NPOF scheme: किसानों के लिए कम लागत और ज्यादा मुनाफे की नई राह

NPOF scheme: A new path for farmers to achieve lower costs and higher profits

NPOF scheme

NPOF scheme

NPOF scheme:  भारत में खेती लगातार बदल रही है। बढ़ती लागत, मिट्टी की घटती उर्वरता और रासायनिक खादों के अधिक उपयोग ने किसानों की चिंता बढ़ाई है। ऐसे समय में जैविक खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है। इसी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने “राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना” यानी National Project on Organic Farming (NPOF) की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य किसानों को रसायन मुक्त खेती की ओर बढ़ाना, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना और खेती को टिकाऊ बनाना है।

आज देश के कई किसान जैविक खेती अपनाकर बेहतर आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। बाजार में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और उपभोक्ता भी बिना केमिकल वाले खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि सरकार लगातार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है।

कैसे हुई NPOF scheme की शुरुआत

राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना की शुरुआत वर्ष 2004 में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना था।

इस योजना को National Centre for Organic Farming यानी NCOF के माध्यम से लागू किया गया। इसका मुख्यालय National Centre for Organic Farming में स्थापित किया गया। इसके साथ देश के अलग-अलग क्षेत्रों में क्षेत्रीय केंद्र भी बनाए गए ताकि किसानों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिल सके।

सरकार का मानना था कि लगातार रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरता घट रही है और किसानों की लागत बढ़ती जा रही है। ऐसे में जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मददगार हो सकती है।

राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना का मुख्य उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य केवल जैविक खेती को बढ़ावा देना नहीं है बल्कि किसानों को एक टिकाऊ कृषि मॉडल देना भी है। योजना के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग कम करना
  • जैविक खाद और जैव उर्वरकों को बढ़ावा देना
  • मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करना
  • किसानों की लागत घटाना
  • जैविक उत्पादों की मार्केटिंग बढ़ाना
  • किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देना
  • जैविक खेती से निर्यात बढ़ाना

भारत सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाएं ताकि खेती पर्यावरण के अनुकूल बन सके।

किसान इस योजना का फायदा कैसे उठा सकते हैं

राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना का लाभ लेने के लिए किसानों को जैविक खेती से जुड़ना होता है। किसान व्यक्तिगत रूप से या समूह बनाकर इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

सरकार किसानों को कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराती है:

  • जैविक खेती का प्रशिक्षण
  • वर्मी कम्पोस्ट यूनिट लगाने में सहायता
  • जैव उर्वरक और जैव कीटनाशक उपयोग की जानकारी
  • पीजीएस (PGS) सर्टिफिकेशन सहायता
  • जैविक उत्पादों की मार्केटिंग
  • प्रदर्शन और एक्सपोजर विजिट
  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग सहायता

कई राज्यों में कृषि विभाग किसानों को जैविक खेती के लिए अनुदान भी देता है। इससे छोटे किसान भी कम लागत में जैविक खेती शुरू कर पा रहे हैं।

योजना की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया क्या है

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपने जिले के कृषि विभाग या जैविक खेती केंद्र से संपर्क करना होता है। कई राज्यों में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है।

रजिस्ट्रेशन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:

1. कृषि विभाग से संपर्क

सबसे पहले किसान को अपने जिले के कृषि अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करना होता है।

2. आवेदन फॉर्म भरना

किसान को योजना का आवेदन फॉर्म भरना होता है जिसमें खेती से जुड़ी जानकारी देनी होती है।

3. जमीन का विवरण

खेती योग्य भूमि का रिकॉर्ड देना जरूरी होता है।

4. किसान समूह का गठन

कुछ योजनाओं में 20 या उससे अधिक किसानों का समूह बनाना जरूरी होता है।

5. निरीक्षण प्रक्रिया

अधिकारी खेत का निरीक्षण करते हैं और जैविक खेती की स्थिति की जांच करते हैं।

6. सर्टिफिकेशन

PGS या अन्य प्रमाणन प्रक्रिया पूरी की जाती है ताकि उत्पाद को ऑर्गेनिक घोषित किया जा सके।

किसानों के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट जरूरी हैं

योजना का लाभ लेने के लिए किसानों के पास कुछ जरूरी दस्तावेज होने चाहिए:

  • आधार कार्ड
  • पहचान पत्र
  • भूमि रिकॉर्ड या खतौनी
  • बैंक पासबुक
  • मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • किसान पंजीकरण प्रमाण पत्र
  • समूह पंजीकरण दस्तावेज (यदि समूह में आवेदन हो)

कुछ राज्यों में अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।

किन राज्यों में किसान उठा सकते हैं फायदा

राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना पूरे देश में लागू है। हालांकि कुछ राज्यों में इसका प्रभाव अधिक देखने को मिला है।

जैविक खेती में आगे रहने वाले प्रमुख राज्य:

