किसानों तक पहुंचेगी PAU की उन्नत मटर किस्म ‘Punjab-90’, हरियाणा की कंपनी से हुआ MoA

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Research से खेत तक पहुंचने की दिशा में अहम कदम

Research से खेत तक पहुंचने की दिशा में अहम कदम

किसानों को उन्नत सब्जी किस्मों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने की दिशा में Punjab Agricultural University (PAU) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने हरियाणा के करनाल जिले स्थित Sahib (SK) Seeds Private Limited के साथ Memorandum of Agreement (MoA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत PAU द्वारा विकसित मटर की उन्नत किस्म ‘Punjab-90’ के Licensing और Commercialization का रास्ता साफ हुआ है।

इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय में विकसित Agricultural Technology और Improved Vegetable Varieties को Research Fields से निकालकर अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना है। Industry Partnership के माध्यम से Punjab-90 की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को एक ऐसी मटर किस्म का विकल्प मिल सकेगा, जिसे PAU ने विशेष उत्पादन गुणों के साथ विकसित किया है।

MoA पर डॉ. वी.एस. सोहू, Additional Director of Research (Agriculture and Horticulture), PAU और कंपनी की ओर से डॉ. गुरु दयाल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर PAU के Research और Technology Transfer से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे।

PAU और Sahib Seeds के बीच हुआ समझौता

Punjab Agricultural University द्वारा विकसित कृषि तकनीकों और फसल किस्मों को किसानों तक पहुंचाने में Commercialization Agreements की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी क्रम में Sahib (SK) Seeds Private Limited के साथ हुआ यह समझौता मटर की Punjab-90 किस्म के व्यापक प्रसार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

Sahib (SK) Seeds Private Limited का पता VPO Chaura, District Karnal, Haryana है। कंपनी के साथ हुए Licensing Agreement के माध्यम से PAU की ओर से विकसित इस Vegetable Variety को Commercial Channel के जरिए किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर डॉ. महेश कुमार, Additional Director of Research (Agricultural Engineering); डॉ. खुशदीप धरनी, Associate Director, Technology Marketing and IPR (TMIPR) Cell; तथा डॉ. राजिंदर कुमार ढल्ल, Principal Olericulturist, Department of Vegetable Science भी उपस्थित रहे।

Research से Farmer तक Technology Transfer पर जोर

MoA के अवसर पर डॉ. अजमेर सिंह धट्ट, Director of Research, PAU ने Department of Vegetable Science की टीम को बधाई दी। उन्होंने Commercialization Agreement को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए टीम के प्रयासों की सराहना की।

डॉ. धट्ट ने कहा कि Industry Partnerships विश्वविद्यालयों में विकसित Technologies और Improved Varieties को किसानों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। Universities में लंबे समय तक Research और Field Trials के माध्यम से विकसित की जाने वाली कृषि तकनीकों का वास्तविक लाभ तब अधिक व्यापक रूप से किसानों तक पहुंचता है, जब उनके Commercial Production और Distribution के लिए उपयुक्त Industry Partners उपलब्ध हों।

Punjab-90 के Commercialization के जरिए PAU का प्रयास यही है कि University-developed Variety को Research और Demonstration Fields से आगे बढ़ाकर Farming Community तक पहुंचाया जाए।

क्या है Punjab-90 मटर की खासियत?

डॉ. राजिंदर कुमार ढल्ल ने Punjab-90 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक Mid-Season और Mono-Picking Pea Variety है। इस किस्म के पौधे Vigorous होते हैं और प्रत्येक पौधे पर लगभग 18 से 25 अच्छी तरह भरी हुई फलियां विकसित होती हैं।

Punjab-90 की फलियों का रंग Dark Green होता है और फलियां लंबी होती हैं। फलियां सामान्यतः जोड़े में लगती हैं और प्रत्येक फली में लगभग 8 से 10 दाने पाए जाते हैं।

किस्म की एक प्रमुख विशेषता इसका अपेक्षाकृत संतुलित Harvesting Period है। Punjab-90 में पहली तुड़ाई लगभग 85 से 90 दिनों में शुरू हो जाती है। इससे किसानों को Mid-Season Pea Crop के रूप में इसकी खेती करने का विकल्प मिलता है।

