रबी से पहले DAP का स्टॉक मजबूत, 23.5 लाख टन पहुंचा भंडार; सब्सिडी पर बढ़ा दबाव

रबी 2026-27 से पहले DAP का स्टॉक करीब 23.5 लाख टन पहुंचा, जो पिछले साल से 17% ज्यादा है। यूपी में स्टॉक 31.4% बढ़ा, लेकिन सब्सिडी पर दबाव बढ़ रहा है।

रबी सीजन से पहले DAP खाद का मजबूत स्टॉक

रबी 2026-27 सीजन की शुरुआत से पहले देश में DAP यानी डाय-अमोनियम फॉस्फेट का स्टॉक पिछले साल की तुलना में बेहतर स्थिति में है। 30 सितंबर तक देश में DAP का स्टॉक करीब 23.5 लाख टन बताया गया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 17 प्रतिशत अधिक है। रबी सीजन में गेहूं, सरसों, चना और अन्य प्रमुख फसलों की बुवाई के दौरान DAP की मांग बढ़ती है। ऐसे में शुरुआती स्तर पर मजबूत स्टॉक किसानों के लिए खाद की उपलब्धता के लिहाज से राहत देने वाला संकेत माना जा रहा है।

उत्तर भारत के प्रमुख रबी उत्पादक राज्यों में भी DAP की स्थिति पिछले साल की तुलना में बेहतर बताई गई है। पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्टॉक बढ़ा हुआ है। खास तौर पर उत्तर प्रदेश में DAP का स्टॉक 6.27 लाख टन से अधिक रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 31.4 प्रतिशत ज्यादा है। उत्तर प्रदेश में रबी सीजन के दौरान गेहूं के साथ दलहन और तिलहन की खेती बड़े पैमाने पर होती है, इसलिए DAP की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

रबी से पहले बढ़ा DAP स्टॉक

रबी सीजन में किसानों को फसलों की शुरुआती बढ़वार के लिए फॉस्फोरस और नाइट्रोजन की जरूरत होती है। DAP दोनों पोषक तत्व उपलब्ध कराने वाला प्रमुख फॉस्फेटिक उर्वरक है। यही वजह है कि रबी की बुवाई शुरू होने से पहले इसकी उपलब्धता पर विशेष नजर रहती है।

30 सितंबर तक 23.5 लाख टन के आसपास DAP स्टॉक होना पिछले साल के मुकाबले बेहतर स्थिति को दर्शाता है। करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर फॉस्फेटिक उर्वरकों की कीमतों और आपूर्ति को लेकर लगातार दबाव बना हुआ है।

मजबूत शुरुआती स्टॉक का सीधा फायदा यह हो सकता है कि रबी की शुरुआती मांग को पूरा करने के लिए बाजार में तत्काल दबाव कम रहे। यदि राज्यों तक समय पर खाद पहुंचती रहती है तो किसानों को बुवाई के समय DAP के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

उत्तर भारत के राज्यों में भी बेहतर स्थिति

देश के प्रमुख रबी राज्यों में DAP की उपलब्धता इस समय पिछले वर्ष की तुलना में मजबूत बताई जा रही है। पंजाब और हरियाणा में गेहूं की खेती के बड़े क्षेत्र को देखते हुए DAP की मांग महत्वपूर्ण रहती है। इसी तरह मध्य प्रदेश और राजस्थान में गेहूं के अलावा दलहन और तिलहन फसलों के लिए भी फॉस्फेटिक उर्वरकों की जरूरत रहती है।

उत्तर प्रदेश में स्थिति खास तौर पर उल्लेखनीय है। राज्य में 30 सितंबर तक DAP का स्टॉक 6.27 लाख टन से ज्यादा रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 31.4 प्रतिशत अधिक है। राज्य में रबी सीजन की शुरुआत के साथ खाद की मांग में तेजी आने की संभावना रहती है। ऐसे में शुरुआती स्टॉक का मजबूत होना आपूर्ति व्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जा सकता है।

हालांकि, केवल शुरुआती स्टॉक का बढ़ा होना ही पर्याप्त नहीं है। रबी सीजन के दौरान किसानों की वास्तविक मांग, राज्यों की उठान, वितरण व्यवस्था और आगे होने वाली आवक भी यह तय करेगी कि पूरे सीजन में DAP की उपलब्धता कैसी रहती है।

मांग बढ़ने के साथ स्टॉक पर रहेगा दबाव

रबी की बुवाई आगे बढ़ने के साथ DAP की मांग में तेजी आना स्वाभाविक है। गेहूं और दूसरी रबी फसलों की बुवाई के समय किसान खेत की तैयारी के साथ बेसल डोज के रूप में फॉस्फेटिक उर्वरकों का इस्तेमाल करते हैं।

