अहमदाबाद हॉस्टल फूड पॉइजनिंग मामले में NHRC सख्त, दो सप्ताह में रिपोर्ट तलब

गुजरात के अहमदाबाद जिले के मेमनगर क्षेत्र में एक छात्रावास में भोजन करने के बाद बड़ी संख्या में छात्राओं के बीमार पड़ने की घटना को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव और अहमदाबाद पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 अप्रैल 2026 को छात्रावास में भोजन करने के बाद लगभग 57 लड़कियां अचानक बीमार पड़ गईं। इनमें से कई छात्राओं ने पेट दर्द, उल्टी और पेचिश जैसी शिकायतें कीं। स्थिति गंभीर होने पर करीब 18 छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि अन्य को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। इस घटना ने छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एनएचआरसी ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि मीडिया में प्रकाशित खबरें सही पाई जाती हैं, तो यह मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। आयोग का मानना है कि छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आयोग ने राज्य सरकार से जो रिपोर्ट मांगी है, उसमें पीड़ित छात्राओं की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, उन्हें दिए जा रहे उपचार, और घटना की जांच की प्रगति से संबंधित विस्तृत जानकारी शामिल करने को कहा गया है। साथ ही यह भी अपेक्षा की गई है कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि आखिरकार भोजन में किस प्रकार की गड़बड़ी हुई, जिसके कारण इतनी बड़ी संख्या में छात्राएं बीमार हुईं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना के पीछे फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और भोजन के नमूनों को परीक्षण के लिए भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

इस घटना के बाद छात्राओं के परिजनों में भी चिंता और आक्रोश का माहौल है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रावासों और अन्य सामूहिक आवासों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच और निगरानी बेहद जरूरी है। साफ-सफाई, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और भोजन बनाने की प्रक्रिया में लापरवाही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है।

एनएचआरसी की इस कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो न केवल पीड़ित छात्राओं को न्याय दिलाने में मदद करेगा, बल्कि देशभर में छात्रावासों की व्यवस्था को सुधारने के लिए भी एक सख्त संदेश देगा। आयोग की सक्रियता से यह उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

कुल मिलाकर, अहमदाबाद की यह घटना छात्रावासों में सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों की अनदेखी के गंभीर परिणामों को उजागर करती है। एनएचआरसी के हस्तक्षेप से न केवल इस मामले में पारदर्शिता आएगी, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाने की संभावना बढ़ेगी।

 

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