कृषि विज्ञान केंद्र उजवा में वैज्ञानिक बकरी पालन प्रशिक्षण संपन्न, युवाओं को स्वरोजगार के लिए किया प्रेरित

Scientific goat rearing training completed at Krishi Vigyan Kendra Ujwa, youth motivated for self-employment

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), उजवा, नई दिल्ली द्वारा आयोजित 10 दिवसीय “वैज्ञानिक बकरी पालन प्रशिक्षण” कार्यक्रम का सफल समापन किया गया। यह प्रशिक्षण आयोजित हुआ, जिसमें दिल्ली सहित हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान से आए 27 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, छोटे एवं सीमांत किसानों तथा शिक्षित बेरोजगारों को आधुनिक बकरी पालन तकनीकों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था।

कार्यक्रम की शुरुआत में कृषि विज्ञान केंद्र, दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. डी. के. राणा ने कहा कि कम लागत में अधिक लाभ देने वाला बकरी पालन छोटे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए सबसे उपयुक्त व्यवसाय बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि बकरी पालन न केवल किसानों की अतिरिक्त आय का साधन है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देता है।

डॉ. राणा ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन और अन्य पशुपालन आधारित व्यवसायों से किसानों और युवाओं को जोड़कर उनकी क्षमता विकास की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों से वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर बकरी पालन को व्यावसायिक रूप देने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण के दौरान केंद्र के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. जय प्रकाश ने प्रशिक्षुओं को बकरियों की विभिन्न नस्लों, जलवायु के अनुसार उपयुक्त पालन-पोषण, चारा प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन और आवासीय व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बकरियों में होने वाले जीवाणु एवं विषाणु जनित रोगों के लक्षणों और उनकी रोकथाम के वैज्ञानिक उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की।

केवीके हनुमानगढ़ के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. मुकेश ने वर्चुअल माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने नवजात मेमनों की देखभाल, बकरी के प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात प्रबंधन और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शुरुआती अवस्था में उचित देखभाल से पशु मृत्यु दर कम की जा सकती है और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

वहीं, केवीके नोहर के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. विक्रमजीत ने प्रतिभागियों को बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने के दौरान आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में अवगत कराया। उन्होंने सरकारी योजनाओं और अनुदान संबंधी जानकारी साझा करते हुए कहा कि सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, जिनका लाभ उठाकर किसान कम लागत में अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

केवीके सिरसा के प्रसार विशेषज्ञ डॉ. हरदीप कलकल ने व्यवसायिक बकरी पालन में रिकॉर्ड प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि व्यवस्थित रूप से फार्म और पशुओं का रिकॉर्ड रखने से उत्पादन, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रबंधन को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने परजीवी रोगों और उनके नियंत्रण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी।

सीएसडब्ल्यूआरआई, अविकानगर (टोंक) के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद सोनी ने बकरी के दूध और मांस से तैयार होने वाले विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से किसान बकरी पालन के माध्यम से अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान किसानों को आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य कर रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन एवं फीडबैक लिया गया, जिसके बाद उन्हें प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें वैज्ञानिक बकरी पालन की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई, जिसे वे अपने व्यवसाय में लागू कर सकेंगे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. ऋतू सिंह, श्री राकेश कुमार, डॉ. समर पाल सिंह तथा श्री बृजेश कुमार का विशेष सहयोग रहा। कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पशुपालन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

 

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