कृषि विज्ञान केंद्र नारायणगांव और प्राइम स्कूल ऑफ ड्रोन एक्सीलेंस के बीच हुआ एमओयू, किसानों और ग्रामीण युवाओं को मिलेगा ड्रोन तकनीक का उन्नत प्रशिक्षण

MoU signed between Krishi Vigyan Kendra Narayangaon and Prime School of Drone Excellence

ही पांच दिवसीय गहन ड्रोन पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम

ही पांच दिवसीय गहन ड्रोन पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम

कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), नारायणगांव और प्राइम स्कूल ऑफ ड्रोन एक्सीलेंस के बीच ड्रोन प्रशिक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य किसानों और युवाओं को ड्रोन तकनीक से जोड़ना, कृषि कार्यों में आधुनिक समाधान उपलब्ध कराना तथा प्रशिक्षित ड्रोन पायलट तैयार करना है।

इस समझौते के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, नारायणगांव परिसर में ही पांच दिवसीय गहन ड्रोन पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को ड्रोन संचालन, रखरखाव, सुरक्षा मानकों और कृषि में ड्रोन के व्यावहारिक उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इच्छुक प्रतिभागियों को नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से मान्यता प्राप्त ड्रोन पायलट लाइसेंस प्राप्त करने में भी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि में ड्रोन तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। फसलों पर सटीक छिड़काव, पोषक तत्वों का समान वितरण, खेतों की निगरानी, रोग एवं कीटों की समय रहते पहचान तथा फसल स्वास्थ्य का आकलन जैसे कार्य अब ड्रोन के माध्यम से अधिक तेजी, सटीकता और कम लागत में संभव हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. प्रशांत शेटे, वैज्ञानिक डॉ. सुयोग खोसे, भारत तेमकर, धनेश पडवळ और डॉ. दत्तात्रय गावडे सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे। वहीं प्राइम ग्रुप की ओर से सलाम किसान के उप महाप्रबंधक उमेशकुमार जाधव, तेजस नातू, सुमित चनखोरे, चेतन बहुरूपी तथा अनुभवी ड्रोन पायलट गौरव नातू ने कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के लिए ड्रोन का लाइव प्रदर्शन भी आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने आधुनिक कृषि में ड्रोन की उपयोगिता, सुरक्षित संचालन, तकनीकी विशेषताओं और विभिन्न कृषि कार्यों में इसके प्रभावी उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। किसानों और युवाओं ने ड्रोन तकनीक के प्रदर्शन को उत्साहपूर्वक देखा तथा इससे जुड़ी विभिन्न जानकारियां प्राप्त कीं।

विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन तकनीक खेती को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और किफायती बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे न केवल समय और श्रम की बचत होती है, बल्कि रासायनिक दवाओं और उर्वरकों का संतुलित उपयोग भी सुनिश्चित होता है। परिणामस्वरूप उत्पादन लागत घटती है और किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायता मिलती है।

प्राइम ग्रुप कृषि और ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में बहुआयामी कार्य कर रहा है। समूह की इकाई सलाम किसान किसानों को आधुनिक कृषि सेवाएं और तकनीकी समाधान उपलब्ध कराती है, जबकि प्राइम एयरोस्पेस देश में “मेड इन इंडिया” ड्रोन के निर्माण में सक्रिय है। वहीं प्राइम स्कूल ऑफ ड्रोन एक्सीलेंस ग्रामीण युवाओं को डीजीसीए मान्यता प्राप्त ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें नई तकनीक और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहा है।

कृषि विज्ञान केंद्र और प्राइम स्कूल के बीच हुआ यह समझौता क्षेत्र में कृषि यंत्रीकरण और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल से नारायणगांव और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ स्थानीय स्तर पर मिलेगा, वहीं ग्रामीण युवाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर हासिल करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की कृषि में ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ने वाली है। ऐसे में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे और ग्रामीण युवाओं को उभरते हुए एग्री-टेक सेक्टर में रोजगार के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करेंगे। कृषि विज्ञान केंद्र और प्राइम स्कूल ऑफ ड्रोन एक्सीलेंस की यह साझेदारी न केवल कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव को गति देगी, बल्कि आत्मनिर्भर और तकनीक-सक्षम ग्रामीण भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

 

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