  • Sikkim
  • Madhya Pradesh
  • Maharashtra
  • Rajasthan
  • Gujarat
  • Uttarakhand
  • Himachal Pradesh
  • Uttar Pradesh
  • पूर्वोत्तर राज्यों के किसान

भारत में जैविक खेती वाले क्षेत्र में मध्यप्रदेश सबसे आगे माना जाता है। वहीं सिक्किम दुनिया का पहला पूर्ण जैविक राज्य बन चुका है।

पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला

पिछले कुछ वर्षों में जैविक खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है। सरकार के प्रयासों के कारण लाखों किसान जैविक खेती से जुड़े हैं।

भारत में जैविक खेती से जुड़े प्रमुख फायदे:

  • खेती की लागत में कमी
  • मिट्टी की उर्वरता में सुधार
  • जैविक उत्पादों की बेहतर कीमत
  • रासायनिक खाद पर कम निर्भरता
  • स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित उत्पादन
  • निर्यात में बढ़ोतरी

सरकारी रिपोर्टों के अनुसार भारत में लगभग 4.5 मिलियन हेक्टेयर भूमि जैविक प्रमाणन के अंतर्गत आ चुकी है। देश में करीब 2.3 मिलियन जैविक उत्पादक किसान हैं। उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा तेजी से बढ़ा है और हजारों हेक्टेयर भूमि इस पद्धति से जुड़ चुकी है।

जैविक खेती से किसानों की बढ़ी कमाई

जैविक खेती में शुरुआत में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है लेकिन समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और लागत घटने लगती है। इससे किसानों का मुनाफा बढ़ता है।

आज शहरों में ऑर्गेनिक सब्जियां, दालें, मसाले और फल सामान्य उत्पादों से अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। कई किसान सीधे उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचकर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।

जैविक खेती में कौन-कौन सी फसलें लाभदायक

जैविक खेती लगभग सभी फसलों में की जा सकती है। लेकिन कुछ फसलें अधिक लाभ देती हैं:

  • गेहूं
  • धान
  • दालें
  • मसाले
  • सब्जियां
  • फल
  • औषधीय पौधे
  • चाय और कॉफी

भारत से जैविक चावल, तिल, सोयाबीन और मसालों का निर्यात भी बढ़ रहा है।

जैविक खेती में सर्टिफिकेशन क्यों जरूरी

यदि किसान अपने उत्पाद को “ऑर्गेनिक” नाम से बेचना चाहते हैं तो प्रमाणन जरूरी होता है।

इसके फायदे:

  • बाजार में अधिक कीमत
  • निर्यात में सुविधा
  • ग्राहकों का भरोसा
  • ब्रांड वैल्यू बढ़ना

सरकार PGS इंडिया के माध्यम से छोटे किसानों को कम लागत में सर्टिफिकेशन की सुविधा देती है।

जैविक खेती से पर्यावरण को क्या फायदा

जैविक खेती केवल किसानों के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।

  • मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है
  • जल प्रदूषण कम होता है
  • जैव विविधता बढ़ती है
  • रासायनिक अवशेष कम होते हैं
  • पानी की बचत होती है

इसी वजह से सरकार अब प्राकृतिक खेती और जैविक खेती दोनों पर जोर दे रही है।

किसानों के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां

हालांकि जैविक खेती तेजी से बढ़ रही है लेकिन किसानों को कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है:

  • शुरुआती वर्षों में कम उत्पादन
  • मार्केट की कमी
  • सर्टिफिकेशन प्रक्रिया की जानकारी कम होना
  • जैविक इनपुट की उपलब्धता
  • जागरूकता की कमी

लेकिन सरकार और कृषि संस्थान लगातार प्रशिक्षण देकर इन समस्याओं को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

सरकार की नई पहलें

सरकार अब जैविक खेती को डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीकों से जोड़ रही है। किसानों को मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा जैविक उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात बढ़ाने के लिए भी नई नीतियां बनाई जा रही हैं।

भविष्य में जैविक खेती का बढ़ता दायरा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में जैविक खेती की मांग और तेजी से बढ़ेगी। लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं और बिना केमिकल वाले उत्पादों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में किसानों के लिए जैविक खेती एक बड़ा अवसर बन सकती है। जो किसान अभी से इस दिशा में काम शुरू करेंगे उन्हें भविष्य में बेहतर लाभ मिलने की संभावना है।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना साबित हो रही है। यह योजना केवल खेती की लागत कम करने तक सीमित नहीं है बल्कि मिट्टी की सेहत सुधारने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है।

आज जब खेती में लागत लगातार बढ़ रही है तब जैविक खेती किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन और अधिक कीमत दिलाने का मौका दे रही है। सरकार की योजनाएं, प्रशिक्षण और बाजार समर्थन इस दिशा में किसानों की मदद कर रहे हैं।यदि किसान सही जानकारी और वैज्ञानिक तरीके से जैविक खेती अपनाएं तो आने वाले समय में यह खेती भारतीय कृषि की सबसे मजबूत पहचान बन सकती है।

Exit mobile version