डीडीयू-जीकेवाई 2.0 से ग्रामीण युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण का बड़ा अवसर, अक्टूबर से शुरू होंगे 1,164 प्रशिक्षण बैच

The Ministry of Rural Development will launch DDU-GKY 2.0 training batches in most states and Union Territories starting October 2026.

The Ministry of Rural Development will launch DDU-GKY 2.0 training batches in most states and Union Territories starting October 2026.

The Ministry of Rural Development will launch DDU-GKY 2.0 training batches in most states and Union Territories starting October 2026.

ग्रामीण भारत के युवाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें उद्योग की जरूरत के अनुरूप कौशल प्रदान करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय अक्टूबर 2026 से अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दीन दयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) 2.0 के तहत नए प्रशिक्षण बैच शुरू करने जा रहा है। इस पहल के पहले चरण में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 34,920 ग्रामीण युवाओं के लिए 1,164 प्रशिक्षण बैच अक्टूबर 2026 से शुरू किए जाने की तैयारी है।

इस योजना का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को Skill Training उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। ग्रामीण युवाओं को उनकी क्षमता और बाजार की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित करने से न केवल उनके रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के अंतर्गत 31 दिसंबर 2027 तक 3,57,112 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य स्वीकृत किया गया है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशिक्षण परियोजनाओं की तैयारी, लक्ष्य आवंटन, युवाओं की पहचान और डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

14 राज्यों में अक्टूबर से शुरू होंगे प्रशिक्षण बैच

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले चरण में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशिक्षण बैच शुरू करने की तैयारियों की समीक्षा की गई है।

इनमें ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पुडुचेरी, कर्नाटक, तेलंगाना और बिहार शामिल हैं।

इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 31 दिसंबर 2027 तक कुल 3,57,112 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने का स्वीकृत लक्ष्य है। इसी दिशा में अक्टूबर 2026 में 34,920 ग्रामीण युवाओं के लिए 1,164 प्रशिक्षण बैच शुरू करने की तैयारी की गई है।

यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगारपरक शिक्षा और प्रशिक्षण का एक बड़ा अवसर उपलब्ध करा सकती है। विशेष रूप से ऐसे युवा, जिनके पास औपचारिक उच्च शिक्षा या तकनीकी प्रशिक्षण के सीमित अवसर हैं, वे अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार विभिन्न रोजगारपरक पाठ्यक्रमों का लाभ उठा सकते हैं।

24 राज्यों ने 1,200 से अधिक परियोजनाओं के लिए आवंटित किए लक्ष्य

मंत्रालय के अनुसार डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से पता चलता है कि 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 1,200 से अधिक परियोजनाओं के लिए 5.6 लाख लक्ष्य आवंटित किए जा चुके हैं।

इससे संकेत मिलता है कि योजना को लागू करने के लिए राज्यों में व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी लक्ष्य आवंटित करने की प्रक्रिया जारी है।

सरकार की योजना के अनुसार चरणबद्ध समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रशिक्षण बैच शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वीकृत लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि निर्धारित समयसीमा के भीतर वास्तविक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में परिवर्तित हों।

ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर

डीडीयू-जीकेवाई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके तहत ग्रामीण गरीब युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण की अवधि सामान्य तौर पर 3 महीने से लेकर 12 महीने तक होती है।

योजना की मूल भावना यह है कि ग्रामीण युवाओं को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें ऐसे कौशल प्रदान किए जाएं जिनकी रोजगार बाजार में मांग है। इससे युवाओं को प्रशिक्षण के बाद नौकरी या आजीविका के अन्य अवसरों से जुड़ने में मदद मिल सकती है।

आज के समय में रोजगार के क्षेत्र में तकनीकी जानकारी, डिजिटल क्षमता, संचार कौशल और व्यावसायिक दक्षता की मांग लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में रोजगारपरक Skill Training ग्रामीण युवाओं के लिए आर्थिक अवसरों का नया रास्ता खोल सकती है।

सभी 31 भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लक्ष्य आवंटित

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के कार्यान्वयन को लेकर हुई समीक्षा बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया गया।

मंत्रालय के अनुसार, 2026-28 की दो वर्षीय अवधि के लिए सभी 31 भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लक्ष्य आवंटित किए जा चुके हैं।

