पर होना चाहिए।इस आयोजन को दूरसंचार विभाग (DoT) और सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) मिलकर आयोजित कर रहे हैं।
यहां लगभग 2,000 से अधिक टेक्नोलॉजी उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत करने, 120 से ज्यादा चर्चाओं और 700 से अधिक निवेशक बैठकों की योजना है। इसका सीधा मतलब है कि मंच पर केवल भविष्य की तकनीक की बातें नहीं होंगी, बल्कि नए उत्पादों, कारोबारी साझेदारियों और रिसर्च को व्यावहारिक रूप देने की कोशिश भी होगी।
इस आयोजन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अक्टूबर को मोबाइल उद्योग के अंतरराष्ट्रीय संगठन GSMA के बोर्ड सदस्यों से मुलाकात की। बातचीत में डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक के माध्यम से विकास जैसे विषय शामिल रहे।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक डिजिटल सेवाएं किफायती होनी चाहिए और उनका लाभ विकासशील देशों तक भी पहुंचना चाहिए। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत पर भी ध्यान दिलाया।
भारत के लिए यह चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल विकास का सही फायदा तभी मिलेगा, जब छोटे शहरों और गांवों के लोग भी इसका उपयोग कर सकेंगे।आज बड़े शहरों में तेज इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाएं आम हो चुकी हैं। लेकिन कई दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की गुणवत्ता, डिजिटल जागरूकता और तकनीकी संसाधन अब भी चुनौती हैं। ऐसे में IMC 2026 का महत्व सिर्फ नई मशीनें दिखाने तक सीमित नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि इनमें से कितनी तकनीक सामान्य नागरिक के लिए उपयोगी और किफायती बनती है।
5G के बाद अब 6G की तैयारी, कितना बदल जाएगा इंटरनेट?
भारत में 5G का विस्तार तेजी से हुआ है। 2022 में इसकी शुरुआत के बाद टेलीकॉम कंपनियों ने देश के कई हिस्सों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाया है। अब अगला बड़ा सवाल यह है कि 6G आने के बाद मोबाइल नेटवर्क कितना बदल जाएगा । IMC 2026 में 6G को लेकर रिसर्च, नई नेटवर्क तकनीकों और भविष्य में इनके संभावित इस्तेमाल पर खास ध्यान दिया जा रहा है। 6G को सिर्फ 5G से ज्यादा तेज इंटरनेट समझना सही नहीं होगा। इसका मकसद ऐसे नेटवर्क तैयार करना भी है जो AI, सेंसर, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीनों के बीच बेहतर तालमेल बना सकें।
उदाहरण के लिए, भविष्य में किसी स्मार्ट फैक्ट्री में सैकड़ों रोबोट एक ही नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे माहौल में केवल इंटरनेट स्पीड काफी नहीं होगी। नेटवर्क को तेज प्रतिक्रिया देने, स्थिर कनेक्शन बनाए रखने और मशीनों के बीच जानकारी पहुंचाने की भी जरूरत होगी। स्वास्थ्य सेवाओं, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और औद्योगिक ऑटोमेशन में भी ऐसी क्षमताएं उपयोगी साबित हो सकती हैं।
हालांकि, एक बात स्पष्ट है कि भारत में 6G की कमर्शियल मोबाइल सेवा अभी लॉन्च नहीं हुई है। फिलहाल कंपनियां और रिसर्च संस्थान भविष्य के नेटवर्क, तकनीकी मानकों और संभावित उपयोगों पर काम कर रहे हैं। एरिक्सन ने भी अपने IMC 2026 शोकेस में 2030 के दशक के लिए 6G क्षमताओं और उनके संभावित इस्तेमाल को शामिल किया है।
AI वाले मोबाइल नेटवर्क खुद पहचान सकेंगे समस्याएं
