विश्व पर्यावरण दिवस पर Mother Dairy की बड़ी पहल: अब मिट्टी में गल जाएगा दूध का पाउच, नहीं बढ़ेगी कीमत

Mother Dairy's big initiative on World Environment Day: Milk pouches will now dissolve in the soil, but prices won't increase.

Mother Dairy

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Mother Dairy: प्लास्टिक और पॉलिथीन से बढ़ते प्रदूषण के बीच मदर डेयरी ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर कंपनी ऐसा दूध पाउच लॉन्च करने जा रही है जो इस्तेमाल के बाद प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिलकर खत्म हो जाएगा। इस पहल को देश में अपनी तरह का पहला प्रयास बताया जा रहा है।

मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह और मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने इस नई तकनीक की जानकारी दी।

अब पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएगा दूध का पाउच

डॉ. मीनेश शाह ने बताया कि मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 40 लाख लीटर दूध की आपूर्ति करती है। इसमें 30 से 35 प्रतिशत हिस्सेदारी काऊ मिल्क की है। 5 जून से इसी काऊ मिल्क की बिक्री एक विशेष बायोडिग्रेडेबल पाउच में की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यह पाउच मिट्टी के संपर्क में आने के बाद प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाएगा। मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव (माइक्रोब्स) इसे धीरे-धीरे प्राकृतिक तत्वों में बदल देंगे। पूरी तरह खत्म होने में लगभग दो वर्ष का समय लगेगा।

दूध की कीमतों पर नहीं पड़ेगा कोई असर

मदर डेयरी ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि नए पर्यावरण-अनुकूल पाउच के कारण दूध की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। ग्राहकों को काऊ मिल्क के लिए वही कीमत चुकानी होगी जो वर्तमान में ली जा रही है।

डॉ. शाह के अनुसार, शुरुआत फिलहाल काऊ मिल्क से की जा रही है। भविष्य में भैंस के दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की पैकेजिंग में भी इस तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

एनडीडीबी की कंपनी ने विकसित की तकनीक

मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने बताया कि इस विशेष पाउच का विकास एनडीडीबी की सहयोगी कंपनी इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी लिमिटेड (IDMC) ने किया है। आईडीएमसी डेयरी उद्योग के लिए मशीनरी, उपकरण और आइसक्रीम फ्रीजर जैसे उत्पाद तैयार करती है। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक प्लास्टिक कचरे को कम करने और डेयरी उद्योग को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्लास्टिक प्रदूषण पर लगेगी रोक

विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक प्लास्टिक पाउच नालियों और सीवर सिस्टम को जाम करने के साथ-साथ मिट्टी, जल स्रोतों और पशुओं के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। भारत में प्रतिदिन लाखों प्लास्टिक दूध पाउच उपयोग के बाद कचरे में फेंक दिए जाते हैं।

मदर डेयरी की यह पहल प्लास्टिक कचरे को कम करने और पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय अभियान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

किसानों और डेयरी सेक्टर को भी मिलेगा लाभ

डेयरी क्षेत्र में टिकाऊ पैकेजिंग को बढ़ावा मिलने से दूध उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में यदि अन्य डेयरी कंपनियां भी इस मॉडल को अपनाती हैं, तो प्लास्टिक प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। विश्व पर्यावरण दिवस World Environment Day के मौके पर मदर डेयरी की यह पहल उपभोक्ताओं, किसानों और पर्यावरण तीनों के लिए एक सकारात्मक बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

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