अब अगला महत्वपूर्ण चरण इन लक्ष्यों को परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों यानी पीआईए तक पहुंचाना और प्रशिक्षण बैचों को निर्धारित समय के भीतर शुरू करना है।

मंत्रालय ने कार्यान्वयन करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को लक्ष्य आवंटित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आह्वान किया है। इसके साथ ही निर्धारित समयसीमा के अनुसार प्रशिक्षण बैच शुरू करने पर भी जोर दिया गया है।

31 अक्टूबर तक पीआईए को लक्ष्य आवंटित करने की तैयारी

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 31 अक्टूबर 2026 तक प्रशिक्षण शुरू करने के लिए परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों को लक्ष्य आवंटित करना सुनिश्चित करना है।

मंत्रालय को प्राप्त जानकारी के अनुसार, पात्र ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण के लिए जुटाने के उद्देश्य से कार्यान्वयन करने वाले 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पीआईए को 5 लाख से अधिक लक्ष्य पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं।

इस प्रक्रिया में युवाओं की पहचान और उन्हें प्रशिक्षण के लिए प्रेरित करना एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र युवाओं तक योजना की जानकारी पहुंचाना और उन्हें प्रशिक्षण से जोड़ना इस पूरी पहल की सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंत्रालय के अनुसार अधिकांश राज्य अक्टूबर 2026 में प्रशिक्षण और ग्रामीण युवाओं को जुटाने की प्रक्रिया शुरू करने में सक्षम होंगे।

डिजिटल व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में Digital Portal को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। मंत्रालय ने बताया कि एकीकृत डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पोर्टल परियोजना की पूरी अवधि को सुगम बनाने के साथ-साथ दक्षता, पारदर्शिता और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा देने में सक्षम है।

एकीकृत डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से योजना के विभिन्न चरणों की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। इसमें प्रशिक्षण परियोजनाओं से संबंधित जानकारी, लक्ष्य, कार्यान्वयन और अन्य प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से प्रबंधित करने की सुविधा मिलेगी।

डिजिटल निगरानी का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी हो सकता है कि योजना की प्रगति से जुड़ी जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध हो और संबंधित स्तरों पर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

राज्य कोषागार पोर्टल से एकीकरण पर विशेष ध्यान

समीक्षा बैठक में राज्यों के Treasury Portals के साथ डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पोर्टल के एकीकरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई।

जहां यह कार्य अभी लंबित था, वहां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसे शीघ्र पूरा करने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने राज्यों को 30 सितंबर 2026 तक आवश्यक एकीकरण पूरा करने के लिए कहा है।

इस एकीकरण का उद्देश्य ग्रामीण कौशल पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा को बेहतर बनाना है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के मजबूत होने से योजना के वित्तीय संचालन में पारदर्शिता और प्रक्रिया की गति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पीआईए के लिए क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित करेगा मंत्रालय

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के डिजिटल प्लेटफॉर्म और उसकी कार्यप्रणाली को परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय अक्टूबर 2026 के दौरान चार स्थानों पर Hybrid Mode में क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है।

ये कार्यशालाएं निम्न स्थानों पर आयोजित की जाएंगी—

इन कार्यशालाओं में पीआईए को डीडीयू-जीकेवाई 2.0 पोर्टल, उससे जुड़ी प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी जाएगी।

इसके साथ ही कार्यान्वयन से जुड़ी समस्याओं और व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर भी मिलेगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि वे इन कार्यशालाओं में कुछ परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित करें।

प्रशिक्षण व्यवस्था को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की चुनौती

किसी भी कौशल विकास कार्यक्रम की सफलता केवल लक्ष्य निर्धारित करने से नहीं होती। वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि पात्र युवाओं तक प्रशिक्षण की जानकारी कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है, कितने युवा प्रशिक्षण से जुड़ते हैं और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें रोजगार या आजीविका के अवसर किस स्तर तक मिलते हैं।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में भी ग्रामीण युवाओं की पहचान, उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों तक लाना, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराना और प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ना महत्वपूर्ण चरण होंगे।

इसके लिए राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी। अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले प्रशिक्षण बैच इस दिशा में योजना के जमीनी कार्यान्वयन की महत्वपूर्ण शुरुआत होंगे।

