चुनावी नतीजों से पहले संयुक्त किसान मोर्चा को क्यों लगा डर, उठाई ये मांग

֍:संयुक्त किसान मोर्चा की गुहार §ֆ:बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों के विपरीत, किसानों ने एसकेएम के साथ लिखित समझौते को लागू करने में घोर विश्वासघात के खिलाफ भाजपा के चुनाव अभियान का सीधा विरोध किया था. खासकर एमएसपी और ऋण माफी के संबंध में और इसकी कॉर्पोरेट नीतियों को उजागर करने के लिए. चालीस से अधिक भारतीय किसान यूनियनों के गठबंधन एसकेएम ने कहा कि बड़े पैमाने पर और शांतिपूर्ण विरोध ने किसानों, श्रमिकों और सभी गरीब वर्गों को अपनी आजीविका के मुद्दों को आगे बढ़ाने, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों की रक्षा करने में मदद की. इस प्रकार, चुनावी लड़ाई भाजपा और आम लोगों के बीच सिमट गई.

§֍:750 से अधिक किसानों की हुई थी मौत§ֆ:उन्होंने कहा कि 13 महीने तक चले किसान आंदोलन के दौरान 750 से अधिक किसानों की मौत हुई थी. तब भाजपा ने किसानों को देशद्रोही बताया था, जिसे विदेशी आतंकवादियों और खालिस्तानियों द्वारा वित्त पोषित किया गया था. एसकेएम ने कहा कि चुनाव के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के शीर्ष नेताओं ने लगातार प्रमुख अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण देने की हिम्मत करके आदर्श आचार संहिता और भारत के संविधान का उल्लंघन किया. एसकेएम ने कहा कि जानबूझकर सौहार्दपूर्ण सामाजिक जीवन को नष्ट करने के उद्देश्य से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया.

§֍:क्या है एसकेएम की मांग§ֆ:एसकेएम ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि वह दंडात्मक कार्रवाई करे और पीएम नरेंद्र मोदी समेत कानून का उल्लंघन करने वालों पर छह साल का चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाए. दुर्भाग्य से, चुनाव आयोग ने निष्क्रियता का मौन रास्ता अपनाया है और कार्रवाई में देरी की. इस प्रकार, संवैधानिक जिम्मेदारी को बनाए रखने में ईसीआई की विफलता ने भाजपा की विभाजनकारी विचारधारा को प्रबल होने और चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को प्रभावित करने की अनुमति दी.

§संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने रविवार को चुनाव आयोग को एक खुला पत्र लिखकर ‘स्वतंत्र और पारदर्शी’ मतगणना सुनिश्चित करने का आग्रह किया. लोकसभा चुनाव के सात चरणों की मतगणना 4 जून को होगी. खुले पत्र में एसकेएम ने कहा कि वे मतगणना प्रक्रिया में छेड़छाड़ को लेकर आशंकित हैं. एसकेएम ने अपने पत्र में चुनाव आयोग से प्रक्रिया के अनुसार, स्वतंत्र और पारदर्शी मतगणना सुनिश्चित करने और नियमों के अनुसार समय-समय पर जनता के साथ वोटों का सटीक विवरण साझा करने का आग्रह किया है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी पर संदेह न हो.

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