भारत की कृषि-जैव विविधता को मिलेगी नई मजबूती, आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड ने तैयार किया रोडमैप

India's agro-biodiversity will get a new boost, National Advisory Board has prepared a roadmap

विकसित भारत के लक्ष्य में निभाएगा अहम योगदान

विकसित भारत के लक्ष्य में निभाएगा अहम योगदान

भारत की कृषि, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत गठित आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन पर राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड (National Advisory Board on Management of Genetic Resources-NABMGR) ने देश की कृषि-जैव विविधता (Agricultural Biodiversity) के संरक्षण और उसके सतत उपयोग के लिए व्यापक रोडमैप तैयार किया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि भारत को Viksit Bharat के लक्ष्य तक पहुंचना है और कृषि को Climate Smart Agriculture की दिशा में आगे बढ़ाना है, तो पौधों, पशुओं, मछलियों, सूक्ष्मजीवों तथा कीटों के आनुवंशिक संसाधनों (Genetic Resources) का वैज्ञानिक और एकीकृत प्रबंधन अत्यंत आवश्यक होगा।

यह निर्णय 29 जुलाई 2026 को ICAR-National Bureau of Plant Genetic Resources (NBPGR), नई दिल्ली में आयोजित बोर्ड की पहली बैठक में लिया गया। बैठक में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, कृषि विशेषज्ञों, किसान प्रतिनिधियों और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों ने भाग लेकर भविष्य की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

कृषि जैव विविधता बनेगी विकसित भारत की मजबूत नींव

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत विश्व के सबसे समृद्ध Agricultural Biodiversity वाले देशों में शामिल है। यहां पौधों, पशुओं, मछलियों, सूक्ष्मजीवों और कीटों की हजारों पारंपरिक प्रजातियां मौजूद हैं, जो भविष्य की खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और टिकाऊ कृषि प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य, नई बीमारियों और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच इन आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण भविष्य की कृषि सुरक्षा की आधारशिला साबित होगा।

2026 में NABMGR का पुनर्गठन

National Advisory Board on Management of Genetic Resources (NABMGR) का गठन पहली बार वर्ष 2011 में किया गया था। वर्ष 2026 में ICAR ने इसका पुनर्गठन करते हुए पद्म भूषण डॉ. आर.एस. परोदा को बोर्ड का अध्यक्ष तथा DARE के सचिव एवं ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट को सह-अध्यक्ष नियुक्त किया।

पुनर्गठित बोर्ड का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर कृषि जैव विविधता से जुड़ी नीतियों का निर्माण, आनुवंशिक संसाधनों का समन्वित प्रबंधन तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरती चुनौतियों पर सरकार को रणनीतिक सलाह देना है।

विभिन्न मंत्रालयों और संस्थानों की सहभागिता

इस महत्वपूर्ण बैठक में कई प्रमुख संस्थानों और मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें शामिल थे—

विशेषज्ञों ने इसे भारत में कृषि जैव विविधता प्रबंधन की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण मंच बताया।

डॉ. आर.एस. परोदा ने बताया राष्ट्रीय संपत्ति

बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. आर.एस. परोदा ने कहा कि भारत के पौधों, पशुओं, मछलियों और अन्य जैव संसाधनों की विविधता देश की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्तियों में से एक है।

उन्होंने कहा कि इन संसाधनों का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की Food Security, Nutrition Security और Climate Resilience सुनिश्चित करने के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने सुझाव दिया कि संरक्षित Germplasm का अधिकाधिक उपयोग नई जलवायु-अनुकूल, रोग प्रतिरोधी तथा अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों और नस्लों के विकास में किया जाए।

पूर्व-प्रजनन कार्यक्रमों को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आने वाले वर्षों में Pre-Breeding Programmes को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

इसका उद्देश्य संरक्षित आनुवंशिक संसाधनों का उपयोग कर नई उन्नत फसल किस्मों, पशु नस्लों तथा मत्स्य प्रजातियों का विकास करना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कृषि अनुसंधान की गति तेज होगी और किसानों को बदलते मौसम के अनुरूप बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर

