प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए 100 जिलों का चयन तय मानकों के आधार पर, हर राज्य को मिला प्रतिनिधित्व

100 districts have been selected for the Pradhan Mantri Dhan-Dhanya Krishi Yojana based on the prescribed criteria.

प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (DDKY) के तहत देश के 100 जिलों का चयन पूरी तरह पारदर्शी और वैज्ञानिक मानकों के आधार पर किया है। इन जिलों की पहचान कृषि क्षेत्र में पिछड़ेपन को ध्यान में रखते हुए कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता (Cropping Intensity) और कृषि ऋण वितरण की कम उपलब्धता जैसे तीन प्रमुख संकेतकों के आधार पर की गई है।

तीन प्रमुख मानकों पर हुआ जिलों का चयन

सरकार के अनुसार प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना का उद्देश्य उन क्षेत्रों में कृषि विकास को गति देना है, जहां उत्पादन क्षमता और कृषि निवेश अपेक्षाकृत कम है।

इसी उद्देश्य से जिलों के चयन के लिए तीन प्रमुख मानदंड निर्धारित किए गए—

इन संकेतकों के आधार पर ऐसे जिलों की पहचान की गई, जहां लक्षित हस्तक्षेप से कृषि विकास की अधिक संभावनाएं हैं।

प्रत्येक राज्य को मिला प्रतिनिधित्व

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि योजना के तहत प्रत्येक राज्य को शामिल किया गया है। राज्यों के लिए जिलों की संख्या उनके शुद्ध बोए गए क्षेत्र (Net Cropped Area) और परिचालित कृषि जोतों (Operational Holdings) की संख्या के आधार पर निर्धारित की गई है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य देशभर में संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित करना तथा उन क्षेत्रों में कृषि विकास को बढ़ावा देना है, जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

सार्वजनिक आंकड़ों के आधार पर तैयार हुई चयन प्रक्रिया

सरकार ने बताया कि जिलों के चयन के लिए उपयोग की गई कार्यप्रणाली पूरी तरह सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है।

कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कृषि ऋण वितरण से संबंधित प्रकाशित आंकड़ों का विश्लेषण कर 100 जिलों का चयन किया गया है। इसलिए चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।

किसी भी राज्य को नहीं किया गया बाहर

लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि योजना से किसी भी राज्य को बाहर नहीं रखा गया है।

प्रत्येक राज्य को कम-से-कम एक जिला योजना में शामिल किया गया है। इसलिए किसी राज्य के साथ भेदभाव या उसे योजना से बाहर रखने का प्रश्न ही नहीं उठता।

राज्य चाहें तो अन्य जिलों में भी लागू कर सकते हैं मॉडल

केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि यदि किसी राज्य को लगता है कि उसके अन्य जिले भी इसी प्रकार के विशेष कृषि हस्तक्षेप की आवश्यकता रखते हैं, तो वह अपने प्रशासनिक तंत्र और उपलब्ध योजनागत संसाधनों का उपयोग करते हुए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की कार्यप्रणाली और मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू कर सकता है।

इससे राज्यों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कृषि विकास कार्यक्रमों का विस्तार करने की सुविधा मिलेगी।

कृषि विकास को मिलेगा नया आधार

सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत चयनित जिलों में लक्षित निवेश, बेहतर कृषि प्रबंधन, वित्तीय समावेशन और तकनीकी सहायता के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल सघनता में सुधार लाने और किसानों तक संस्थागत ऋण की पहुंच मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और देश के कृषि क्षेत्र को अधिक संतुलित एवं टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

Exit mobile version