किसानों के विरोध के बीच NITI Aayog ने भारत-अमेरिका कृषि व्यापार पर विवादित रिपोर्ट वापस ली

NITI Aayog ने भारत-अमेरिका कृषि व्यापार से जुड़े अपने एक विवादित वर्किंग पेपर को वेबसाइट से हटा लिया है। इस पेपर में अमेरिकी जीएम सोयाबीन और मक्का के आयात पर शुल्क कम करने की सिफारिश की गई थी, जिसका किसान संगठनों ने जमकर विरोध किया।

क्या था विवाद?

30 मई को जारी इस पेपर में कहा गया था कि भारत को अमेरिकी जीएम सोयाबीन और मक्का के आयात को आसान बनाना चाहिए। साथ ही, कुछ अन्य कृषि उत्पादों पर टैरिफ भी कम किए जा सकते हैं। हालांकि, भारतीय किसान संघ (BKS) समेत कई किसान संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि ऐसा करने से देश के लाखों छोटे किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

“अमेरिकी किसानों से प्रतिस्पर्धा संभव नहीं”

BKS के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा, “अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है और उनकी उत्पादन लागत कम है। ऐसे में भारतीय किसान उनके साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे।” उन्होंने इस पेपर को वापस लेने के फैसले का स्वागत करते हुए इसे किसानों की बड़ी जीत बताया।

कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए लिखा, “क्या यह पेपर भारत-अमेरिका के आगामी व्यापार समझौते का संकेत है? क्या मोदी सरकार अमेरिकी किसानों को भारतीय किसानों से ज्यादा तरजीह दे रही है?”

अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता जारी

इस बीच, भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते पर चर्चा चल रही है। अमेरिका भारत में अपने कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए बाजार खोलने की मांग कर रहा है, लेकिन भारत सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता बरत रही है।

क्या थे पेपर के मुख्य सुझाव?

भारत को अमेरिकी जीएम सोयाबीन के आयात में छूट देनी चाहिए।

झींगा, मछली, मसाले, चावल जैसे भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में ज्यादा पहुंच मिलनी चाहिए।

भारत-अमेरिका कृषि व्यापार ($5.75 बिलियन) को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

NITI Aayog ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस पेपर को वापस लेने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह दस्तावेज अब उनकी वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। किसानों के दबाव के बीच यह फैसला सरकार की नीतिगत संवेदनशीलता को दर्शाता है

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