बायो-एग्री नेक्स्ट 2026 का सफल समापन, वैश्विक कृषि नवाचार की दिशा में एक मजबूत कदम

Successful completion of Bio-Agri Next 2026, a strong step towards global agricultural innovation

भारत में कृषि जैविक क्षेत्र, सतत खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों को नई दिशा देने वाले प्रतिष्ठित वैश्विक आयोजन “बायो-एग्री नेक्स्ट ग्लोबल कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो 2026” का दूसरा संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस भव्य आयोजन ने कृषि क्षेत्र में नवाचार, जैविक समाधान, तकनीकी प्रगति और वैश्विक साझेदारी के नए आयाम स्थापित किए। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन स्नेल इंटीग्रल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया, जिसमें देश-विदेश से कृषि वैज्ञानिक, उद्योगपति, स्टार्टअप, नीति-निर्माता, शोधकर्ता, निवेशक और कृषि क्षेत्र से जुड़े हजारों प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कृषि जैविक उत्पादों, सतत खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना था। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि आने वाले समय में कृषि का भविष्य केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, जैविक नवाचार और तकनीकी समन्वय पर आधारित होगा।

कृषि जैविक क्षेत्र के लिए एक वैश्विक मंच

बायो-एग्री नेक्स्ट 2026 केवल एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि यह विचारों, तकनीकों और भविष्य की संभावनाओं का संगम बनकर सामने आया। सम्मेलन में आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों, पैनल चर्चाओं, सीईओ एवं सीएक्सओ राउंडटेबल, उत्पाद प्रदर्शनियों और बी2बी नेटवर्किंग बैठकों ने प्रतिभागियों को नई संभावनाओं से परिचित कराया।

सम्मेलन में कृषि जैविक उत्पाद, माइक्रोबियल तकनीक, बायो-फर्टिलाइजर, बायो-पेस्टीसाइड, फसल पोषण, मिट्टी स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर और कृषि स्टार्टअप जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि भारत को वैश्विक कृषि शक्ति बनना है, तो उसे नवाचार आधारित जैविक कृषि समाधानों को तेजी से अपनाना होगा।

उद्योग विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार

कार्यक्रम में कृषि उद्योग से जुड़े कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने अपने विचार साझा किए।
प्रशांत धरपुरे ने उभरते एग्री-बिजनेस की चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और सहयोग ही भविष्य की सफलता का आधार बनेंगे। उन्होंने टिकाऊ और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले कृषि समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. सावन कुमार ने गुणवत्ता, नियामकीय सुधार और सतत नवाचार को कृषि के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, बेहतर गुणवत्ता वाले जैविक उत्पाद किसानों के भरोसे को मजबूत करेंगे और कृषि उत्पादकता में वृद्धि करेंगे।

किरण अंतरे ने कृषि स्टार्टअप और तकनीक आधारित समाधानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि युवा उद्यमियों और स्टार्टअप्स के माध्यम से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव हैं।

डॉ. शंकर गंगाधरन ने भविष्य की कृषि प्रणालियों में तकनीकी सहयोग और उद्योग सहभागिता को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में नवाचार आधारित कृषि मॉडल ही किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे।

मोहनिश दुसारिया ने फसल पोषण और एकीकृत कृषि समाधानों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आधुनिक कृषि में टिकाऊ तकनीकों का उपयोग बेहद जरूरी है।

अनुसंधान आधारित जैविक तकनीकों पर जोर

सम्मेलन में कई वैज्ञानिकों ने कृषि जैविक तकनीकों और शोध आधारित समाधानों पर महत्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ दीं।
डॉ. प्रफुल गाडगे ने शोध आधारित जैविक तकनीकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि विज्ञान आधारित कृषि समाधान ही भविष्य में पर्यावरण संतुलन और उत्पादकता को बनाए रख सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने एकीकृत पोषण प्रबंधन और आधुनिक कृषि पारिस्थितिकी तंत्र पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि कृषि में नवाचार, स्थिरता और दक्षता का समन्वय आवश्यक है।

सुशील कुमार बहुगुणा ने उन्नत फॉर्मूलेशन और जैविक उत्पादों की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। उनके अनुसार, आधुनिक खेती में बायोलॉजिकल समाधान तेजी से किसानों की पहली पसंद बन रहे हैं।

सतीश तिवारी ने एकीकृत फसल पोषण और पर्यावरण संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की खेती केवल अधिक उत्पादन नहीं, बल्कि टिकाऊ उत्पादन पर आधारित होगी।

 

जैविक और माइक्रोबियल तकनीकों की बढ़ती भूमिका

कार्यक्रम में माइक्रोबियल तकनीकों और जैविक कृषि समाधानों पर विशेष ध्यान दिया गया।
डॉ. रेणुका दीवान ने हरित और स्वस्थ भविष्य के लिए जैविक समाधानों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. राजीव द्विवेदी ने जलवायु परिवर्तन के दौर में पुनर्योजी कृषि और जलवायु-लचीली तकनीकों की आवश्यकता पर जोर दिया।

राज कुमार अग्रवाल ने सतत कृषि परिवर्तन में नवाचार आधारित रणनीतियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ गिज्स मैनवेल्ड, जो एपिलॉजिक जीएमबीएच एग्रारबायोलॉजिकल रिसर्च एंड कंसल्टिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, ने फंगल रोगों के विरुद्ध बायोकंट्रोल फंगीसाइड्स की प्रभावशीलता जांचने की मानकीकृत तकनीकों पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि उन्नत इन-विट्रो और इन-विवो स्क्रीनिंग तकनीकें अनुसंधान प्रक्रिया को तेज और अधिक सटीक बनाती हैं।