इस बार एक बड़ा विषय AI-Native Telecom Networks है। यह तकनीक टेलीकॉम कंपनियों के नेटवर्क संचालन का तरीका बदल सकती है।अभी मोबाइल नेटवर्क की निगरानी के लिए विभिन्न सॉफ्टवेयर सिस्टम, इंजीनियर और ऑटोमेशन टूल इस्तेमाल होते हैं। AI आधारित नेटवर्क इन सिस्टम को और अधिक सक्षम बनाने में मदद कर सकते हैं।
मान लीजिए किसी शहर में क्रिकेट मैच चल रहा है और एक ही जगह हजारों लोग मोबाइल इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे समय में नेटवर्क पर अचानक दबाव बढ़ सकता है।AI आधारित सिस्टम ट्रैफिक का विश्लेषण करके नेटवर्क संसाधनों को बेहतर ढंग से बांटने में मदद कर सकते हैं।इससे वीडियो कॉल की गुणवत्ता, मोबाइल इंटरनेट की स्थिरता और नेटवर्क की कार्यक्षमता बेहतर होने की संभावना है।एरिक्सन ने अपने प्रदर्शन में AI आधारित रेडियो एक्सेस नेटवर्क, स्मार्ट नेटवर्क ऑपरेशन और ऐसे सॉफ्टवेयर टूल शामिल किए हैं जो नेटवर्क की समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान में सहायता कर सकते हैं।
इसके साथ कंपनी ने 5G Advanced और नेटवर्क स्लाइसिंग जैसी तकनीकों पर भी जोर दिया है। नेटवर्क स्लाइसिंग की मदद से अलग-अलग सेवाओं की जरूरतों के अनुसार नेटवर्क संसाधनों का प्रबंधन किया जा सकता है।
IMC 2026 का बड़ा अपडेट: भारत में बने 5G एंटीना अब यूरोप तक पहुंचेंगे
भारत लंबे समय से टेलीकॉम उपकरणों के बड़े बाजारों में शामिल रहा है। अब यहां अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के लिए उपकरण बनाने की क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण हो रहा है।इससे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।हालांकि, किसी निर्यात योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतरराष्ट्रीय मांग कितनी रहती है और उत्पादन कितने बड़े स्तर तक पहुंचता है।
रोबोटिक्स में नया बदलाव, इंसानों के साथ काम करने वाले स्मार्ट रोबोट
रोबोटिक्स IMC 2026 के नए आकर्षणों में शामिल है।पहले औद्योगिक रोबोट मुख्य रूप से बार-बार किए जाने वाले तय कामों के लिए इस्तेमाल होते थे। लेकिन अब कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित कर रही हैं जो सेंसर और AI की मदद से आसपास के वातावरण को समझ सकें।इस दिशा में Collaborative Robots यानी ऐसे रोबोट महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें इंसानों और दूसरी मशीनों के साथ तालमेल बनाकर काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है।
एरिक्सन ने अपने प्रदर्शन में वेयरहाउस से जुड़े Collaborative Robotics उपयोग के उदाहरण शामिल किए हैं। इनमें रास्ते की बाधा पहचानने, नेविगेशन और मशीनों के बीच काम का बेहतर समन्वय करने जैसी क्षमताएं दिखाई जा रही हैं।
भविष्य में ऐसे रोबोट गोदामों में सामान की पहचान करने, उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और फैक्ट्री के संचालन में मददगार हो सकते हैं।इस क्षेत्र में रोजगार को लेकर सवाल उठना भी स्वाभाविक है। कुछ दोहराए जाने वाले कामों में ऑटोमेशन बढ़ सकता है, जबकि रोबोट प्रोग्रामिंग, मरम्मत, डेटा विश्लेषण और तकनीकी निगरानी जैसे कामों की मांग भी विकसित हो सकती है।इसलिए आने वाले वर्षों में रोबोटिक्स की सफलता के साथ कर्मचारियों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देना भी जरूरी होगा।
सैटेलाइट इंटरनेट: जहां मोबाइल टावर नहीं, वहां कैसे मिलेगा कनेक्शन?
