राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान पर राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया

पंचायती राज मंत्रालय (MoPR) द्वारा आज डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) पर एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यशाला में देशभर के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पंचायती राज विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं राज्य ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थानों (SIRD&PRs) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

 

पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका को बताया गया अहम

श्री विवेक भारद्वाज ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि यह कार्यशाला स्थानीय अनुभवों को साझा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिससे भविष्य के लिए सशक्त पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के निर्माण की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जा सके। उन्होंने कहा,

“पंचायतें केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में समान भागीदार हैं। इनकी सहभागिता को और गहरा करने की आवश्यकता है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जमीनी स्तर पर प्राप्त सुझाव और चुनौतियाँ नई RGSA की रणनीति को और अधिक व्यावहारिक और प्रभावशाली बनाएंगी। उन्होंने स्थायी संस्थागत सशक्तिकरण पर ज़ोर देते हुए कहा कि प्रणाली को प्रतिक्रियाशील और गुणवत्ता-उन्मुख बनाना ही सच्ची मजबूती है।

 

2026 से शुरू होगा नया RGSA चरण

MoPR के अतिरिक्त सचिव श्री सुशील कुमार लोहानी ने बताया कि वर्तमान RGSA का चरण 2025 में समाप्त हो रहा है और इस कार्यशाला का उद्देश्य आगामी रणनीति पर सहमति बनाना है। उन्होंने बताया कि 2026 से RGSA का नया और सशक्त संस्करण शुरू करने का प्रस्ताव है, जो वर्तमान अनुभवों और व्यावहारिक फीडबैक पर आधारित होगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान RGSA ने देशभर में पंचायतों की क्षमता वृद्धि, प्रशिक्षण और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने विशेष रूप से eGramSwaraj पोर्टल के माध्यम से “योजना से भुगतान” तक की पारदर्शी प्रक्रिया को एक बड़ी उपलब्धि बताया, जिससे वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को बढ़ावा मिला है।

 

कार्यशाला में उठे अहम मुद्दे

कार्यशाला में पुनर्गठित RGSA की मुख्य उपलब्धियों, विकास प्रक्रिया और आगामी रणनीति पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। साथ ही, योजना के व्यय मानदंडों और फंडिंग संरचना पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए।

विशेष रूप से पाँच प्रमुख घटकों पर केंद्रित समूह चर्चा आयोजित की गई:

  1. क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण
  2. संस्थागत व्यवस्था
  3. पंचायतों की आधारभूत संरचना
  4. PESA अधिनियम का कार्यान्वयन
  5. नवाचार व आर्थिक विकास पर आधारित विशेष घटक

राज्यों की टीमों ने सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं, नीतिगत सुझावों और जमीनी चुनौतियों को साझा किया, जिनका उपयोग अगले चरण की रूपरेखा तैयार करने में किया जाएगा।

 

विकसित भारत @2047 की दिशा में सशक्त पंचायतें

MoPR का यह प्रयास भारत को विकसित भारत @2047 की दिशा में ले जाने की महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसमें सशक्त, पारदर्शी और उत्तरदायी पंचायतें ग्रामीण भारत के विकास की रीढ़ बनेंगी।

 

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