Pradhanmantri Jal Sanchay Yojana: जल संरक्षण, किसानों के लाभ और पूरी जानकारी

Pradhanmantri Jal Sanchay Yojana: Water conservation, benefits for farmers, and complete information.

Pradhanmantri Jal Sanchay Yojana

Pradhanmantri Jal Sanchay Yojana: भारत में पानी की कमी खेती, पेयजल, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री जल संचय योजना जैसे जल संरक्षण प्रयासों की चर्चा तेजी से बढ़ी है। हालांकि सरकारी संदर्भ में इसे मुख्य रूप से जल संचय जन भागीदारी, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से जोड़कर देखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को बचाना, भूजल रिचार्ज बढ़ाना, जल स्रोतों का संरक्षण करना और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। जल संचय जन भागीदारी पहल में कृत्रिम रिचार्ज संरचनाओं और बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट जैसी गतिविधियों पर विशेष जोर दिया गया है।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना क्या है?

प्रधानमंत्री जल संचय योजना कोई अलग से एकल योजना के रूप में हर सरकारी दस्तावेज में इसी नाम से दिखाई नहीं देती, बल्कि यह एक लोकप्रिय खोज शब्द है, जिसे लोग जल संरक्षण से जुड़ी केंद्र सरकार की पहलों के लिए इस्तेमाल करते हैं। आधिकारिक रूप से इस विषय से जुड़ी प्रमुख पहल जल संचय जन भागीदारी है, जिसे जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया गया है।

जल संचय जन भागीदारी पहल का आधार यह है कि पानी बचाने का काम केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें पंचायत, किसान, स्कूल, शहरी निकाय, उद्योग, समाजसेवी संस्थाएं और आम नागरिक सभी की भागीदारी जरूरी है। PIB के अनुसार, 6 सितंबर 2024 को गुजरात के सूरत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जल संचय जन भागीदारी पहल की शुरुआत की गई और गुजरात में लगभग 24,800 वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण की बात कही गई।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना का मुख्य उद्देश्य

प्रधानमंत्री जल संचय योजना का व्यापक उद्देश्य देश में जल सुरक्षा को मजबूत करना है। भारत में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां बरसात के मौसम में पानी बहकर निकल जाता है और गर्मियों में सिंचाई व पेयजल संकट पैदा हो जाता है। इसलिए सरकार का फोकस बारिश के पानी को रोकने, जमीन में उतारने और जल स्रोतों को दोबारा जीवित करने पर है।

इस योजना जैसे प्रयासों के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  1. वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना
  2. भूजल स्तर में सुधार करना
  3. खेतों तक पानी की उपलब्धता बढ़ाना
  4. सूखे और जल संकट वाले क्षेत्रों में राहत देना
  5. तालाब, कुएं, चेक डैम और जल निकायों का पुनर्जीवन करना
  6. ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देना
  7. पंचायत और समुदाय की भागीदारी से जल संरक्षण को मजबूत करना
  8. किसानों की सिंचाई लागत कम करना
  9. जल उपयोग दक्षता बढ़ाना
  10. आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना

प्रधानमंत्री जल संचय योजना और जल संचय जन भागीदारी

जल संचय जन भागीदारी इस विषय का सबसे महत्वपूर्ण आधिकारिक संदर्भ है। इसका लक्ष्य जल संरक्षण को केवल सरकारी परियोजना तक सीमित न रखकर समाज के हर वर्ग से जोड़ना है। इस पहल में कृत्रिम भूजल रिचार्ज, बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट, वर्षा जल संचयन संरचनाएं और स्थानीय स्तर पर जल बचत कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

जल संचय जन भागीदारी क्यों जरूरी है?

