राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में पंचायती राज संस्थाओं का जलवा, डिजिटल शासन की मिसाल बनीं ग्राम पंचायतें

National E-Governance Award 2026: Gram Panchayats become examples of digital governance

देश में डिजिटल शासन को मजबूत बनाने और नागरिकों तक पारदर्शी एवं प्रभावी सेवाएं पहुंचाने के प्रयासों को एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार (NAeG) 2026 में पंचायती राज मंत्रालय और ग्राम पंचायतों की चार प्रमुख पहलों को सम्मानित किया गया है। इन पुरस्कारों ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल परिवर्तन अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में भी तकनीक आधारित शासन तेजी से मजबूत हो रहा है।

इस वर्ष राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के तहत सात श्रेणियों में चयनित 17 परियोजनाओं में से चार पुरस्कार पंचायती राज क्षेत्र से जुड़ी पहलों को मिले हैं। इनमें तीन स्वर्ण पुरस्कार और एक रजत पुरस्कार शामिल हैं। विजेताओं को ट्रॉफी, प्रमाण पत्र और प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। स्वर्ण पुरस्कार विजेताओं को 10 लाख रुपये और रजत पुरस्कार विजेताओं को 5 लाख रुपये की राशि मिलेगी।

जयपुर में होगा पुरस्कार वितरण समारोह

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 का वितरण 1 और 2 जुलाई 2026 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित होने वाले 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में किया जाएगा।

यह सम्मेलन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG), इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और राजस्थान सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन की थीम “विकसित भारत 2047: एआई-सक्षम, डेटा-संचालित और सुरक्षित डिजिटल शासन” रखी गई है।

यह थीम सरकार की उस सोच को दर्शाती है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

पंचायत उन्नति सूचकांक को मिला स्वर्ण पुरस्कार

पंचायती राज मंत्रालय की प्रमुख पहल “पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI)” को डिजिटल परिवर्तन की श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

यह सूचकांक देशभर की ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन को मापने और उनके विकास का आकलन करने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। पंचायत उन्नति सूचकांक स्थानीय सतत विकास लक्ष्यों (LSDGs) के नौ प्रमुख विषयों के आधार पर ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन करता है।

इस प्रणाली के माध्यम से सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-सी पंचायतें बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। डेटा आधारित शासन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कादेपुर ग्राम पंचायत बनी देश की डिजिटल मॉडल पंचायत

महाराष्ट्र के सांगली जिले की कादेपुर ग्राम पंचायत ने राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में स्वर्ण पदक हासिल कर देशभर में अपनी पहचान बनाई है।

कादेपुर ग्राम पंचायत ने एक अत्याधुनिक डिजिटल प्रशासनिक मॉडल विकसित किया है, जिसके माध्यम से 4,300 से अधिक लाभार्थियों को 1,355 से ज्यादा सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस पंचायत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां का प्रशासन पूरी तरह पेपरलेस ई-ऑफिस प्रणाली पर आधारित है। इसके अलावा पंचायत में आठ एआई आधारित प्रशासनिक एप्लीकेशन, ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड प्रबंधन और जीआईएस आधारित संपत्ति जियो-टैगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

कादेपुर देश की पहली ऐसी ग्राम पंचायत मानी जाती है जिसके पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और नैनो टेक्नोलॉजी से संबंधित औपचारिक नीतियां मौजूद हैं।

त्रिपुरा की बिजॉय नगर पंचायत को मिला रजत पुरस्कार

त्रिपुरा के पश्चिम त्रिपुरा जिले की बिजॉय नगर ग्राम पंचायत को रजत पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

इस पंचायत ने सहभागी शासन, वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल समावेशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 में इसका स्कोर 88.55 दर्ज किया गया, जो पिछले मूल्यांकन की तुलना में लगभग 38 प्रतिशत अधिक है।

बिजॉय नगर पंचायत ने स्वयं के राजस्व स्रोतों में करीब 194 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। पंचायत में 100 से अधिक सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इसके अलावा “ग्राम बार्ता” नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पंचायत प्रशासन और नागरिकों के बीच रियल टाइम संवाद स्थापित किया गया है। सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि महिलाओं में 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता हासिल करना है।

नंदुरबार की ई-आरोग्य धामनी पहल को भी मिला स्वर्ण सम्मान

महाराष्ट्र की नंदुरबार जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग को “ई-आरोग्य धामनी” परियोजना के लिए जिला स्तरीय ई-गवर्नेंस पहल श्रेणी में स्वर्ण पुरस्कार प्रदान किया गया है।

यह परियोजना विशेष रूप से आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई थी। डिजिटल तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों तक पहुंचाने में इस पहल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नंदुरबार जैसे दूरस्थ जिले में यह परियोजना स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन का सफल उदाहरण बनकर उभरी है। इससे हजारों लोगों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो रही हैं।

गांवों में बढ़ रही डिजिटल शासन की ताकत

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के परिणाम यह स्पष्ट करते हैं कि देश के गांव तेजी से डिजिटल शासन को अपना रहे हैं। पंचायतें अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

ऑनलाइन प्रमाणपत्र, डिजिटल रिकॉर्ड, एआई आधारित सेवाएं, ई-ऑफिस प्रणाली और डेटा आधारित निर्णय लेने जैसी व्यवस्थाएं ग्राम स्तर पर लागू हो रही हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आया है।

बढ़ रही है ग्राम पंचायतों की भागीदारी

पंचायती राज मंत्रालय के प्रयासों का असर ग्राम पंचायतों की बढ़ती भागीदारी में भी दिखाई देता है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 में जहां 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 1.45 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों ने भाग लिया था, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 30 राज्यों की 1.65 लाख से अधिक पंचायतों तक पहुंच गई।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि ग्राम पंचायतें डिजिटल शासन को अपनाने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

विकसित भारत 2047 की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

डिजिटल इंडिया अभियान के तहत पंचायतों में हो रहा तकनीकी बदलाव विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। पंचायत उन्नति सूचकांक, कादेपुर ग्राम पंचायत, बिजॉय नगर पंचायत और ई-आरोग्य धामनी जैसी पहलें यह साबित करती हैं कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से गांवों में भी उत्कृष्ट शासन संभव है।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में पंचायती राज संस्थाओं को मिली सफलता ग्रामीण भारत में हो रहे डिजिटल परिवर्तन की मजबूत तस्वीर पेश करती है। पंचायत उन्नति सूचकांक, कादेपुर ग्राम पंचायत, बिजॉय नगर पंचायत और नंदुरबार की ई-आरोग्य धामनी जैसी पहलें यह दिखाती हैं कि तकनीक के माध्यम से गांवों में पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन स्थापित किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में ऐसी पहलें ग्रामीण विकास और डिजिटल भारत के सपने को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

 

 

 

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