Medicinal Mushroom Farming Training: ICAR-VPKAS Almora ने 29 महिला किसानों को दिया वैज्ञानिक प्रशिक्षण, स्वरोजगार और आजीविका बढ़ाने पर जोर

Medicinal Mushroom Farming Training: ICAR-VPKAS Almora provided scientific training to 29 women farmers, emphasizing on increasing self-employment and livelihood

Medicinal Mushroom Farming Training: ICAR-VPKAS Almora ने 29 महिला किसानों को दिया वैज्ञानिक प्रशिक्षण, स्वरोजगार और आजीविका बढ़ाने पर जोर

पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में भाकृअनुप–विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-VPKAS), हवालाबाग, अल्मोड़ा ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 22 से 24 जुलाई 2026 तक “औषधीय मशरूम खेती (Medicinal Mushroom Farming)” पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। यह प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें अल्मोड़ा जिले के विभिन्न विकासखंडों से आई 29 महिला कृषकों ने भाग लिया।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM), ग्राम विकास विभाग, अल्मोड़ा के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, विशेष रूप से महिलाओं को बटन, ऑयस्टर (Pleurotus) तथा औषधीय मशरूम की वैज्ञानिक खेती, उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना था, ताकि वे इसे एक लाभकारी उद्यम के रूप में अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।

पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार का नया अवसर

पर्वतीय क्षेत्रों में सीमित कृषि भूमि और पारंपरिक खेती की चुनौतियों को देखते हुए मशरूम उत्पादन को आय बढ़ाने का प्रभावी विकल्प माना जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत में फसल उत्पादन प्रभाग के प्रमुख डॉ. बृज मोहन पांडे ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक मशरूम खेती पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार, महिला उद्यमिता और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हैं, जिससे वे कम लागत में अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों को अपने गांवों में अपनाने और अन्य किसानों तक भी पहुंचाने का आह्वान किया।

मशरूम खेती से बढ़ेगी आय और पोषण सुरक्षा

प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. गौरव वर्मा ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि मशरूम खेती केवल अतिरिक्त आय का स्रोत ही नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा और टिकाऊ कृषि का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने बताया कि मशरूम में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन, विटामिन, खनिज और औषधीय गुण पाए जाते हैं। कम जगह और सीमित संसाधनों में इसकी खेती आसानी से की जा सकती है, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने सिखाई आधुनिक तकनीकें

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

तकनीकी सत्रों में शामिल प्रमुख विषय थे—

विशेषज्ञों ने प्रत्येक तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।

मूल्य संवर्धन और विपणन पर भी दिया गया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहा। वैज्ञानिकों ने किसानों को मशरूम के Value Addition, Processing, Packaging और Marketing की आधुनिक तकनीकों की भी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि यदि किसान मशरूम का प्रसंस्करण कर उसे विभिन्न उत्पादों के रूप में बाजार में उपलब्ध कराएं, तो उन्हें अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है। साथ ही आकर्षक पैकेजिंग और बेहतर विपणन रणनीति अपनाकर स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाई जा सकती है।

कृषक-वैज्ञानिक संवाद बना आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के दौरान आयोजित कृषक-वैज्ञानिक संवाद में महिला किसानों ने खुलकर अपने अनुभव साझा किए और मशरूम उत्पादन से जुड़ी अनेक जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण की व्यावहारिक शैली की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम ने उन्हें मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का आत्मविश्वास दिया है। किसानों ने कहा कि अब वे अपने गांवों में मशरूम आधारित उद्यम शुरू करने के लिए अधिक तैयार महसूस कर रही हैं।

निदेशक ने उद्यमिता अपनाने का किया आह्वान

समापन सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने कहा कि प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब प्रतिभागी सीखी गई तकनीकों का उपयोग अपने व्यवसाय की स्थापना में करें।

उन्होंने कहा कि मशरूम आधारित उद्यम पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों, विशेष रूप से महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करें।

संस्थान देगा निरंतर तकनीकी सहयोग

कार्यक्रम में डॉ. पी.के. मिश्रा ने प्रतिभागियों को आश्वस्त किया कि संस्थान भविष्य में भी मशरूम उत्पादन से जुड़े किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सलाह उपलब्ध कराता रहेगा।

उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन अपनाते हैं, तो यह गतिविधि दीर्घकालीन और स्थायी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है।

29 महिला किसानों को मिला प्रशिक्षण प्रमाणपत्र

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन पर सभी 29 महिला प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

इस कार्यक्रम में अल्मोड़ा जिले के 10 विकासखंडों का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का सफल समन्वय डॉ. पी.के. मिश्रा, डॉ. गौरव वर्मा तथा डॉ. रमेश सिंह पाल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पी.के. मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया।

ICAR-VPKAS, अल्मोड़ा द्वारा आयोजित Medicinal Mushroom Farming Training पर्वतीय क्षेत्रों में महिला किसानों की आय बढ़ाने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और टिकाऊ कृषि आधारित उद्यम विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, व्यावहारिक प्रदर्शन, मूल्य संवर्धन और विपणन संबंधी जानकारी ने प्रतिभागियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएं और प्रशिक्षित किसान मशरूम आधारित उद्यम स्थापित करें, तो उत्तराखंड सहित अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा को नई मजबूती मिल सकती है।

 

 

 

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