तीसरे अग्रिम अनुमान ने दिखाई खेती की ताकत, देश का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा: शिवराज सिंह चौहान

Third advance estimate showed the strength of agriculture, country's food grain production reached record level: Shivraj Singh Chauhan

भारत के कृषि क्षेत्र से बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान (Third Advance Estimates) के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन इतिहास में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इन आंकड़ों को मंजूरी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों का ही यह बड़ा परिणाम है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 3765.63 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष 2024-25 के 3577.32 लाख टन उत्पादन की तुलना में लगभग 188 लाख टन (5.3 प्रतिशत) अधिक है। यह आंकड़ा भारतीय कृषि इतिहास में अब तक का सबसे अधिक खाद्यान्न उत्पादन माना जा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस उपलब्धि के लिए देश के अन्नदाताओं को बधाई देते हुए कहा कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग और सरकार की किसान हितैषी नीतियों ने मिलकर कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

चावल, गेहूं और मक्का ने बनाया नया रिकॉर्ड

फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में प्रमुख अनाजों का उत्पादन मजबूत बढ़त के साथ रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। अनुमान के अनुसार, चावल का उत्पादन 1540.24 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 1501.84 लाख टन था। यानी इस बार 38.40 लाख टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इसी प्रकार, गेहूं उत्पादन 1206.57 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष के 1179.45 लाख टन की तुलना में 27.12 लाख टन अधिक है। वहीं मक्का उत्पादन में सबसे बड़ी छलांग देखने को मिली है। इस वर्ष मक्का का उत्पादन रिकॉर्ड 550.93 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले साल के 434.09 लाख टन से लगभग 116.84 लाख टन अधिक है।

इसके अलावा, श्री अन्न (मिलेट्स) का उत्पादन 175.84 लाख टन रहने का अनुमान है, जिससे पोषण आधारित खेती और मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की सरकार की नीति को मजबूती मिलती दिखाई दे रही है।

दलहन उत्पादन में भी सुधार

देश में दलहन उत्पादन की स्थिति भी संतोषजनक बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, तूर (अरहर) का उत्पादन 35.92 लाख टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर है। वहीं चना उत्पादन 125.14 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 111.14 लाख टन की तुलना में 14 लाख टन अधिक है।

इसके अलावा मसूर उत्पादन 17.62 लाख टन अनुमानित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन उत्पादन में यह सुधार देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

तिलहन उत्पादन में शानदार बढ़त

तिलहन फसलों में भी इस बार उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। वर्ष 2025-26 में कुल तिलहन उत्पादन 430.59 लाख टन अनुमानित है।

इसमें मूंगफली उत्पादन 130.74 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.32 लाख टन अधिक है और यह भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं सोयाबीन उत्पादन 125.96 लाख टन अनुमानित किया गया है।

रेपसीड एवं सरसों उत्पादन 137.68 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 126.67 लाख टन से 11.01 लाख टन अधिक है। इससे खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

गन्ना उत्पादन ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

वाणिज्यिक फसलों में गन्ना उत्पादन रिकॉर्ड 5000.63 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 4546.11 लाख टन की तुलना में 454.52 लाख टन अधिक है। यह वृद्धि चीनी उद्योग और एथेनॉल उत्पादन के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

वहीं कपास उत्पादन 290.24 लाख गांठें (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) और जूट उत्पादन 91.76 लाख गांठें अनुमानित किया गया है।

वैज्ञानिक शोध और नई तकनीकों का बड़ा योगदान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि उत्पादन में हुई इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और उसके संस्थानों की अहम भूमिका रही है। जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई क्लाइमेट-रेज़िलिएंट फसल किस्मों, बेहतर बीज, वर्षा आधारित खेती की तकनीकों और वैज्ञानिक सलाह ने किसानों को लाभ पहुंचाया है।

उन्होंने बताया कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत वैज्ञानिकों ने सीधे किसानों तक पहुंचकर उन्हें आधुनिक खेती, बेहतर उत्पादन तकनीक, जल संरक्षण और जलवायु-स्मार्ट खेती के बारे में जागरूक किया।

339 नई फसल किस्में और रिकॉर्ड बीज उत्पादन

वर्ष 2025-26 में ICAR ने विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए 339 नई फसल किस्में जारी कीं, जिनमें अनाज, दलहन, तिलहन, वाणिज्यिक और चारा फसलें शामिल हैं।

साथ ही, 2024-25 में ब्रीडर बीज उत्पादन 109,370.2 क्विंटल तक पहुंच गया, जबकि गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन 433,114.7 क्विंटल रहा। मृदा एवं जल प्रबंधन, डिजिटल मृदा बुद्धिमत्ता और सतत कृषि तकनीकों ने भी उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कुल मिलाकर, तीसरे अग्रिम अनुमान यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि भारत का कृषि क्षेत्र तेजी से मजबूत हो रहा है। रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन न केवल किसानों की मेहनत को दर्शाता है, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती प्रदान करता है।

 

 

 

 

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