भारत में पहाड़ी इलाकों, दूरदराज के गांवों और मुश्किल भौगोलिक क्षेत्रों में भरोसेमंद इंटरनेट पहुंचाना अब भी आसान नहीं है।इसी समस्या के समाधान में सैटेलाइट इंटरनेट की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।सामान्य मोबाइल नेटवर्क जमीन पर बने टावरों पर निर्भर करते हैं। दूसरी ओर सैटेलाइट आधारित सेवाएं उपग्रहों की सहायता से कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का प्रयास करती हैं। IMC 2026 में Non-Terrestrial Networks यानी NTN भी प्रमुख विषयों में शामिल हैं।
सैटेलाइट कम्युनिकेशन का उपयोग भविष्य में दूरदराज के क्षेत्रों, समुद्री परिवहन, आपदा प्रबंधन और दूसरी विशेष सेवाओं में बढ़ सकता है।लेकिन भारत में इस बाजार को लेकर एक नई नियामकीय चर्चा भी सामने आई है।8 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, स्टारलिंक, जियो और एयरटेल से संबंधित सैटेलाइट इंटरनेट योजनाओं को लेकर स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी जैसे विषय अभी महत्वपूर्ण हैं। सरकार ने मंजूरी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।
इसका मतलब है कि तकनीकी संभावनाएं बड़ी होने के बावजूद आम उपभोक्ता तक सेवा पहुंचने के लिए नियामकीय, व्यावसायिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी है।
किसानों के लिए AI, फसल की जानकारी तस्वीर और आवाज से
IMC 2026 में स्टार्टअप्स की भागीदारी भी चर्चा में है। खासतौर पर ऐसी कंपनियां ध्यान खींच रही हैं, जो टेक्नोलॉजी को रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल करना चाहती हैं।एरिक्सन इनोवेशन चैलेंज 2026 के छह विजेता स्टार्टअप्स में KissanAI भी शामिल है।यह स्टार्टअप अपने Dhenu प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों के लिए आवाज और तस्वीरों पर आधारित AI सुविधाएं विकसित कर रहा है।इस तरह की तकनीक किसानों को फसल से जुड़ी जानकारी समझने और संभावित समस्याओं के बारे में शुरुआती सहायता प्राप्त करने में उपयोगी हो सकती है।
उदाहरण के लिए, कोई किसान फसल की तस्वीर लेकर डिजिटल सिस्टम से जानकारी मांग सकता है। आगे चलकर बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी ऐसी सेवाओं में लाइव फोटो, वीडियो और तेज जानकारी साझा करने की सुविधा को बढ़ा सकती है।
हालांकि, AI से मिली सलाह को कृषि विशेषज्ञ की जांच का पूरा विकल्प नहीं समझना चाहिए। बीमारी, कीट और फसल प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में स्थानीय परिस्थितियों और विशेषज्ञ की राय की भूमिका बनी रहेगी।भारत जैसे बड़े कृषि प्रधान देश में इस प्रकार के समाधान तभी व्यापक असर डाल सकेंगे, जब वे स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध हों और छोटे किसानों के लिए किफायती बनें।
हेल्थकेयर में नई तकनीक, दूर बैठे डॉक्टर को मिल सकेगी मदद
स्वास्थ्य सेवाओं में 5G और AI के उपयोग को लेकर भी नए उदाहरण सामने आए हैं।एरिक्सन इनोवेशन चैलेंज में शामिल ScanO नाम का स्टार्टअप मुंह और दांतों से संबंधित स्वास्थ्य जांच में AI के उपयोग पर काम कर रहा है।इस मॉडल में तकनीक शुरुआती स्क्रीनिंग में सहायता कर सकती है और 5G के जरिए दूर मौजूद विशेषज्ञों से संदिग्ध मामलों की समीक्षा करवाने की संभावना विकसित की जा रही है।ऐसी सेवाएं खासतौर पर उन जगहों पर उपयोगी हो सकती हैं, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित है।
लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि AI अकेले किसी बीमारी की पक्की पहचान कर सकता है। चिकित्सा जांच और उपचार के फैसले प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञों की देखरेख में होनेचाहिए।
इसके अलावा Torchit नाम का स्टार्टअप दृष्टिबाधित लोगों के लिए सहायक तकनीक विकसित कर रहा है। इसका प्रस्तावित AI रीडर बिना लगातार इंटरनेट कनेक्शन के भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि 5G का उपयोग अपडेट और रिमोट सहायता जैसी सेवाओं में किया जा सकता है।ये उदाहरण बताते हैं कि नई कनेक्टिविटी तकनीक का महत्व केवल मनोरंजन और सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है।
रेलवे सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में 5G का इस्तेमाल
तेज इंटरनेट से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या मोबाइल नेटवर्क जरूरी सेवाओं के लिए पर्याप्त भरोसेमंद बन सकते हैं।इस आयोजन में मिशन-क्रिटिकल नेटवर्क से संबंधित तकनीकों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।एरिक्सन के प्रदर्शन में 5G KAVACH का उपयोग उदाहरण शामिल है। इसमें भारत के स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के लिए भरोसेमंद और रियल-टाइम संचार की संभावनाएं दिखाई जा रही हैं।इसके अलावा कंपनी ने ड्रोन आधारित कनेक्टिविटी का प्रदर्शन भी शामिल किया है।ऐसी व्यवस्था में विशेष उपकरणों से लैस ड्रोन अस्थायी तौर पर मोबाइल कवरेज उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।किसी प्राकृतिक आपदा के बाद अगर जमीन पर बना नेटवर्क प्रभावित हो जाए, तो ऐसी तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।हालांकि, वास्तविक परिस्थितियों में इनके इस्तेमाल के लिए सुरक्षा परीक्षण, विश्वसनीयता और नियामकीय अनुमति जरूरी होगी।
Nokia और दूसरी कंपनियों का फोकस, AI से स्मार्ट बनेगा टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर
क्या IMC 2026 के बाद मोबाइल यूजर्स को तुरंत कोई फायदा मिलेगा?
