MSP Legal Guarantee: किसानों का भोपाल कूच, 19 किसान संगठनों ने सरकार को दी आर-पार की चेतावनी”

MSP Legal Guarantee: Farmers march to Bhopal; 19 farmer organizations issue a 'do-or-die' warning to the government.

MSP Legal Guarantee

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MSP Legal Guarantee: केंद्र और राज्य सरकारों की कृषि नीतियों को लेकर किसानों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की 100 प्रतिशत सरकारी खरीद और MSP को कानूनी गारंटी देने की मांग को लेकर देश के विभिन्न किसान संगठनों ने बड़ा आंदोलन शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में 19 किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से ‘आर-पार’ आंदोलन का ऐलान करते हुए भोपाल कूच शुरू कर दिया है।

किसानों का कहना है कि जब तक सरकार MSP पर फसलों की पूरी खरीद सुनिश्चित नहीं करती और इसे कानून का दर्जा नहीं देती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। किसानों का आरोप है कि सरकार MSP घोषित तो करती है, लेकिन अधिकांश किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

क्यों हो रहा है भोपाल कूच?

किसानों का कहना है कि MSP केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है। देश में गेहूं और धान जैसी कुछ चुनिंदा फसलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश फसलों की सरकारी खरीद नगण्य है। दलहन, तिलहन, मोटे अनाज और अन्य नकदी फसलों के उत्पादकों को MSP का लाभ नहीं मिल पा रहा है।भोपाल कूच के पीछे किसानों की प्रमुख मांगें हैं-

किसान संगठनों का कहना है कि अगर सरकार किसानों को MSP की गारंटी नहीं दे सकती, तो MSP घोषित करने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

MSP क्या है और किसानों के लिए क्यों जरूरी है?

न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदने की घोषणा करती है। इसका उद्देश्य किसानों को बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना होता है।

लेकिन हकीकत यह है कि MSP घोषित होने के बावजूद देश के अधिकांश किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। कई रिपोर्टों में यह बात सामने आ चुकी है कि केवल सीमित संख्या में किसानों की फसल ही सरकारी एजेंसियां खरीदती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MSP पर व्यापक खरीद व्यवस्था लागू हो जाए, तो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में स्थिरता भी आएगी। हालांकि इसके लिए सरकार को बड़े स्तर पर खरीद, भंडारण और वितरण व्यवस्था तैयार करनी होगी।

किसानों का आरोप- MSP का लाभ केवल कुछ राज्यों तक सीमित

किसान नेताओं का कहना है कि MSP व्यवस्था का सबसे अधिक लाभ कुछ राज्यों के किसानों को मिलता है। वहीं देश के कई राज्यों में किसान अपनी उपज MSP से काफी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं।किसानों का दावा है कि-

इन्हीं समस्याओं को लेकर किसानों ने अब भोपाल में बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने का फैसला किया है।

19 किसान संगठनों ने बनाया संयुक्त मोर्चा

भोपाल कूच को लेकर किसान संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाया है, जिसमें प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के कुल 19 संगठन शामिल हैं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं बल्कि पूरे किसान समुदाय की आवाज है।संयुक्त मोर्चा ने साफ कहा है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। किसान नेताओं ने दावा किया है कि इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छोटे, सीमांत और मध्यम वर्गीय किसान शामिल हो रहे हैं।

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती

MSP पर 100 प्रतिशत खरीद की मांग सरकार के लिए सबसे बड़ी आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों में से एक मानी जा रही है। यदि सरकार सभी फसलों की पूरी खरीद करने का निर्णय लेती है, तो इसके लिए बड़े स्तर पर वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी। सरकार को जिन प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, उनमें शामिल हैं-

हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि जब सरकार विभिन्न क्षेत्रों के लिए बड़े बजट का प्रावधान कर सकती है, तो देश के अन्नदाताओं के लिए मजबूत खरीद व्यवस्था भी बनाई जा सकती है।

क्या MSP पर कानून संभव है?

MSP को कानूनी गारंटी देने की मांग पिछले कई वर्षों से किसानों द्वारा उठाई जा रही है। किसानों का तर्क है कि यदि कोई व्यापारी MSP से कम कीमत पर फसल खरीदता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।यदि MSP कानून लागू होता है, तो इसके संभावित प्रभाव कुछ इस प्रकार हो सकते हैं-

सकारात्मक प्रभाव

संभावित चुनौतियां

छोटे किसानों को सबसे ज्यादा उम्मीद

देश के लगभग 85 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। ये किसान अक्सर MSP की घोषणा के बावजूद इसका लाभ नहीं ले पाते। ऐसे किसानों का कहना है कि यदि MSP पर 100 प्रतिशत खरीद की व्यवस्था लागू होती है, तो उन्हें अपनी फसल को औने-पौने दामों पर बेचने की मजबूरी से छुटकारा मिल सकेगा। भोपाल पहुंच रहे कई किसानों ने कहा कि कृषि लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी के खर्च में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

आंदोलन का राजनीतिक असर भी संभव

कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दे हमेशा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में किसानों का यह बड़ा आंदोलन आने वाले समय में राजनीतिक दलों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MSP को लेकर किसानों का दबाव बढ़ता है, तो सरकारों को कृषि खरीद नीतियों में बदलाव करने पर विचार करना पड़ सकता है।  भोपाल कूच के जरिए किसान संगठनों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि MSP केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों की आजीविका से जुड़ा प्रश्न है।

किसानों ने दी चेतावनी

किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक पहल नहीं करती, तो आंदोलन को प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन, राज्य स्तरीय रैलियां और संसद मार्च जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।किसानों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि किसानों के अधिकारों के लिए है।

MSP पर किसानों की प्रमुख मांगें एक नजर में

मांग विवरण
100% MSP खरीद सभी फसलों की सरकारी खरीद
MSP की कानूनी गारंटी कानून बनाकर लागू किया जाए
समय पर भुगतान किसानों को तुरंत भुगतान मिले
खरीद केंद्र बढ़ें हर जिले में पर्याप्त केंद्र हों
खरीद प्रक्रिया सरल हो किसानों को कम कागजी कार्रवाई करनी पड़े
कृषि लागत का उचित मूल्य लागत के आधार पर MSP तय हो

निष्कर्ष

भोपाल कूच केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि किसानों की वर्षों पुरानी मांगों को लेकर शुरू हुआ बड़ा आंदोलन माना जा रहा है। MSP पर 100 प्रतिशत सरकारी खरीद और कानूनी गारंटी की मांग अब एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बनती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

यदि किसानों की मांगों पर सकारात्मक पहल होती है, तो यह देश की कृषि व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है। वहीं यदि समाधान नहीं निकलता, तो किसानों का यह ‘आर-पार’ आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

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