उर्वरक डालने की ये 10 गलतियां किसानों को पड़ती हैं महंगी, जानिए सही तरीका

क्या आप भी उर्वरक डालते समय ये गलतियां करते हैं? जानिए उर्वरक उपयोग की 10 सबसे बड़ी गलतियां, उनके नुकसान और संतुलित पोषण का सही तरीका।

खेती में उर्वरकों का सही उपयोग अच्छी पैदावार और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल का आधार माना जाता है। आधुनिक कृषि में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि किसान उर्वरकों पर तो अच्छा-खासा खर्च करते हैं, फिर भी उन्हें अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पाता। इसका सबसे बड़ा कारण उर्वरकों की कमी नहीं, बल्कि उनका गलत उपयोग होता है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार भारत में बड़ी संख्या में किसान उर्वरक डालते समय ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे न केवल उत्पादन कम होता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी धीरे-धीरे घटने लगती है। कई बार किसान अधिक उर्वरक डालने को अधिक पैदावार का मंत्र मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग ही अधिक लाभ दिला सकता है।

आइए जानते हैं उर्वरक उपयोग से जुड़ी ऐसी

उर्वरक डालने की 10 गलतियां, जो किसानों को हर साल आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं।

  1. बिना मिट्टी जांच के उर्वरक डालना

यह किसानों की सबसे बड़ी और सबसे आम गलती है।

अधिकांश किसान बिना यह जाने कि उनकी मिट्टी में कौन-सा पोषक तत्व कम है, हर साल एक जैसी मात्रा में DAP, यूरिया और अन्य उर्वरकों का उपयोग करते रहते हैं। जबकि हर खेत की मिट्टी अलग होती है और समय के साथ उसकी पोषक स्थिति भी बदलती रहती है।

मिट्टी जांच कराने से पता चलता है कि किस पोषक तत्व की कमी है और किसकी अधिकता। इससे किसान केवल जरूरी उर्वरक ही खरीदते हैं, लागत घटती है और उत्पादन बढ़ता है।

  1. केवल यूरिया पर अधिक निर्भर रहना

कई किसान मानते हैं कि जितनी ज्यादा यूरिया डालेंगे, उतनी ज्यादा फसल होगी।

वास्तव में यूरिया केवल नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है। पौधों को इसके अलावा फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, बोरॉन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है।

अत्यधिक यूरिया से—

  1. DAP का जरूरत से ज्यादा उपयोग करना

DAP किसानों का पसंदीदा उर्वरक है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग भी नुकसानदायक हो सकता है।

लगातार अधिक DAP डालने से मिट्टी में फॉस्फोरस का स्तर बढ़ जाता है। इससे जिंक, आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व पौधों को कम उपलब्ध हो पाते हैं।

इसलिए DAP का प्रयोग मिट्टी जांच और फसल की आवश्यकता के अनुसार ही करना चाहिए।

  1. पोटाश की अनदेखी करना

कई क्षेत्रों में किसान यूरिया और DAP तो डालते हैं, लेकिन पोटाश (MOP) का उपयोग नहीं करते।

पोटाश पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, पानी के उपयोग की दक्षता सुधारता है और दानों व फलों की गुणवत्ता बेहतर बनाता है।

यदि पोटाश की कमी हो जाए तो—

  1. सूक्ष्म पोषक तत्वों की अनदेखी

जिंक, बोरॉन, आयरन, मैग्नीशियम, सल्फर और कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व कम मात्रा में आवश्यक होते हैं, लेकिन इनका महत्व बहुत अधिक है।

यदि इनकी कमी हो जाए तो—

आज कई राज्यों में जिंक और सल्फर की कमी तेजी से बढ़ रही है।

  1. गलत समय पर उर्वरक डालना

सही उर्वरक भी यदि गलत समय पर दिया जाए तो उसका पूरा लाभ नहीं मिलता।

उदाहरण के लिए—

समय का ध्यान रखने से उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ जाती है।

  1. उर्वरक की गलत मात्रा का प्रयोग

कुछ किसान आवश्यकता से कम उर्वरक डालते हैं, जबकि कुछ अधिक मात्रा का उपयोग करते हैं।

दोनों स्थितियां नुकसानदायक हैं।

कम मात्रा से पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, जबकि अधिक मात्रा से—

  1. जैविक खाद का उपयोग न करना

लगातार केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

यदि गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट या हरी खाद का उपयोग किया जाए तो—

रासायनिक और जैविक पोषण का संतुलन ही टिकाऊ खेती की पहचान है।

  1. एक ही उर्वरक योजना हर साल अपनाना

कई किसान हर वर्ष बिना बदलाव के वही उर्वरक मात्रा अपनाते हैं।

लेकिन—

इसलिए उर्वरक प्रबंधन भी बदलना चाहिए। मिट्टी जांच, फसल चक्र और मौसम के अनुसार योजना बनाना अधिक लाभदायक होता है।

  1. कृषि विशेषज्ञों की सलाह न लेना

आज कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग किसानों को नियमित सलाह देते हैं।

इसके बावजूद कई किसान पुराने अनुभव या दूसरों की सलाह के आधार पर उर्वरक डालते हैं।

यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरक प्रबंधन अपनाएं तो—

सही उर्वरक प्रबंधन कैसे करें?

यदि किसान इन गलतियों से बचना चाहते हैं, तो उन्हें कुछ आसान नियम अपनाने चाहिए—

निष्कर्ष

उर्वरकों का अधिक उपयोग हमेशा अधिक उत्पादन की गारंटी नहीं होता। वास्तविक सफलता सही उर्वरक, सही मात्रा, सही समय और सही विधि अपनाने में है। बिना मिट्टी जांच के उर्वरक डालना, केवल यूरिया और DAP पर निर्भर रहना, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों की अनदेखी करना तथा जैविक खाद का उपयोग न करना जैसी गलतियां किसानों की लागत बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाएं, मिट्टी की नियमित जांच कराएं और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों का चयन करें, तो कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। स्वस्थ मिट्टी ही टिकाऊ खेती और भविष्य की खाद्य सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।

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