भारत में बारिश का बड़ा हिस्सा कुछ महीनों में होता है। यदि उस पानी को रोका और जमीन में उतारा जाए, तो गांवों में कुएं, हैंडपंप, बोरवेल और तालाब लंबे समय तक पानी दे सकते हैं। इसके अलावा बारिश के पानी का सही प्रबंधन बाढ़, मिट्टी कटाव और जलभराव जैसी समस्याओं को भी कम कर सकता है।

जल संचय जन भागीदारी का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि इसमें स्थानीय जरूरतों के अनुसार समाधान तैयार किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, पहाड़ी क्षेत्र में जल रोकने के तरीके अलग होंगे, जबकि मैदानी क्षेत्र में चेक डैम, तालाब, रिचार्ज पिट और खेत तालाब अधिक उपयोगी हो सकते हैं।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना से जुड़े प्रमुख सरकारी कार्यक्रम

सरकारी पहल मुख्य उद्देश्य किसानों और गांवों को लाभ
जल संचय जन भागीदारी जल संरक्षण में जन भागीदारी भूजल रिचार्ज और वर्षा जल संचयन
जल शक्ति अभियान: कैच द रेन बारिश के पानी को बचाना गांव और शहर में जल स्रोत मजबूत
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हर खेत को पानी और जल उपयोग दक्षता सिंचाई सुविधा, ड्रिप-स्प्रिंकलर लाभ
मनरेगा जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण गांव में रोजगार और जल संरचना
अटल भूजल योजना भूजल प्रबंधन जल संकट वाले गांवों में सुधार
मिशन अमृत सरोवर तालाब निर्माण और पुनर्जीवन जल संचय और ग्रामीण जल सुरक्षा
अमृत 2.0 शहरी जल प्रबंधन शहरों में वर्षा जल संचयन

जल शक्ति मंत्रालय 2019 से जल शक्ति अभियान लागू कर रहा है। जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के तहत वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण और मरम्मत प्रमुख गतिविधियों में शामिल है। इसमें मनरेगा, अमृत, प्रति बूंद अधिक फसल, PMKSY, CSR फंड और अन्य स्रोतों का तालमेल किया जाता है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से संबंध

प्रधानमंत्री जल संचय योजना की चर्चा करते समय प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का उल्लेख जरूरी है, क्योंकि खेती में पानी की उपलब्धता और जल उपयोग दक्षता इसी योजना से गहराई से जुड़ी है। PMKSY का उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाना, सुनिश्चित सिंचाई के तहत कृषि योग्य क्षेत्र बढ़ाना, खेत में पानी के उपयोग की दक्षता सुधारना और टिकाऊ जल संरक्षण प्रणालियों को लागू करना है।

PMKSY के प्रमुख घटक हैं:

इससे किसानों को सिंचाई व्यवस्था सुधारने, पानी की बचत करने और कम पानी में अधिक उत्पादन लेने में मदद मिलती है।

किसानों के लिए प्रधानमंत्री जल संचय योजना के लाभ

किसानों के लिए पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि उत्पादन और आय का आधार है। यदि खेत में समय पर पानी उपलब्ध हो जाए, तो फसल की वृद्धि बेहतर होती है और नुकसान कम होता है। प्रधानमंत्री जल संचय योजना जैसे प्रयास किसानों को कई तरीके से लाभ पहुंचा सकते हैं।

1. सिंचाई की उपलब्धता बढ़ती है

जब गांव में तालाब, चेक डैम, खेत तालाब और रिचार्ज पिट बनाए जाते हैं, तो बारिश का पानी गांव में ही रुकता है। इससे आसपास के कुएं और बोरवेल में पानी का स्तर सुधर सकता है। इससे किसान खरीफ के साथ रबी फसल में भी बेहतर सिंचाई कर सकते हैं।

2. भूजल स्तर में सुधार

कृत्रिम रिचार्ज के माध्यम से बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाया जाता है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार, कृत्रिम रिचार्ज का उद्देश्य भूजल स्तर में गिरावट रोकना, भूजल उपलब्धता बढ़ाना, पेयजल स्रोतों को टिकाऊ बनाना और सिंचाई कुओं की क्षमता सुधारना है।

3. खेती की लागत कम हो सकती है

जहां पानी गहराई में चला जाता है, वहां मोटर चलाने में अधिक बिजली या डीजल खर्च होता है। यदि भूजल स्तर सुधरता है, तो पानी निकालने की लागत कम हो सकती है। साथ ही ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीक पानी और श्रम दोनों बचाती है।

4. सूखे में राहत

जल संचय संरचनाएं सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बेहद उपयोगी हैं। यदि बारिश कम भी हो, तो संचित पानी फसलों, पशुओं और घरेलू उपयोग के लिए मददगार हो सकता है।