इस कारण अक्टूबर और नवंबर के दौरान DAP की मांग पर विशेष दबाव रह सकता है। शुरुआती स्टॉक मजबूत होने के बावजूद यदि राज्यों की मांग अनुमान से अधिक रहती है तो उपलब्ध भंडार तेजी से कम हो सकता है।

यही वजह है कि सरकार और उर्वरक कंपनियों के लिए केवल मौजूदा स्टॉक पर निर्भर रहने के बजाय लगातार नई खेप की व्यवस्था करना जरूरी होगा। बंदरगाहों से राज्यों तक आपूर्ति, आयात और घरेलू उत्पादन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना रबी सीजन की खाद व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

सब्सिडी पर बढ़ रहा दबाव

DAP का स्टॉक मजबूत होने के बावजूद उर्वरक क्षेत्र के सामने एक बड़ी चुनौती सब्सिडी का बढ़ता दबाव है। DAP सहित फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों की कीमतें वैश्विक बाजार में होने वाले बदलावों से प्रभावित होती हैं। कच्चे माल और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का असर आयात लागत पर पड़ता है।

भारत में किसानों को उर्वरक अपेक्षाकृत नियंत्रित कीमतों पर उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमत और घरेलू बिक्री मूल्य के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए सरकार को सब्सिडी का सहारा लेना पड़ता है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में DAP और इसके कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो सरकार पर सब्सिडी का वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। इसका असर सरकारी बजट पर पड़ने के साथ-साथ उर्वरक कंपनियों की आयात और आपूर्ति योजना पर भी पड़ सकता है।

किसानों के लिए कीमत और उपलब्धता दोनों अहम

किसानों के लिए DAP की सबसे बड़ी चिंता केवल यह नहीं है कि खाद की कीमत कितनी है, बल्कि यह भी है कि जरूरत के समय खाद उपलब्ध है या नहीं। रबी सीजन में बुवाई का समय निकल जाने के बाद खाद की उपलब्धता का लाभ सीमित हो जाता है।

इसलिए 30 सितंबर तक मजबूत स्टॉक किसानों के लिए सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन आने वाले हफ्तों में वितरण व्यवस्था की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण होगी। यदि उपलब्ध स्टॉक राज्यों और जिलों तक समय पर पहुंचता है और नई आपूर्ति भी बनी रहती है तो रबी की शुरुआती मांग को संभालना आसान होगा।

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य में 6.27 लाख टन से अधिक DAP स्टॉक विशेष महत्व रखता है। राज्य में गेहूं और अन्य रबी फसलों की व्यापक खेती होने के कारण अक्टूबर-नवंबर में खाद की मांग तेजी से बढ़ सकती है।

आपूर्ति श्रृंखला पर रहेगी नजर

रबी सीजन के दौरान DAP की उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र, राज्य सरकारों और उर्वरक कंपनियों के बीच समन्वय जरूरी होगा। स्टॉक बढ़ने के साथ-साथ इसकी वास्तविक उपलब्धता तभी सुनिश्चित मानी जाएगी जब खाद किसानों तक समय पर पहुंच सके।

कई बार राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसी खास जिले या क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन की स्थिति बन सकती है। इसलिए राज्यवार और जिला स्तर पर वितरण की निगरानी महत्वपूर्ण होगी।

इस बार शुरुआती आंकड़े यह संकेत देते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में DAP की स्थिति बेहतर है। लेकिन रबी सीजन लंबा है और मांग कई चरणों में सामने आती है। इसलिए आगे की आवक और वितरण पर लगातार नजर रखना जरूरी रहेगा।

मजबूत स्टॉक से मिली शुरुआती राहत

कुल मिलाकर रबी 2026-27 की शुरुआत से पहले DAP का करीब 23.5 लाख टन स्टॉक पिछले साल की तुलना में बेहतर तस्वीर पेश करता है। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी और उत्तर प्रदेश में करीब 31.4 प्रतिशत अधिक स्टॉक शुरुआती आपूर्ति व्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख रबी राज्यों में बेहतर स्टॉक से बुवाई के शुरुआती चरण में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, रबी सीजन में मांग बढ़ने के साथ इस स्टॉक पर दबाव भी बढ़ेगा।

दूसरी ओर, वैश्विक उर्वरक बाजार की कीमतों और आयात लागत के कारण सब्सिडी पर वित्तीय दबाव एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। इसलिए आने वाले महीनों में सरकार के सामने दोहरी जिम्मेदारी होगी—एक तरफ किसानों को समय पर DAP उपलब्ध कराना और दूसरी तरफ बढ़ती सब्सिडी लागत को नियंत्रित रखना।

रबी सीजन की शुरुआत में DAP का स्टॉक मजबूत होना निश्चित रूप से राहत की खबर है, लेकिन पूरे सीजन में खाद की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगातार आपूर्ति, बेहतर वितरण और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर रखना उतना ही जरूरी होगा।

 

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