यह सवाल ज्यादातर लोगों के मन में होगा कि इतने बड़े टेक्नोलॉजी आयोजन के बाद क्या उनके मोबाइल पर इंटरनेट तुरंत तेज हो जाएगा।इसका जवाब है कि जरूरी नहीं।किसी टेक्नोलॉजी एक्सपो में नई क्षमता दिखाई जाना और उसी तकनीक का बाजार में उपलब्ध होना दो अलग बातें हैं।उदाहरण के लिए, 6G पर रिसर्च जारी है। इसका मतलब यह नहीं कि कार्यक्रम के बाद 6G सिम कार्ड या नेटवर्क मिलने लगेगा।इसी तरह स्मार्ट ग्लास, औद्योगिक रोबोट और सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़े कई उपयोग अभी विकास, परीक्षण या सीमित तैनाती के अलग-अलग चरणों में हो सकते हैं।हालांकि, कुछ सुधार मौजूदा 5G नेटवर्क के भीतर भी संभव हैं।
AI आधारित नेटवर्क मैनेजमेंट, बेहतर रेडियो उपकरण और नई सॉफ्टवेयर क्षमताओं से कंपनियां भविष्य में नेटवर्क की गुणवत्ता सुधार सकती हैं।आम उपभोक्ताओं को इन बदलावों का फायदा कब मिलेगा, यह संबंधित टेलीकॉम ऑपरेटर की निवेश योजना और तकनीकी तैनाती पर निर्भर करेगा।
भारत के लिए IMC 2026 का क्या महत्व है?
भारत दुनिया के बड़े मोबाइल और इंटरनेट बाजारों में शामिल है। लेकिन किसी देश की डिजिटल ताकत सिर्फ इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या से तय नहीं होती।महत्वपूर्ण यह भी है कि वहां कितनी तकनीक विकसित होती है, कितने उत्पाद बनते हैं और स्थानीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कितना योगदान दे पाती हैं।इस नजरिए से IMC 2026 भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।एरिक्सन की भारत निर्मित एंटीना निर्यात योजना, स्टार्टअप्स के नए प्रयोग और 6G रिसर्च से जुड़े प्रयास इस दिशा में दिलचस्प संकेत देते हैं।सरकार भी घरेलू टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग, 6G रिसर्च और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को लेकर विभिन्न पहल कर रही है।लेकिन इन योजनाओं की वास्तविक सफलता उत्पादन, निवेश, तकनीकी गुणवत्ता और सेवाओं की पहुंच जैसे ठोस नतीजों से ही मापी जा सकेगी।भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि आधुनिक तकनीक का लाभ केवल महानगरों और बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे।
छोटे कारोबार, किसान, विद्यार्थी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी डिजिटल विकास में भागीदार बन सकें, यही लंबे समय में ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
तेज इंटरनेट से आगे बढ़कर स्मार्ट टेक्नोलॉजी की तरफ भारत
IMC 2026 ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले वर्षों में दूरसंचार उद्योग की दिशा केवल मोबाइल इंटरनेट की रफ्तार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहने वाली।AI आधारित नेटवर्क, 6G रिसर्च, औद्योगिक रोबोट, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और साइबर सुरक्षा अब एक-दूसरे से जुड़े विषय बन रहे हैं।इस आयोजन से सामने आए नए प्रयोग बताते हैं कि भविष्य की तकनीक खेती से लेकर रेलवे, स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है।भारत में बने टेलीकॉम उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजनाएं भी इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।हालांकि, इन सभी तकनीकों के व्यावहारिक इस्तेमाल में समय लगेगा। लागत, सुरक्षा, भरोसेमंद नेटवर्क और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे सवालों का समाधान जरूरी रहेगा।IMC 2026 की सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि भारत अब केवल नई डिजिटल सेवाओं को अपनाने की चर्चा नहीं कर रहा, बल्कि उनके विकास, निर्माण और वैश्विक इस्तेमाल में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
