घास की कला ने मुन्नी को दिलायी अलग पहचान

Published on: February 23, 2021 (05:41 IST)

मधुबनी की महिलाएं अपने और परिवार केवल हाथ से बनाये जाने वाली सिक्की कला के दम पर आर्थिक स्थिति को सुधारने के साथ दूसरों को भी स्वावलंबी होने का संदेश दे रही हैं।

मुन्नी देवी ने की पहल

सिक्की घास से बनी कलाकृतियों को गांव से निकल कर शहर में पहुंचाने में मुन्नी देवी का अनोखा रोल है। इस कला की शुरुआत कैसी हुई? यह पूछने पर मुन्नी देवी बताती हैं कि यह लगभग 18 साल पहले की बात है। शादी के बाद जब वह अपने ससुराल आई तब उन्होंने देखा कि उनके घर में सिक्की घास की कई तरह की कलाकृतियां बनायी जा रही है। मन में थोड़ी उत्सुकता हुई कि घास से कैसे कोई सामान बनाया जा सकता है? मुन्नी कहती है कि उनका मायका जनकपुर (नेपाल) में है। शादी के बाद जब वह ससुराल आयी तो इस कला को देख कर ताज्जुब हुआ। वहां इस प्रकार की कोई चीज नहीं होती थी। उनके घर में उनकी सास, ननद सब इस काम को कर रही थी। उत्सुकता में आकर मैंने भी इसे सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे शुरू हुआ यह काम अब गति पकड़ चुका है।

कई तरह की बनायी जाती है कलाकृतियां

इस कला में अपना एक अलग मुकाम बना चुकी मुन्नी देवी बताती हैं कि सिक्की घास से कई तरह के सामान बनते हैं जैसे चंगेरी, रोटी का डिब्बा, कछुआ, गणेश मुख, डिब्बा, चाभी रिंग, कलम सेट, देवी, चेन, चिड़िया, गले का हार, चूड़ी, पायल, कान की बाली इत्यादि। मुन्नी बताती हैं कि इनमें से कुछ तो हमेशा बनता रहता है लेकिन कुछ सामानों को ऑर्डर मिलने पर भी बनाया जाता है। इन सामानों का दाम भी अलग-अलग होता है।

ऑर्डर मिलने पर काम में जुटती हैं महिलाएं

मुन्नी बताती है कि वैसे तो यह काम पहले भी होता रहा है लेकिन कोई एकत्र होकर सिक्की का काम नहीं करता था। जिसके घर में अगर यह काम हो रहा है तो वह इसे बाजार तक लाने के लिए नहीं सोचता था। गुजरते वक्त के साथ जब उन लोगों की सिक्की की धूम गांव से बाहर निकल कर मेट्रो शहर तक पहुंची तब लोगों में जागृति आई। मुन्नी बताती है कि आज सिक्की की कला में 37 महिलाएं लगी हुई हैं जिसमें 27 महिलाएं और 10 लड़कियां शामिल हैं। मुन्नी बताती हैं कि इन महिलाओं ने इस काम में खुद को ढाल लिया है। लड़कियां पढ़ाई करने के बाद सिक्की के काम में हाथ बंटाती हैं। इन महिलाओं ने सिक्की के काम में उपयोग होने वाले सारे सामानों की खरीदारी से लेकर इसकी मार्केटिंग और आपूर्ति सब अपने हाथ में ले रखा है। वह अपने बलबूते इस काम को करती हैं। मुन्नी देवी बताती हैं कि घर के पुरुष इन कामों में थोड़ा बहुत हाथ बंटाते हैं लेकिन सारे जरूरी काम खुद महिलाएं ही करती हैं। सिक्की के लिए जरूरी कच्चा माल जैसे सिक्की घास, रंग, तार, सावे इत्यादि को महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों से खरीदती हैं।

जीविका का रहा योगदान

मुन्नी देवी बताती हैं कि दिल्ली के व्यापारी राजीव सेठी ने जब उनके काम को देखा और खुद ही इनसे माल बनाने का ऑर्डर दिया तब इनकी कला को बाहर के लोगों ने पहचाना। इसी बीच जीविका की टीम भी सिक्की कला को देखने पहुंची। इनके काम के प्रति लगन को देखते हुए जीविका ने भी सहयोग किया और काम करने को लेकर प्रेरित किया। संस्था बनने के बाद इन महिलाओं की राह और आसान हो गयी।

देश के अलावा और विदेशों में भी कला की पहचान

मुन्नी देवी बताती हैं कि इस कला के कद्रदान बड़े शहरों और विदेशों में बहुत हैं। वह कहती हैं कि जो सामान यहां औने-पौने दाम में बिकता है, वहीं सामान बड़े शहरों और विदेशों में हजारों-लाखों में बिकता है। वह बताती हैं कि ब्रिकी के लिहाज से बिहार में गया और राजधानी दिल्ली सबसे अच्छा बाजार है। मुन्नी देवी इसके अलावा सिक्की से बनी लाइट, कुर्सी भी बनाती हैं जिसकी कीमत 12 हजार और 18 हजार रुपये है।

देश भर में लग चुका है सिक्की का स्टॉल, कई पुरस्कार मिले

सिक्की जैसी कला के क्षेत्र में अलग पहचान बनाने वाली मुन्नी देवी बताती हैं कि देश के कई बड़े शहरों जैसे दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई के अलावा बिहार के पटना, गया, राजगीर जैसे जगहों पर इनका स्टॉल लग चुका है। सिक्की कला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का इनाम भी यह ले चुकी हैं। बिहार सरकार ने मुन्नी देवी को 22 हजार रुपया देकर प्रथम पुरस्कार से नवाजा था। मुन्नी देवी खुश होकर कहती हैं कि उनको मिलने वाला पुरस्कार इलाके में पहला पुरस्कार था। पहली बार किसी महिला या पुरुष को पुरस्कार मिला था।

अब कुछ और नया करने की कोशिश

सिक्की कला में अपना लोहा मनवाने के बाद यह महिलाएं अब अपने आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए बचत पर ध्यान दे रही हैं। इन महिलाओं ने ‘मिथिला कला संघ’ के नाम से एक संस्था भी बनायी हैं। इस संस्था से जुड़ी प्रति व्यक्ति दस रुपये की बचत करती हैं। इन पैसों का उपयोग घरेलू काम और अन्य आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए करती हैं। इसके अलावा इन महिलाओं ने अब कंप्यूटर प्रशिक्षण लेना भी शुरू कर दिया है।

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