मीठे दानों के साथ 55 प्रतिशत Shelling Outturn

Punjab-90 के Shelled Peas को लेकर भी इसकी विशेषता बताई गई है। इस किस्म के मटर के दाने Sweet होते हैं और इसका Shelling Outturn लगभग 55 प्रतिशत बताया गया है।

Shelling Outturn सब्जी मटर के लिए एक महत्वपूर्ण Quality Parameter है। इसका अर्थ है कि फलियों से छिलका हटाने के बाद कुल उपज में से प्राप्त होने वाले मटर के दानों का अनुपात। किसानों और Vegetable Value Chain से जुड़े लोगों के लिए यह गुण आर्थिक दृष्टि से उपयोगी हो सकता है।

किस्म के Green Pods की Yield भी इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार Multiple Pickings की स्थिति में Punjab-90 से लगभग 62 क्विंटल हरी फलियों प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त हो सकता है।

वहीं Single Picking की स्थिति में इसकी Yield लगभग 45 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है।

Mono-Picking के साथ Multiple Picking की संभावना

Punjab-90 को Mono-Picking Variety के रूप में बताया गया है, लेकिन इसके Green Pod Yield के आंकड़ों में Multiple Pickings के तहत भी उत्पादन क्षमता का उल्लेख किया गया है। Multiple Picking में लगभग 62 क्विंटल प्रति एकड़ और Single Picking में लगभग 45 क्विंटल प्रति एकड़ Green Pods की Yield बताई गई है।

इस प्रकार किसानों के लिए इस किस्म का मूल्यांकन करते समय स्थानीय मौसम, खेती की पद्धति, Crop Management, बाजार की मांग और Harvesting System जैसे कारकों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।

PAU की Vegetable Science Research के तहत विकसित इस किस्म में पौधों की Vigorous Growth, अच्छी फलियों की संख्या, Dark Green Long Pods और Sweet Shelled Peas जैसे गुण शामिल हैं।

सब्जी किसानों के लिए बढ़ेंगे Variety Options

भारत में सब्जी उत्पादन किसानों की आय और कृषि विविधीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मटर जैसी प्रमुख Rabi-season Vegetable Crop किसानों को फसल प्रणाली में एक अतिरिक्त Commercial Crop का विकल्प देती है।

उन्नत Vegetable Varieties उपलब्ध होने से किसानों के पास अपनी स्थानीय परिस्थितियों और Market Demand के अनुसार किस्म चुनने के अधिक विकल्प हो सकते हैं। PAU द्वारा विकसित Punjab-90 की Commercialization इसी दिशा में एक कदम है।

किसानों के लिए किसी भी नई Variety को अपनाने से पहले क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई सुविधा, बुवाई समय, उपलब्ध कृषि संसाधन और स्थानीय बाजार की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। साथ ही Certified Seed और अधिकृत स्रोतों से उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण बीज का उपयोग भी महत्वपूर्ण है।

PAU की Vegetable Varieties को किसानों के बीच लोकप्रियता

डॉ. खुशदीप धरनी, Associate Director, Technology Marketing and IPR (TMIPR) Cell, ने कहा कि PAU द्वारा विकसित Vegetable Varieties और Hybrids को किसानों तथा अन्य Stakeholders के बीच व्यापक लोकप्रियता प्राप्त है।

उन्होंने बताया कि Industry के साथ Commercialization Agreements के माध्यम से विश्वविद्यालय अपने Research Outcomes को व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को मजबूत कर रहा है।

Technology Transfer कृषि Research System का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विश्वविद्यालयों में विकसित नई किस्में, Technologies और Production Techniques यदि किसानों तक नहीं पहुंचतीं तो उनके संभावित लाभ सीमित रह जाते हैं। इसलिए Research Institutions और Industry के बीच सहयोग से Lab-to-Land और Research-to-Farmer प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकता है।

TMIPR Cell की भूमिका महत्वपूर्ण

PAU में Technology Marketing and IPR (TMIPR) Cell University-developed Technologies को Commercial Partners तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। Intellectual Property Rights की सुरक्षा के साथ-साथ Technologies और Varieties के Licensing तथा Commercialization की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना ऐसे Cells का महत्वपूर्ण कार्य है।

Punjab-90 के लिए हुआ यह Agreement भी University Research को Industry और Farming Community से जोड़ने का उदाहरण है।

Agricultural Research में केवल नई Variety विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है। उसके Seed Production, Quality Maintenance, Multiplication, Marketing और Farmer-level Dissemination की व्यवस्था भी जरूरी होती है। Industry Partnership इन आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद कर सकती है।