5. फसल उत्पादकता में सुधार

समय पर सिंचाई मिलने से अंकुरण, फूल, दाना भराव और फल विकास जैसे चरणों में फसल को लाभ मिलता है। इससे गेहूं, धान, दालें, तिलहन, सब्जियां और बागवानी फसलों में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

गांवों में जल संचय के प्रमुख तरीके

गांवों में प्रधानमंत्री जल संचय योजना जैसे प्रयासों के तहत कई प्रकार की जल संरचनाएं बनाई जा सकती हैं। इनका चयन मिट्टी, ढलान, बारिश, भूजल स्तर और स्थानीय जरूरतों के आधार पर होना चाहिए।

1. चेक डैम

चेक डैम छोटे नालों या जल प्रवाह वाले स्थानों पर बनाए जाते हैं। ये पानी की गति कम करते हैं और पानी को जमीन में रिसने का समय देते हैं। इससे आसपास के क्षेत्र में भूजल रिचार्ज में मदद मिलती है।

2. खेत तालाब

खेत तालाब किसानों के लिए बहुत उपयोगी जल संचय संरचना है। इसमें बारिश का पानी जमा किया जाता है, जिसे बाद में सिंचाई, पशुपालन या बागवानी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

3. रिचार्ज पिट

रिचार्ज पिट छोटे गड्ढे या संरचनाएं होती हैं, जिनमें फिल्टर सामग्री के माध्यम से बारिश का पानी जमीन के अंदर भेजा जाता है। यह घर, स्कूल, पंचायत भवन और खेतों के आसपास बनाया जा सकता है।

4. परकोलेशन टैंक

परकोलेशन टैंक ऐसे क्षेत्र में बनाए जाते हैं जहां पानी फैलकर धीरे-धीरे जमीन में समा सके। यह भूजल रिचार्ज के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है।

5. गली प्लग और गैबियन संरचना

ढलान वाले क्षेत्रों में गली प्लग, गैबियन और रॉकफिल डैम पानी की रफ्तार कम करने और मिट्टी कटाव रोकने में सहायक होते हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की गाइडलाइन में गांव और पंचायत स्तर पर ढलान व भूगर्भीय स्थिति के अनुसार इन संरचनाओं की उपयोगिता बताई गई है।

घरों और भवनों में वर्षा जल संचयन

प्रधानमंत्री जल संचय योजना को सफल बनाने में घरों, स्कूलों, कार्यालयों और व्यावसायिक भवनों की भी बड़ी भूमिका है। यदि हर भवन अपनी छत का पानी बचाए, तो शहरों और गांवों में जल संकट काफी कम हो सकता है।

रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग क्या है?

रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग में छत पर गिरने वाले बारिश के पानी को पाइप के माध्यम से टैंक या रिचार्ज पिट में भेजा जाता है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार, इस सिस्टम में छत, पाइप, जाली फिल्टर, फर्स्ट फ्लश व्यवस्था, फिल्टर, स्टोरेज टैंक और रिचार्ज पिट जैसे घटक शामिल हो सकते हैं।

कितना पानी बचाया जा सकता है?

एक आसान अनुमान के अनुसार:

संग्रहित पानी = बारिश मिलीमीटर में × छत का क्षेत्र वर्ग मीटर में × 0.8

CGWB गाइडलाइन में 0.8 रनऑफ कोएफिशिएंट का उपयोग कर छत से उपलब्ध पानी का अनुमान लगाने की बात कही गई है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी घर की छत 100 वर्ग मीटर है और क्षेत्र में 700 मिमी बारिश होती है, तो अनुमानित संग्रहित पानी होगा:

700 × 100 × 0.8 = 56,000 लीटर

यह पानी सीधे पीने योग्य नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन फिल्टर और उचित व्यवस्था के बाद इसे भूजल रिचार्ज या घरेलू गैर-पीने योग्य उपयोगों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

जल संचय संरचना बनाने से पहले ध्यान रखने वाली बातें

जल संरक्षण संरचना बनाते समय केवल गड्ढा खोद देना काफी नहीं है। सही योजना, सही स्थान और रखरखाव बहुत जरूरी है।

जरूरी सावधानियां

CGWB ने यह भी बताया है कि रिचार्ज सिस्टम की उपयोगिता स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है, इसलिए डिजाइन और रखरखाव में सावधानी जरूरी है।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना में आवेदन कैसे करें?

