मौसम की मार से अलफांसो आम की फसल पर संकट, इस साल महंगा और कम मिल सकता है ‘आमों का राजा’

Alphonso mango crop in trouble due to weather; 'King of Mangoes' may be more expensive and less available this year

भारत में गर्मियों का मौसम आते ही आम की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने लगती है। देश में आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी कई लोकप्रिय किस्में दुनियाभर में मशहूर हैं। इनमें सबसे खास और महंगा माना जाता है अलफांसो आम, जिसे अपने स्वाद, खुशबू और गुणवत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बड़ी पहचान मिली हुई है। लेकिन इस बार मौसम की मार ने अलफांसो उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है।

महाराष्ट्र में इस साल खराब मौसम, अत्यधिक गर्मी और जलवायु परिवर्तन के असर के कारण अलफांसो आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कृषि अधिकारियों और किसानों के अनुसार कई क्षेत्रों में 85 से 90 प्रतिशत तक फसल प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में इस बार बाजार में अलफांसो आम की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतें बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

महाराष्ट्र में होती है सबसे ज्यादा पैदावार

भारत में अलफांसो आम की सबसे अधिक खेती महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में की जाती है। विशेष रूप से देवगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग इलाके अपने उच्च गुणवत्ता वाले अलफांसो आम के लिए प्रसिद्ध हैं।

हर साल देश और विदेश से बड़ी मात्रा में अलफांसो आम की मांग आती है। खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका तक भारतीय अलफांसो का निर्यात किया जाता है। लेकिन इस बार मौसम की खराब परिस्थितियों ने किसानों और व्यापारियों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

किसानों के सामने बड़ा संकट

देवगढ़ क्षेत्र के कई किसानों का कहना है कि इस साल पेड़ों पर अपेक्षा के अनुसार फल नहीं आए। जहां कुछ पेड़ों पर फल लगे भी, वहां अत्यधिक गर्मी के कारण वे समय से पहले खराब होने लगे।

कई छोटे किसानों को अपने ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करने में परेशानी हो रही है। कुछ किसानों को बाजार की मांग पूरी करने के लिए अन्य बड़े बागानों से आम खरीदने पड़ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान समय पर आपूर्ति नहीं कर पाएंगे, तो भविष्य में उनके नियमित ग्राहक दूसरे विकल्प तलाश सकते हैं। इसका असर आने वाले वर्षों में व्यापार पर भी पड़ सकता है।

मौसम में बदलाव बना मुख्य कारण

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार दिसंबर और जनवरी के दौरान दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखने को मिला। इससे आम के पेड़ों में फूल आने और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

इसके बाद अप्रैल और मई में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने लगी, जिसने फलों की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाया। कई क्षेत्रों में तेज गर्म हवाओं और असामान्य मौसम ने फलों को झुलसा दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी परिस्थितियों का असर अब भारतीय कृषि पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

अल नीनो का असर बढ़ा रहा चिंता

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है, जो वैश्विक तापमान और बारिश के पैटर्न को प्रभावित करती है। इसके कारण कई देशों में अत्यधिक गर्मी, सूखा या अनियमित वर्षा जैसी स्थितियां बनती हैं।

इस साल भी अल नीनो के मजबूत प्रभाव की संभावना जताई गई थी, जिसका असर एशिया सहित कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आम जैसी संवेदनशील फसलों पर इसका सीधा असर पड़ा है।

निर्यात कारोबार पर भी असर

भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। देश में उगाए जाने वाले अधिकांश आम की खपत घरेलू बाजार में ही हो जाती है, लेकिन अलफांसो आम का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में भी भेजा जाता है।

व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बार उत्पादन घटने से निर्यात कारोबार प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बढ़ते मालभाड़े ने भी व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।

कुछ निर्यातकों के अनुसार पश्चिम एशिया के देशों में भेजी जाने वाली शिपमेंट पर भी असर पड़ा है, जिससे आम कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

घरेलू बाजार में बढ़ सकती हैं कीमतें

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार अलफांसो आम की कम उपलब्धता के कारण बाजार में इसकी कीमतें बढ़ सकती हैं। खासतौर पर बड़े शहरों और ऑनलाइन बाजारों में इसकी मांग अधिक रहने की संभावना है।

हालांकि अन्य किस्मों के आम की पैदावार सामान्य रहने पर उनकी कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होने की उम्मीद है।

कृषि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अलफांसो आम प्रीमियम श्रेणी में आता है और इसकी मांग हमेशा अधिक रहती है। ऐसे में कम उत्पादन का सीधा असर कीमतों पर दिखाई देगा।

भारत का आम बाजार लगातार बढ़ रहा

कृषि और खाद्य क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार भारत का आम बाजार लगातार विस्तार कर रहा है। देश में हर साल करोड़ों टन आम का उत्पादन होता है और आम आधारित उत्पादों जैसे पल्प, जूस और प्रोसेस्ड फूड की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए वैज्ञानिक खेती और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा नहीं दिया गया, तो भविष्य में बागवानी फसलों पर संकट और गहरा सकता है।

किसानों को चाहिए तकनीकी सहयोग

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते मौसम के बीच किसानों को नई तकनीकों, मौसम आधारित सलाह और वैज्ञानिक प्रबंधन की जरूरत है।

ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, पौधों की सुरक्षा और जल संरक्षण जैसी तकनीकों के जरिए बागानों को गर्मी और सूखे से कुछ हद तक बचाया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सरकार और कृषि संस्थानों को भी आम उत्पादक किसानों के लिए विशेष योजनाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने चाहिए, ताकि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम किया जा सके।

इस बार अलफांसो आम की कम पैदावार ने यह साफ कर दिया है कि मौसम में बदलाव अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह सीधे किसानों की आय, कृषि उत्पादन और खाद्य बाजार को भी प्रभावित कर रहा है।

 

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