डॉ. परोदा ने कहा कि भारत को Central Asia और South-East Asia के देशों के साथ आनुवंशिक संसाधनों के आदान-प्रदान को और मजबूत करना चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से कपास, एवोकाडो, रामबूटन, मैंगोस्टीन जैसी फसलों तथा भेड़ जैसी पशु नस्लों के Germplasm Exchange को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

उनके अनुसार वैश्विक सहयोग से भारत की कृषि अनुसंधान क्षमता और मजबूत होगी।

पशु और मछली संसाधनों के लिए कानूनी ढांचे की जरूरत

बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि जिस प्रकार पौधों के लिए Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Act (PPV&FRA) लागू है, उसी प्रकार पशु एवं मत्स्य आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी उपयुक्त कानूनी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

इससे पशुपालकों, मत्स्य पालकों तथा प्रजनकों (Breeders) के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

डॉ. एम.एल. जाट ने दिया डिजिटल कृषि पर जोर

ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि आनुवंशिक संसाधनों के प्रबंधन को Digital Agriculture, Soil Science, Precision Farming तथा आधुनिक फसल सुधार कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक कृषि-जलवायु क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त फसल किस्मों की पहचान की जाए तो Climate Smart Agriculture को तेजी से बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि पुनर्गठित NABMGR विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा।

छह राष्ट्रीय ब्यूरो ने प्रस्तुत किया 2031 तक का रोडमैप

बैठक के दौरान ICAR के छह राष्ट्रीय ब्यूरो के निदेशकों ने वर्ष 2021-2026 की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी तथा 2026-2031 के लिए अपना विजन प्रस्तुत किया।

इन योजनाओं में शामिल हैं—

पारंपरिक किस्मों को मुख्यधारा में लाने की सिफारिश

बैठक में विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि पारंपरिक और कम उपयोग में आने वाली फसल किस्मों, पशु नस्लों, मछली प्रजातियों, सूक्ष्मजीवों तथा कीट संसाधनों को मुख्यधारा में लाने के लिए Inter-Institutional Programme शुरू किया जाए।

पद्मश्री किसान सुंडाराम वर्मा ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि स्थानीय जैव विविधता भविष्य की कृषि सुरक्षा का आधार है।

National Security Gene Bank पर हुई समीक्षा

बैठक में प्रस्तावित National Security Gene Bank (NSG) की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

बोर्ड ने सुझाव दिया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि वर्ष 2028-29 में ICAR के शताब्दी समारोह के दौरान इसे राष्ट्र को समर्पित किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह Gene Bank भविष्य में देश के आनुवंशिक संसाधनों की सुरक्षा का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा।

एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग पर भी हुई चर्चा

बैठक में Biological Diversity Act, 2002 के अंतर्गत Access and Benefit Sharing (ABS) व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि किसानों, शोध संस्थानों और स्थानीय समुदायों को आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों में उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

विकसित भारत के लक्ष्य में निभाएगा अहम योगदान

बैठक के अंत में बोर्ड ने स्पष्ट किया कि कृषि-जैव विविधता का संरक्षण केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की Food Security, Nutrition Security, Climate Resilience, Sustainable Agriculture और Rural Economy को मजबूत करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण निवेश है।

वैज्ञानिक सहयोग, आधुनिक अनुसंधान, संस्थागत समन्वय और नीति-आधारित निर्णयों के माध्यम से भारत अपनी आनुवंशिक संपदा का बेहतर उपयोग कर सकेगा और भविष्य की कृषि चुनौतियों का प्रभावी समाधान विकसित कर पाएगा।

National Advisory Board on Management of Genetic Resources (NABMGR) की पहली बैठक में तैयार किया गया यह रोडमैप भारत की कृषि अनुसंधान प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। ICAR, NBPGR और विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से तैयार यह रणनीति कृषि-जैव विविधता के संरक्षण, Genetic Resources Management, Climate Smart Agriculture, Germplasm Conservation और Sustainable Farming को नई दिशा देगी। इससे न केवल किसानों को भविष्य में अधिक उत्पादक और जलवायु-अनुकूल किस्में उपलब्ध होंगी, बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और Viksit Bharat के लक्ष्य को भी मजबूत आधार मिलेगा।

 

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