वित्तीय स्थिति की भी हुई समीक्षा

समीक्षा बैठक के दौरान योजना की Financial Status पर भी चर्चा की गई। बैठक में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने संकेत दिया कि अक्टूबर 2026 से प्रशिक्षण बैच शुरू होने के साथ योजना के अंतर्गत व्यय में वृद्धि होने की उम्मीद है।

प्रशिक्षण गतिविधियों के विस्तार के साथ प्रशिक्षण संस्थानों, परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च भी बढ़ेगा। इसलिए योजना के प्रभावी संचालन के लिए वित्तीय प्रबंधन और समय पर भुगतान की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।

डिजिटल पोर्टल और राज्य कोषागार पोर्टल के एकीकरण को भी इसी व्यापक वित्तीय व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया आधार

भारत की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और ग्रामीण युवाओं की बढ़ती संख्या रोजगार और कौशल के अवसरों की तलाश में है। ऐसे में कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

जब किसी ग्रामीण युवा को रोजगारपरक प्रशिक्षण मिलता है और उसके बाद उसे रोजगार का अवसर प्राप्त होता है, तो इसका प्रभाव केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसकी आय में वृद्धि होने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और स्थानीय स्तर पर भी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत बड़ी संख्या में युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य इसी व्यापक ग्रामीण विकास दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है।

युवाओं के लिए रोजगार और कौशल के बीच सेतु

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 को ग्रामीण युवाओं के लिए Skill और Employment के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में देखा जा सकता है। योजना के माध्यम से युवाओं को उनकी क्षमता और रोजगार बाजार की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर जोर है।

तीन महीने से लेकर 12 महीने तक की प्रशिक्षण अवधि युवाओं को अलग-अलग प्रकार के कौशल हासिल करने का अवसर देती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के उन युवाओं को भी लाभ मिल सकता है, जो रोजगार के लिए दूसरे शहरों या औद्योगिक क्षेत्रों की ओर जाने की तैयारी कर रहे हैं।

हालांकि प्रशिक्षण के बाद वास्तविक रोजगार परिणाम प्रशिक्षण की गुणवत्ता, स्थानीय रोजगार बाजार, उद्योग की मांग और युवाओं की व्यक्तिगत परिस्थितियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करेंगे।

अक्टूबर 2026 से शुरू होगा नया चरण

ग्रामीण विकास मंत्रालय की हालिया समीक्षा के बाद डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के कार्यान्वयन को अब जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है।

पहले चरण में 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 34,920 ग्रामीण युवाओं के लिए 1,164 प्रशिक्षण बैच अक्टूबर 2026 से शुरू होने जा रहे हैं। वहीं 31 दिसंबर 2027 तक 3,57,112 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने का स्वीकृत लक्ष्य रखा गया है।

इसके साथ ही 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 1,200 से अधिक परियोजनाओं के लिए 5.6 लाख लक्ष्य आवंटित किए जाने से योजना के व्यापक विस्तार का संकेत मिलता है।

अब आने वाले महीनों में योजना की वास्तविक प्रगति इस बात से तय होगी कि प्रशिक्षण बैच कितनी तेजी से शुरू होते हैं, कितने पात्र ग्रामीण युवा इससे जुड़ते हैं, प्रशिक्षण की गुणवत्ता कैसी रहती है और प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार के अवसर किस स्तर तक मिलते हैं।

डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत डिजिटल व्यवस्था, क्षेत्रीय कार्यशालाओं, लक्ष्य आवंटन और समयबद्ध प्रशिक्षण शुरुआत पर दिया जा रहा जोर यह दर्शाता है कि ग्रामीण युवाओं के कौशल विकास को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

अगर निर्धारित समयसीमा के अनुसार लक्ष्य आवंटन, प्रशिक्षण और डिजिटल प्रक्रियाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह पहल बड़ी संख्या में ग्रामीण युवाओं को रोजगारपरक कौशल हासिल करने का अवसर उपलब्ध करा सकती है और उन्हें बदलते रोजगार बाजार के लिए तैयार करने में मदद कर सकती है।

ग्रामीण युवा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बीच मजबूत कड़ी बनाने की दिशा में डीडीयू-जीकेवाई 2.0 का अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाला नया चरण इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले समय में इसके माध्यम से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में युवाओं को कौशल विकास के अवसर मिलने की उम्मीद है।

 

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