चूंकि प्रधानमंत्री जल संचय योजना अलग नाम से हर राज्य में एक समान आवेदन पोर्टल वाली योजना नहीं है, इसलिए आवेदन प्रक्रिया राज्य और संबंधित कार्यक्रम पर निर्भर करती है। किसान और ग्रामीण परिवार निम्न माध्यमों से जानकारी ले सकते हैं:

आवेदन या लाभ लेने के संभावित माध्यम

  1. ग्राम पंचायत कार्यालय
  2. ब्लॉक विकास कार्यालय
  3. जिला जल शक्ति केंद्र
  4. कृषि विभाग
  5. उद्यान विभाग
  6. मनरेगा कार्यालय
  7. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पोर्टल
  8. राज्य सरकार की कृषि या जल संसाधन वेबसाइट
  9. CSC केंद्र
  10. जिला पंचायत या जल संसाधन विभाग

जल शक्ति अभियान के तहत प्रत्येक जिला मुख्यालय पर जल शक्ति केंद्र को जल संरक्षण तकनीकों की जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बताई गई है।

आवेदन के लिए संभावित दस्तावेज

अलग-अलग राज्यों में दस्तावेज अलग हो सकते हैं, लेकिन सामान्य रूप से ये दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:

दस्तावेज उपयोग
आधार कार्ड पहचान प्रमाण
भूमि रिकॉर्ड किसान और भूमि सत्यापन
बैंक पासबुक DBT या अनुदान भुगतान
मोबाइल नंबर OTP और सूचना
पासपोर्ट फोटो आवेदन रिकॉर्ड
जाति प्रमाण पत्र आरक्षित श्रेणी लाभ के लिए
खेत का नक्शा जल संरचना योजना
पंचायत सत्यापन स्थानीय स्वीकृति
सिंचाई स्रोत की जानकारी तकनीकी मूल्यांकन

किन किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है?

प्रधानमंत्री जल संचय योजना जैसी पहल खास तौर पर उन किसानों के लिए उपयोगी है, जिनके क्षेत्र में पानी की कमी, भूजल गिरावट या अनियमित बारिश की समस्या है।

इन किसानों को अधिक लाभ हो सकता है:

जल संचय और आधुनिक खेती

आज खेती केवल अधिक पानी देने से सफल नहीं होती, बल्कि सही समय पर सही मात्रा में पानी देने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। जल संचय के साथ यदि किसान आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाएं, तो पानी की बचत और उत्पादन दोनों में सुधार हो सकता है।

उपयोगी तकनीकें

“प्रति बूंद अधिक फसल” का उद्देश्य खेत स्तर पर जल उपयोग दक्षता बढ़ाना और ड्रिप-स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना की चुनौतियां

जल संरक्षण योजनाएं तभी सफल होती हैं, जब उनका रखरखाव सही हो और लोग उनका उपयोग समझदारी से करें। कई जगह संरचनाएं बन जाती हैं, लेकिन सफाई और देखभाल न होने से उनका असर कम हो जाता है।

प्रमुख चुनौतियां

इन चुनौतियों को दूर करने के लिए पंचायत स्तर पर जल समिति, नियमित सफाई, स्थानीय प्रशिक्षण और सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

किसान अपने स्तर पर क्या कर सकते हैं?

सरकारी योजना का इंतजार करने के साथ-साथ किसान अपने खेत और गांव में छोटे-छोटे कदम उठाकर जल संरक्षण कर सकते हैं।

किसानों के लिए आसान उपाय

  1. खेत की मेड़बंदी करें
  2. खेत तालाब बनवाने की जानकारी लें
  3. नाली का पानी खेत से बाहर न जाने दें
  4. ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाएं
  5. फसल के अनुसार सिंचाई करें
  6. मल्चिंग से नमी बचाएं
  7. गर्मियों से पहले तालाब और कुएं की सफाई करें
  8. पंचायत में जल संरक्षण प्रस्ताव रखें
  9. वर्षा जल संचयन को सामुदायिक अभियान बनाएं
  10. कम पानी वाली फसलों को अपनाएं

