उपभोक्ता संरक्षण के वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता प्रभाव, अंकटाड के अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह के नौवें सत्र की करेगा अध्यक्षता

India's growing influence on the global consumer protection platform.

भारत उपभोक्ता संरक्षण पर अंकटाड के अंतरसरकारी विशेषज्ञ समूह के नौवें सत्र की अध्यक्षता करेगा

भारत उपभोक्ता संरक्षण पर अंकटाड के अंतरसरकारी विशेषज्ञ समूह के नौवें सत्र की अध्यक्षता करेगा

भारत एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों और नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता के परिणामस्वरूप, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (अंकटाड) द्वारा आयोजित उपभोक्ता संरक्षण कानून एवं नीति पर अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह (Intergovernmental Group of Experts – IGE) के नौवें सत्र की अध्यक्षता भारत करेगा। यह महत्वपूर्ण बैठक 6 से 8 जुलाई 2026 तक स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित पैलेस डेस नेशन्स में आयोजित होगी।

इस वैश्विक सम्मेलन में विभिन्न सदस्य देशों के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय संगठन, उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण, नीति विशेषज्ञ, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भाग लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य बदलते वैश्विक बाजार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सीमा-पार व्यापार के दौर में उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाना है।

भारत को मिली वैश्विक नेतृत्व की जिम्मेदारी

भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव श्रीमती निधि खरे इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। अंकटाड ने उन्हें नौवें सत्र की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया है। अध्यक्ष के रूप में वे तीन दिवसीय विचार-विमर्श का संचालन करेंगी तथा विभिन्न सदस्य देशों के बीच उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों पर सहमति बनाने और चर्चा को दिशा देने का कार्य करेंगी।

यह जिम्मेदारी इस बात का प्रमाण है कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में भारत की नीतियों, संस्थागत सुधारों और डिजिटल पहलों को वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है।

उपभोक्ता संरक्षण के लिए प्रमुख वैश्विक मंच

संयुक्त राष्ट्र उपभोक्ता संरक्षण दिशानिर्देशों (United Nations Guidelines for Consumer Protection – UNGCP) के अंतर्गत गठित अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह (IGE) उपभोक्ता संरक्षण कानून और नीति पर सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान तथा नई चुनौतियों के समाधान के लिए विश्व का प्रमुख मंच माना जाता है।

इस मंच पर सदस्य देश अपनी सफल नीतियों, कानूनों, तकनीकी नवाचारों और उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए अपनाए गए उपायों को साझा करते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर बेहतर उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था विकसित की जा सके।

संयुक्त राष्ट्र उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा सिद्धांतों का होगा शुभारंभ

इस वर्ष के सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण संयुक्त राष्ट्र उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा सिद्धांतों (United Nations Consumer Product Safety Principles) का औपचारिक शुभारंभ होगा। इन सिद्धांतों को दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वीकार किया था।

सम्मेलन के दौरान “सिद्धांत क्यों मायने रखते हैं” विषय पर एक उच्च स्तरीय अनौपचारिक चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत भी सक्रिय भागीदारी करेगा। इस चर्चा में यह बताया जाएगा कि सुरक्षित उत्पाद, प्रभावी नियामक व्यवस्था और जिम्मेदार बाजार व्यवस्था किस प्रकार उपभोक्ताओं के जीवन और विश्वास को मजबूत बनाती है।

कई महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा

तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से—

इन विषयों पर विचार-विमर्श से उपभोक्ताओं के अधिकारों को और अधिक प्रभावी ढंग से सुरक्षित करने के लिए वैश्विक स्तर पर नई दिशा तय होने की उम्मीद है।

सीमा-पार उपभोक्ता विवादों में भारत का सफल अनुभव

भारत पिछले कुछ वर्षों में उपभोक्ता संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधारों के कारण वैश्विक स्तर पर विशेष पहचान बना चुका है।

जुलाई 2025 में जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र प्रतिस्पर्धा एवं उपभोक्ता संरक्षण सम्मेलन के दौरान भारत ने सीमा-पार उपभोक्ता विवादों के समाधान का अपना अनुभव साझा किया था।

भारत ने विशेष रूप से राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline – NCH) के मुकदमे से पहले विवाद समाधान (Pre-litigation Convergence Model) की जानकारी दी थी। इस मॉडल के माध्यम से उपभोक्ता और कंपनियों के बीच विवादों का समाधान अदालत तक पहुंचे बिना ही किया जा रहा है, जिससे समय, धन और संसाधनों की बचत होती है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन बनी उपभोक्ताओं की बड़ी ताकत

भारत की राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) आज देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए भरोसेमंद मंच बन चुकी है।

पिछले 14 महीनों के दौरान हेल्पलाइन ने 36 विभिन्न क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 91.77 करोड़ रुपये से अधिक की धनवापसी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इसी अवधि में 1.47 लाख से अधिक धनवापसी संबंधी शिकायतों का समाधान अदालतों तक पहुंचे बिना ही कर दिया गया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली उपभोक्ताओं के लिए कितनी प्रभावी साबित हो रही है।

ई-जागृति प्लेटफॉर्म से डिजिटल हुआ उपभोक्ता न्याय

भारत सरकार ने उपभोक्ता विवाद समाधान को और अधिक पारदर्शी तथा सुलभ बनाने के लिए एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ई-जागृति’ विकसित किया है।

यह आधुनिक प्लेटफॉर्म उपभोक्ताओं को कई डिजिटल सुविधाएं प्रदान करता है, जिनमें—

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्लेटफॉर्म अनिवासी भारतीयों (NRI) और विदेशों में रहने वाले भारतीय उपभोक्ताओं को भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। इससे सीमा-पार उपभोक्ता विवादों का समाधान पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हुआ है।

डिजिटल युग में उपभोक्ता संरक्षण की नई चुनौतियां

ई-कॉमर्स, ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक ऑनलाइन बाजारों के विस्तार के साथ उपभोक्ता संरक्षण की चुनौतियां भी लगातार बढ़ रही हैं।

फर्जी ऑनलाइन वेबसाइटें, साइबर धोखाधड़ी, भ्रामक विज्ञापन, नकली उत्पाद, डेटा गोपनीयता और सीमा-पार डिजिटल लेनदेन जैसे विषय आज पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं। ऐसे समय में भारत की डिजिटल उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था अन्य देशों के लिए एक उपयोगी मॉडल बनकर उभरी है।

वैश्विक सहयोग को मिलेगा नया आयाम

भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन विभिन्न देशों के बीच अनुभव साझा करने, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अपनाने तथा उपभोक्ता संरक्षण कानूनों को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की डिजिटल पहल, त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली और उपभोक्ता-केंद्रित नीतियां वैश्विक स्तर पर अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।

अंकटाड के अंतर-सरकारी विशेषज्ञ समूह के नौवें सत्र की अध्यक्षता भारत के लिए केवल एक कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में उसकी बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन, एआई आधारित ई-जागृति प्लेटफॉर्म, त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली तथा सीमा-पार उपभोक्ता विवादों के समाधान में भारत के अनुभवों ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।

जिनेवा में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक उपभोक्ता संरक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। साथ ही, भारत की सक्रिय भूमिका यह संदेश देती है कि वह न केवल अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि सुरक्षित, पारदर्शी और उत्तरदायी वैश्विक उपभोक्ता बाजार के निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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