VB-G RAM G Act 2025: ग्रामीण मजदूरों को बड़ी सौगात, 1 जुलाई से 300 रुपये न्यूनतम दैनिक मजदूरी, कई राज्यों में 25% तक बढ़ी मजदूरी

VB-G RAM G Act 2025: A big gift to rural laborers

केंद्र सरकार ने ग्रामीण मजदूरों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G Act, 2025] के तहत नई मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू हो गई हैं। सरकार का दावा है कि यह फैसला ग्रामीण श्रमिकों की आय बढ़ाने, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और गांवों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में इस योजना के तहत दैनिक मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं होगी। इससे लाखों ग्रामीण परिवारों की आय में सीधा इजाफा होने की उम्मीद है।

300 रुपये बना ग्रामीण मजदूरी का नया राष्ट्रीय मानक

नई अधिसूचना के अनुसार पहली बार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के तहत 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम न्यूनतम मजदूरी तय की गई है।

इससे पहले कई राज्यों में मजदूरी दर 300 रुपये से काफी कम थी। कुछ राज्यों में यह केवल 241 रुपये प्रतिदिन तक सीमित थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे सभी राज्यों की मजदूरी बढ़ाकर कम से कम 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।

सरकार के अनुसार इस फैसले का सीधा लाभ 21 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और प्रशासनिक इकाइयों के करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों को मिलेगा।

सभी राज्यों में बढ़ी मजदूरी

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार नई मजदूरी दरें देश के सभी 34 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न वेज रीजन में बढ़ाई गई हैं।

नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय औसत मजदूरी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

सरकार का कहना है कि यह अब तक की सबसे बड़ी मजदूरी बढ़ोतरी में से एक है।

कम मजदूरी वाले राज्यों को मिला सबसे अधिक लाभ

नई मजदूरी नीति का सबसे बड़ा उद्देश्य उन राज्यों को अधिक लाभ पहुंचाना है जहां पहले मजदूरी दर काफी कम थी।

इसी वजह से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 प्रतिशत से लेकर 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है।

वहीं अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के ग्रामीण मजदूरों को लगभग 24.5 प्रतिशत की सबसे अधिक बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा।

इसके अलावा उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, त्रिपुरा सहित कई राज्यों में भी मजदूरी दरों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।

सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी और पिछड़े राज्यों के श्रमिकों को अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

हरियाणा, केरल और गोवा में सबसे अधिक मजदूरी

जिन राज्यों में पहले से मजदूरी दर अपेक्षाकृत अधिक थी, वहां भी नई अधिसूचना के तहत संशोधन किया गया है।

नई मजदूरी दरों के अनुसार—

इसके अलावा पंजाब और कर्नाटक सहित कई राज्यों में भी मजदूरी दर 360 रुपये से अधिक निर्धारित की गई है।

इससे स्पष्ट है कि सरकार ने सभी राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों और निर्धारित मानकों के अनुसार मजदूरी में संशोधन किया है।

125 दिन का रोजगार भी मिलेगा

नई मजदूरी दरें केवल मजदूरी बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं।

VB-G RAM G Act, 2025 के तहत अब प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।

पहले की तुलना में रोजगार के दिनों में वृद्धि होने से ग्रामीण परिवारों को सालभर अधिक आय प्राप्त होगी और रोजगार की अनिश्चितता कम होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार अवधि बढ़ने और मजदूरी बढ़ने का संयुक्त प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक पड़ेगा।

शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा?

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है जब गांव समृद्ध होंगे और ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से मजबूत होंगे।

उन्होंने बताया कि सरकार ने रोजगार की अवधि बढ़ाकर 125 दिन कर दी है और साथ ही मजदूरी दरों में भी ऐतिहासिक वृद्धि की है।

उन्होंने कहा कि सबसे अधिक बढ़ोतरी उन राज्यों में की गई है जहां पहले मजदूरी सबसे कम थी ताकि जिन लोगों को सबसे अधिक सहायता की आवश्यकता है, उन्हें प्राथमिकता मिल सके।

वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से तय हुई मजदूरी

सरकार के अनुसार नई मजदूरी दरें पूरी तरह पारदर्शी और वैज्ञानिक प्रणाली के आधार पर निर्धारित की गई हैं।

इसमें वार्षिक मूल्य सूचकांक (Indexation) के साथ नई 300 रुपये की अंतरिम आधार मजदूरी को जोड़ा गया है ताकि मजदूरी निर्धारण निष्पक्ष हो और राज्यों के बीच लंबे समय से चली आ रही असमानताओं को कम किया जा सके।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया सहारा

विशेषज्ञों का मानना है कि मजदूरी बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में क्रय शक्ति बढ़ेगी।

जब ग्रामीण मजदूरों की आय बढ़ेगी तो वे स्थानीय बाजारों में अधिक खरीदारी करेंगे, जिससे छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और ग्रामीण उद्यमों को भी लाभ मिलेगा।

इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार मिलने से शहरों की ओर पलायन कम होने की संभावना भी बढ़ेगी।

सरकार का मानना है कि इस योजना के माध्यम से गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण भी होगा, जिससे कृषि, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

गरीब कल्याण और विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि VB-G RAM G Act, 2025 केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है।

बढ़ी हुई मजदूरी, 125 दिनों का रोजगार, बेहतर आय सुरक्षा और ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण से गांवों में विकास की गति तेज होगी। सरकार का मानना है कि इससे गरीब कल्याण, अंत्योदय और ‘विकसित भारत 2047′ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

VB-G RAM G Act, 2025 के तहत 1 जुलाई 2026 से लागू नई मजदूरी दरें ग्रामीण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आई हैं। पहली बार पूरे देश में 300 रुपये प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की गई है, जबकि कई राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही, 125 दिनों के गारंटीकृत रोजगार का प्रावधान ग्रामीण परिवारों की आय और आजीविका को और मजबूत करेगा।

यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे करोड़ों ग्रामीण श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और समावेशी विकास को नई गति मिलेगी।

 

 

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