नमामि गंगे कार्यक्रम की स्थिति: 2014 से 2026 तक गंगा संरक्षण में बड़े सुधार दर्ज

केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत वर्ष 2014 से 15 मार्च 2026 तक गंगा और उसकी सहायक नदियों के पुनर्जीवन के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किया गया है। जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में इसकी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

 

अब तक ₹21,340 करोड़ जारी, 524 परियोजनाओं में 68% पूर्ण

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक कुल ₹21,340 करोड़ विभिन्न एजेंसियों को जारी किए, जिसमें ₹16,025.97 करोड़ केवल सीवेज ट्रीटमेंट परियोजनाओं के लिए हैं।

 

सीवेज प्रबंधन में अभूतपूर्व प्रगति

पिछले पाँच वर्षों में—

औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण में भी मथुरा CETP (6.25 MLD) और जाजमऊ CETP (20 MLD) दो प्रमुख परियोजनाएँ पूरी की गईं।

 

जैव विविधता संरक्षण में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

1. बायोडायवर्सिटी पार्क और वेटलैंड्स

2. वनरोपण

3. मत्स्य संरक्षण

4. जलजीव प्रजाति संरक्षण

कछुआ संरक्षण

SMART-आधारित रिवर पेट्रोलिंग

 

जल गुणवत्ता में सुधार: CPCB के आँकड़े

pH और DO

गंगा के सभी मापस्थलों पर स्नान मानकों के अनुरूप पाए गए।

BOD

Uttarakhand, Bihar, Jharkhand, West Bengal में सभी स्थान उपयुक्त;
UP के कुछ स्थानों पर सुधार की आवश्यकता—

फीकल कॉलिफॉर्म में उल्लेखनीय गिरावट

वाराणसी (अस्सी घाट)

पटना (गांधी घाट)

यह साफ दर्शाता है कि प्रदूषण नियंत्रण उपाय प्रभावी साबित हो रहे हैं।

 

बायोमॉनिटरिंग रिपोर्ट (2024–25)

गंगा व उसकी सहायक नदियों के 50 स्थलों और यमुना बेसिन के 26 स्थलों पर जैविक जल गुणवत्ता गुड से मॉडरेट के बीच पाई गई। विविध जलीय जीवों की उपस्थिति नदी पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर क्षमता को दर्शाती है।

 

सरकार द्वारा संचालित नमामि गंगे कार्यक्रम ने

गंगा की जल गुणवत्ता में निरंतर सुधार इस कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और दीर्घकालिक संरक्षण योजना का प्रमाण है।

 

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