कृषि Research को मिलेगी Commercial दिशा

PAU और Sahib (SK) Seeds के बीच हुआ यह MoA कृषि Research को Commercial Application से जोड़ने की दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। University Scientists द्वारा विकसित Variety को Industry Partner के माध्यम से अधिक व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया किसानों के लिए Research Benefits को बढ़ा सकती है।

ऐसे Agreements से University और Private Sector के बीच सहयोग को भी बढ़ावा मिलता है। एक ओर Research Institutions नई Varieties और Technologies विकसित करते हैं, वहीं Industry उनके Production, Multiplication और Market Dissemination में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यह Model Agriculture Sector में Research, Innovation और Commercialization के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में सहायक हो सकता है।

किसानों तक Improved Seed Technology पहुंचाने की पहल

किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण और उपयुक्त बीज उपलब्धता Crop Productivity का महत्वपूर्ण आधार है। Improved Varieties में बेहतर उत्पादन, फसल अवधि, गुणवत्ता और बाजार की जरूरतों के अनुरूप अलग-अलग गुण हो सकते हैं।

Punjab-90 के Commercialization के जरिए PAU का उद्देश्य University-developed Pea Variety को व्यापक Farming Community तक पहुंचाने का है। इसके माध्यम से किसानों को मटर की खेती के लिए एक और Improved Variety का विकल्प उपलब्ध हो सकेगा।

हालांकि किसी भी Variety की वास्तविक Performance क्षेत्र, मौसम, Soil Conditions, Agronomic Practices और Crop Management पर निर्भर करती है। इसलिए किसानों को Variety की अनुशंसाओं के अनुसार वैज्ञानिक खेती तकनीकों का पालन करना चाहिए।

PAU की Research को मिलेगा नया विस्तार

Punjab Agricultural University लंबे समय से कृषि Research, Education और Extension के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न Crop Varieties और Agricultural Technologies का उपयोग किसानों द्वारा किया जाता रहा है।

Punjab-90 के लिए किया गया यह Agreement भी PAU की Research और Technology Transfer प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे Vegetable Science से जुड़े Research Outcomes को Commercial Platform मिलने की संभावना बढ़ेगी।

विश्वविद्यालय और Industry के बीच ऐसे सहयोग Agriculture Innovation Ecosystem को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं। इससे Scientists, Seed Companies और Farmers के बीच Technology Flow को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

किसानों की आय और Vegetable Diversification की दिशा में अवसर

सब्जी उत्पादन किसानों को Traditional Field Crops के साथ Income Diversification का अवसर देता है। मटर की खेती भी कई क्षेत्रों में Rabi Season में महत्वपूर्ण Vegetable Crop के रूप में की जाती है।

नई और Improved Varieties के उपलब्ध होने से किसान अपनी खेती की योजना में अधिक विकल्प शामिल कर सकते हैं। Punjab-90 में बताई गई Vigorous Plant Growth, 18–25 Pods per Plant, Dark Green Long Pods, 8–10 Grains per Pod और Sweet Shelled Peas जैसी विशेषताएं इसे ध्यान देने योग्य Variety बनाती हैं।

इसके अलावा 85–90 दिनों में पहली Picking और Green Pod Yield से जुड़े आंकड़े किसानों के लिए Variety Selection के समय उपयोगी जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

Research से खेत तक पहुंचने की दिशा में अहम कदम

PAU और Sahib (SK) Seeds Private Limited के बीच हुआ यह Punjab-90 Licensing Agreement कृषि Research को Farmers तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। University Scientists द्वारा विकसित मटर की इस किस्म को Commercial Channel के माध्यम से किसानों तक पहुंचाने से Improved Vegetable Seed की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

इस समझौते के साथ PAU ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि Agricultural Research का अंतिम उद्देश्य किसानों तक उपयोगी Technologies और Improved Varieties पहुंचाना है। Industry Partnerships इस प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

आने वाले समय में ऐसे Commercialization Agreements के माध्यम से PAU की अन्य Vegetable Varieties और Agricultural Technologies भी व्यापक Farming Community तक पहुंच सकती हैं। इससे Research Institutions और Industry के बीच सहयोग मजबूत होगा और किसानों को नई कृषि तकनीकों एवं उन्नत किस्मों के विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

 

 

 

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