प्रधानमंत्री जल संचय योजना और ग्रामीण विकास

जल संचय केवल पानी बचाने का कार्य नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास का मजबूत आधार है। जब गांव में पानी उपलब्ध रहता है, तो खेती, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और घरेलू जीवन सभी में सुधार होता है। इससे गांव से पलायन कम हो सकता है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

मनरेगा जैसे कार्यक्रमों में जल संरक्षण और जल संचयन संरचनाओं को शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ टिकाऊ जल संपत्ति भी बन सकती है।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

बिंदु जानकारी
लोकप्रिय खोज नाम प्रधानमंत्री जल संचय योजना
आधिकारिक संबंधित पहल जल संचय जन भागीदारी
मुख्य मंत्रालय जल शक्ति मंत्रालय
प्रमुख लक्ष्य जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज
किसानों को लाभ सिंचाई सुविधा, लागत में कमी, जल सुरक्षा
प्रमुख संरचनाएं चेक डैम, तालाब, रिचार्ज पिट, रूफटॉप हार्वेस्टिंग
संबंधित योजना PMKSY, जल शक्ति अभियान, अटल भूजल योजना
भागीदारी सरकार, पंचायत, किसान, नागरिक, CSR

FAQ: प्रधानमंत्री जल संचय योजना

प्रधानमंत्री जल संचय योजना क्या है?

प्रधानमंत्री जल संचय योजना नाम से लोग केंद्र सरकार की जल संरक्षण पहलों को खोजते हैं। आधिकारिक रूप से यह विषय जल संचय जन भागीदारी, जल शक्ति अभियान: कैच द रेन और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसे कार्यक्रमों से जुड़ा है।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज, जल स्रोतों का संरक्षण और किसानों को सिंचाई में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।

क्या प्रधानमंत्री जल संचय योजना किसानों के लिए लाभदायक है?

हां, यह किसानों के लिए उपयोगी है क्योंकि जल संचय से खेतों में सिंचाई की उपलब्धता बढ़ सकती है, भूजल स्तर सुधर सकता है और सिंचाई लागत कम हो सकती है।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना में आवेदन कहां करें?

किसान अपने ग्राम पंचायत, ब्लॉक कार्यालय, कृषि विभाग, जल संसाधन विभाग, मनरेगा कार्यालय या जिला जल शक्ति केंद्र से जानकारी ले सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया राज्य और संबंधित योजना पर निर्भर करती है।

जल संचय के लिए कौन-कौन सी संरचनाएं बनाई जाती हैं?

चेक डैम, खेत तालाब, रिचार्ज पिट, रिचार्ज शाफ्ट, परकोलेशन टैंक, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग, गली प्लग और गैबियन संरचना जैसी संरचनाएं बनाई जा सकती हैं।

क्या घर की छत का पानी भी बचाया जा सकता है?

हां, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए घर, स्कूल, ऑफिस और भवनों की छत का पानी टैंक या रिचार्ज पिट में भेजा जा सकता है।

प्रधानमंत्री जल संचय योजना का संबंध PMKSY से है?

हां, जल संरक्षण और सिंचाई सुधार के संदर्भ में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना यानी PMKSY महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य खेतों तक पानी पहुंचाना और जल उपयोग दक्षता बढ़ाना है।

भूजल रिचार्ज क्यों जरूरी है?

भूजल रिचार्ज से कुएं, हैंडपंप और बोरवेल लंबे समय तक पानी दे सकते हैं। इससे पेयजल और सिंचाई दोनों में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री जल संचय योजना आज के समय में जल संरक्षण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण खोज विषय है। सरकारी संदर्भ में यह जल संचय जन भागीदारी, जल शक्ति अभियान, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मनरेगा, अटल भूजल योजना और मिशन अमृत सरोवर जैसी पहलों से जुड़ा है। इसका असली उद्देश्य बारिश के पानी को गांव और शहर में रोकना, भूजल को रिचार्ज करना और किसानों को टिकाऊ सिंचाई सुविधा देना है।

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में पानी बचाना सीधे किसान की आय, फसल उत्पादन और ग्रामीण विकास से जुड़ा है। इसलिए जल संचय को केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की जरूरत है। यदि किसान, पंचायत, नागरिक और सरकार मिलकर काम करें, तो हर गांव में जल सुरक्षा मजबूत हो सकती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी का बेहतर भविष्य तैयार किया जा सकता है।

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