यमुनानगर में फिजी वायरस का खतरा बढ़ा, धान की फसल बचाने के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवायजरी

The threat of Fiji virus has increased in Yamunanagar, the Agriculture Department has issued an advisory to save the paddy crop.

हरियाणा के यमुनानगर जिले में धान की फसल पर फिजी वायरस का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। पिछले वर्षों में इस बीमारी से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके बाद अब कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में दिखाई दे रहा है। विभाग ने इस बार धान की पनीरी तैयार करने के शुरुआती चरण से ही किसानों को जागरूक करना शुरू कर दिया है ताकि फसल को समय रहते सुरक्षित किया जा सके।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान समय रहते सावधानी बरतें और विभाग द्वारा जारी सलाह का पालन करें, तो इस वायरस के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

पिछले साल सैकड़ों एकड़ फसल हुई थी प्रभावित

जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष हरियाणा प्रदेश में एक लाख एकड़ से अधिक धान की फसल इस वायरस की चपेट में आ गई थी। अकेले यमुनानगर जिले में करीब 600 एकड़ क्षेत्र में फिजी वायरस के लक्षण पाए गए थे।

फसल में संक्रमण बढ़ने से किसानों की उपज पर गंभीर असर पड़ा था। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार कृषि विभाग पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती सावधानी और सही कृषि प्रबंधन से इस बीमारी के फैलाव को काफी हद तक रोका जा सकता है।

क्या है फिजी वायरस?

धान की फसल में फैलने वाली यह बीमारी पौधों की सामान्य वृद्धि को प्रभावित करती है। संक्रमित पौधे सामान्य पौधों की तुलना में काफी छोटे रह जाते हैं और उनकी जड़ें भूरे रंग की दिखाई देने लगती हैं।

इस बीमारी के कारण पौधों की बढ़वार रुक जाती है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट देखने को मिलती है। कई बार खेत में पौधों की ऊंचाई असमान दिखाई देती है और पूरी फसल कमजोर हो जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी सबसे पहले वर्ष 2022 में हरियाणा और पंजाब के कुछ जिलों में बड़े स्तर पर देखी गई थी। इसके बाद से हर साल यह वायरस किसानों के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है।

कैसे फैलता है यह वायरस?

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बीमारी के फैलने में “सफेद पीठ वाला पीला तेला” नामक कीट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह कीट जब किसी संक्रमित पौधे का रस चूसता है, तो वायरस उसके शरीर में पहुंच जाता है। इसके बाद यह कीट अपने पूरे जीवनकाल में दूसरे पौधों तक वायरस फैलाने की क्षमता रखता है।

यही कारण है कि खेतों में इस कीट की संख्या बढ़ने पर वायरस का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

अगेती रोपाई में ज्यादा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी यानी अगेती रोपाई वाली धान की फसल में इस वायरस का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है।

विशेष रूप से संकर और परमल किस्मों में इस बीमारी की संभावना अधिक पाई गई है, जबकि बासमती प्रजातियों में इसका असर अपेक्षाकृत कम देखा गया है।

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे निर्धारित समय पर ही धान की रोपाई करें और बहुत जल्दी बुवाई से बचें।

पनीरी तैयार करते समय बरतें सावधानी

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसानों को पनीरी तैयार करने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिस खेत में पिछले वर्ष वायरस के लक्षण दिखाई दिए थे, वहां इस बार पनीरी तैयार नहीं करनी चाहिए। इससे संक्रमण दोबारा फैलने की संभावना कम हो सकती है।

इसके अलावा छायादार स्थानों पर पनीरी की बुवाई करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ऐसी जगहों पर नमी अधिक रहती है और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है।

संक्रमित पौधों को तुरंत हटाएं

यदि खेत में वायरस से संक्रमित पौधे दिखाई दें, तो उन्हें तुरंत उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे पौधों को खेत में छोड़ने से वायरस तेजी से अन्य पौधों में फैल सकता है। संक्रमित पौधों को मिट्टी में गहराई से दबाना भी एक प्रभावी तरीका माना जाता है।

कृषि वैज्ञानिक किसानों को सलाह दे रहे हैं कि किसी भी प्रकार की घबराहट में कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग न करें। बिना विशेषज्ञ सलाह के अत्यधिक दवाओं का प्रयोग फसल और मिट्टी दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

जिले में बड़े पैमाने पर होती है धान की खेती

यमुनानगर जिले में इस वर्ष करीब 2.14 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की रोपाई होने का अनुमान है। ऐसे में यदि वायरस का प्रकोप बढ़ता है, तो इसका असर बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ सकता है।

इसी कारण कृषि विभाग गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करने और समय पर सलाह देने में जुटा हुआ है।

कृषि विभाग ने जारी की अहम सलाह

कृषि विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों के लिए कुछ जरूरी सुझाव जारी किए हैं:

किसानों की जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि फिजी वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता और समय पर सावधानी है।

यदि किसान शुरुआती लक्षणों को पहचान लें और कृषि विभाग द्वारा जारी एडवायजरी का पालन करें, तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

बदलते मौसम और नई बीमारियों के दौर में वैज्ञानिक खेती और समय पर जानकारी ही किसानों की सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है।

 

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