सतत खेती और माइकोराइजा तकनीक पर चर्चा

डॉ. अथ्रेय देवनूर ने आर्बस्कुलर माइकोराइजा फंगी (AMF) के उन्नत उत्पादन सिस्टम पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माइकोराइजा तकनीक मिट्टी की जैव विविधता, पोषक तत्वों के अवशोषण और फसल की सहनशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसी प्रकार डॉ. जॉन पीटर ने बैसिलस आधारित बहुउद्देशीय बायोपेस्टीसाइड फॉर्मूलेशन पर शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि ये जैविक समाधान फंगल रोगों और निमेटोड नियंत्रण के साथ-साथ पौधों की वृद्धि को भी बढ़ावा देते हैं।

डॉ. नरेश शेजवाल ने कृषि जैव-प्रौद्योगिकी और पर्यावरण-अनुकूल खेती समाधानों पर अपने विचार साझा किए।

कृषि जैव-प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती भूमिका

कार्यक्रम में भारतीय कृषि जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
शिवाली एस. ने ग्रीनग्राही की enFUSION™ बायोएक्टिव डिलीवरी तकनीक के माध्यम से बायोफर्टिलाइजर के भविष्य पर प्रकाश डाला।

ओम डोले ने भारतीय कृषि जैव-प्रौद्योगिकी के भविष्य पर प्रस्तुति देते हुए माइक्रोबियल तकनीकों, बायोमॉलिक्यूल्स और स्वदेशी नवाचारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत आयात पर निर्भरता कम करके जैविक कृषि उत्पादों का वैश्विक केंद्र बन सकता है।

जलवायु-स्मार्ट और टिकाऊ खेती की दिशा में प्रयास

मनोज एएम ने फाइलोस्फीयर माइक्रोबायोम तकनीक, बायोस्टिमुलेंट्स और मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक कृषि को जल संकट, तापमान परिवर्तन और मिट्टी की गिरती गुणवत्ता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान आधारित समाधानों की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि जैविक कृषि तकनीकें केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करतीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि लागत कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

तकनीकी पैनल चर्चाओं में उभरे नए विचार

दूसरे तकनीकी पैनल चर्चा सत्र में कल्याणी नारायणन ने बायोस्टिमुलेंट्स और उन्नत जैविक तकनीकों के वैश्विक अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अनुसंधान आधारित नवाचार कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

जॉय तिलक देब ने माइक्रोबियल समाधानों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये तकनीकें फसल उत्पादकता और मिट्टी स्वास्थ्य दोनों को बेहतर बनाती हैं।

डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने आधुनिक कृषि प्रणालियों में अगली पीढ़ी के जैविक उत्पादों को शामिल करने की आवश्यकता बताई।

डॉ. केआरके रेड्डी ने पैनल चर्चा का संचालन करते हुए माइक्रोबियल और बायोस्टिमुलेंट तकनीकों को कृषि के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

भारत बन सकता है वैश्विक बायो-फर्टिलाइजर हब

पहले तकनीकी पैनल चर्चा में शन्मुगम सम्बंथन ने वैश्विक उर्वरक बाजार और निर्यात अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि भारत अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन करे, तो वह कृषि जैविक उत्पादों का बड़ा निर्यातक बन सकता है।

मनोज वर्ष्णेय ने कहा कि जिस प्रकार भारत ने एग्रोकेमिकल क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है, उसी प्रकार बायो-फर्टिलाइजर क्षेत्र में भी विश्व नेतृत्व हासिल किया जा सकता है।

उद्घाटन सत्र में सहयोग और नवाचार पर जोर

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अमित खरे, फाउंडर एवं मैनेजिंग पार्टनर, स्नेल इंटीग्रल, ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और ज्ञान साझा करना ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

संदीपा कानिटकर, CMD, Kan Biosys एवं BASAI की अध्यक्ष, ने थीम सेटिंग एड्रेस देते हुए भारत को कृषि जैविक निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता, तकनीक और उद्योग सहयोग के माध्यम से भारत वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

टीमवर्क और समर्पण की मिसाल बना आयोजन

आयोजकों ने कार्यक्रम की सफलता का श्रेय प्रतिभागियों, उद्योग साझेदारों, प्रायोजकों, वक्ताओं, मीडिया पार्टनर्स और पूरी आयोजन टीम को दिया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं था, बल्कि कृषि और जैविक नवाचार के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने की सामूहिक पहल थी।

स्नेल इंटीग्रल की टीम ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की। आयोजकों के अनुसार, कई ऐसे लोग थे जो मंच पर दिखाई नहीं दिए, लेकिन उनकी मेहनत और समर्पण ही इस सफलता की असली ताकत बने।

2027 में फिर होगा आयोजन

बायो-एग्री नेक्स्ट 2026 के सफल समापन के साथ आयोजकों ने घोषणा की कि अब यह यात्रा अगले पड़ाव की ओर बढ़ चुकी है।
“बायो-एग्री नेक्स्ट 2027 (सीजन 3)” का आयोजन नई दिल्ली में किया जाएगा, जहां और भी बड़े स्तर पर वैश्विक कृषि नवाचार, जैविक तकनीक और टिकाऊ खेती पर चर्चा होगी।

यह आयोजन न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाला साबित हुआ है। कृषि जैविक उत्पादों, माइक्रोबियल तकनीकों और सतत खेती की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आने वाला समय विज्ञान आधारित और पर्यावरण-अनुकूल कृषि का होगा।

 

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