1 मई 2026 तक ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई में बढ़ोतरी, 81.60 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा रकबा

Sowing of summer crops increased, area reached 81.60 lakh hectares by May 1, 2026

देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई ने इस वर्ष रफ्तार पकड़ ली है। 1 मई 2026 तक कुल 81.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (79.00 लाख हेक्टेयर) की तुलना में 2.60 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह वृद्धि किसानों के बढ़ते रुझान और अनुकूल परिस्थितियों का संकेत देती है।

कुल तस्वीर: खेती में सकारात्मक संकेत

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार ग्रीष्मकालीन फसलों के तहत क्षेत्रफल में कुल मिलाकर बढ़ोतरी देखने को मिली है। खासकर मोटे अनाज (श्रीअन्न) और तिलहन फसलों ने इस वृद्धि में अहम योगदान दिया है। वहीं, कुछ फसलों में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई है।

चावल में हल्की गिरावट

देश में ग्रीष्मकालीन चावल की बुवाई 31.05 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (32.42 लाख हेक्टेयर) से 1.36 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि, यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन यह संकेत देती है कि किसान कुछ हद तक अन्य फसलों की ओर शिफ्ट कर रहे हैं।

दालों में बढ़ा रुझान

दालों की बुवाई में इस साल सकारात्मक बढ़त दर्ज हुई है।

फसलवार स्थिति:

यह आंकड़े दर्शाते हैं कि किसानों का झुकाव दलहन उत्पादन की ओर बना हुआ है, जो पोषण सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

 

मोटे अनाज (श्रीअन्न) में शानदार उछाल

सरकार द्वारा श्रीअन्न को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर साफ दिखाई दे रहा है।

प्रमुख फसलें:

यह बढ़त इस बात का संकेत है कि किसान अब पोषण और बाजार मांग दोनों को ध्यान में रखकर फसल चयन कर रहे हैं।

तिलहन फसलों में भी मजबूती

तिलहन के क्षेत्र में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है:

फसलवार प्रदर्शन:

खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को देखते हुए यह बढ़ोतरी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्यों बढ़ा बुवाई क्षेत्र?

विशेषज्ञों के अनुसार इस वृद्धि के पीछे कई कारण हैं:

आगे क्या संकेत मिलते हैं?

कुल मिलाकर, ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई के ताजा आंकड़े कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। हालांकि, चावल जैसी पारंपरिक फसल में हल्की गिरावट चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन मोटे अनाज और तिलहन में बढ़ोतरी संतुलन बनाए हुए है।

अगर मौसम अनुकूल बना रहता है और किसानों को सही समर्थन मिलता है, तो इस वर्ष उत्पादन में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिल सकती है।

1 मई 2026 तक के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय कृषि धीरे-धीरे विविधता की ओर बढ़ रही है। किसान अब केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नई संभावनाओं और बाजार की मांग के अनुसार निर्णय ले रहे हैं। यही बदलाव आने वाले समय में कृषि क्षेत्र को और मजबूत बना सकता है।

 

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